क्या मकान मालिक अचानक बढ़ा सकता है किराया?

क्या आपका मकान मालिक अचानक किराया बढ़ाने की मांग कर रहा है? जानिए किराएदारों के कानूनी अधिकार, रेंट एग्रीमेंट से जुड़े नियम और मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 के तहत मकान मालिक क्या कर सकता है और क्या नहीं।

भारत के बड़े शहरों में किराए के मकान में रहना लाखों लोगों की मजबूरी और जरूरत दोनों है। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि मकान मालिक मनमाने तरीके से अचानक किराया बढ़ा देते हैं या किराएदार पर घर खाली करने का दबाव बनाने लगते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या मकान मालिक कानूनी रूप से ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है? इसका सीधा जवाब है नहीं। भारतीय कानून और मॉडल टेनेंसी एक्ट (Model Tenancy Act) के तहत मकान मालिक अपनी मर्जी से अचानक किराया नहीं बढ़ा सकता। किराएदार और मकान मालिक दोनों के अधिकार और सीमाएं रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement) के नियमों से बंधे होते हैं।

Tenant Owner Rule

क्या मकान मालिक अचानक बढ़ा सकता है किराया?

रेंट एग्रीमेंट 11 महीने का क्यों होता है?

किराया बढ़ाने के संबंध में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज आपका रेंट एग्रीमेंट होता है। आमतौर पर 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट बनवाया जाता है, जिसमें किराया बढ़ाने की दर और समय सीमा पहले से तय होती है। सामान्य नियमों के मुताबिक, एग्रीमेंट की 11 महीने की अवधि के दौरान मकान मालिक बीच में किराया बिल्कुल नहीं बढ़ा सकता। यदि एग्रीमेंट में हर साल 5% या 10% किराया बढ़ाने की शर्त शामिल है, तो वह इजाफा भी एग्रीमेंट की अवधि समाप्त होने के बाद ही लागू होगा। अगर मकान मालिक एग्रीमेंट खत्म होने से पहले ही अचानक किराया बढ़ाने की मांग करता है, तो किराएदार इसे मानने से साफ इनकार कर सकता है।

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