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कच्चे तेल में फिर लगी आग, ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार, क्या फिर महंगा होगा ईंधन?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। मिडिल ईस्ट का तनाव और रूस की सप्लाई से जुड़ी चिंताएं इसकी प्रमुख वजह हैं।

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क्या फिर महंगा होगा ईंधन?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड की कीमत शुक्रवार को 3.7 फीसदी बढ़कर 109.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई, जो मई के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल WTI की कीमत भी 3.5 फीसदी बढ़कर 101.41 डॉलर प्रति बैरल हो गई। तेल की कीमतों में इस तेजी ने दुनिया भर में ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

क्यों बढ़ रहे हैं कच्चे तेल के दाम?

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और रूस से तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता है। सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों के आसपास हमलों की खबरों और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव ने तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए तेल की सप्लाई का एक अहम समुद्री रास्ता है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता कम हो सकती है। इसके अलावा, रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के कारण तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हमलों ने भी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई है।

रूस से डीजल की सप्लाई पर भी सवाल

दुनिया के बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए रूस से डीजल की सप्लाई को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, अमेरिका में इस संबंध में प्रस्तावित समझौते का विरोध करने के लिए सांसदों ने विधेयक पेश किया है। वहीं, रूस की रिफाइनरी पर हमलों के कारण वहां से मिलने वाली सप्लाई को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में बाजार के कारोबारियों को आशंका है कि तेल और ईंधन की सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हो पाएगी। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है।

क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और ईंधन की कीमतों पर पड़ने की आशंका रहती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत बढ़ जाएंगी। घरेलू कीमतों पर रुपये की विनिमय दर, तेल कंपनियों की लागत और सरकार की नीतियों जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।

आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?

अगर मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है और रूस से तेल की सप्लाई प्रभावित रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इसके उलट, तनाव कम होने और सप्लाई सुधरने पर कीमतों को राहत मिल सकती है। फिलहाल भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने को लेकर निश्चित तौर पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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