Budget 2024: ऊंचे पब्लिक कर्ज की वजह से बजट में कल्याणकारी कदमों के लिए सीमित गुंजाइश, 5.1 फीसदी तय हो सकती है लिमिट

Budget 2024: वित्त वर्ष 2021-24 के बीच पूंजीगत व्यय में 31 प्रतिशत की अच्छी वृद्धि हुई, जिससे आर्थिक वृद्धि को रफ्तार मिली। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि आगामी बजट में केवल राजकोषीय आंकड़ों से आगे बढ़कर रोजगार सृजन पर जोर दिया जा सकता है। इसके लिए श्रम-बहुल विनिर्माण, छोटे व्यवसायों के लिए ऋण, वैश्विक क्षमता केंद्रों का विस्तार करके सेवाओं के निर्यात पर निरंतर ध्यान दिया जा सकता है।

Budget 2024: भारत के सार्वजनिक ऋण के ऊंचे स्तर पर होने से अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने वाले कल्याणकारी कदम उठाने के लिए राजकोषीय गुंजाइश सीमित रह गई है। एक विदेशी ब्रोकरेज फर्म ने सोमवार को यह बात कही। ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन शैक्स ने पूर्ण बजट पेश होने के कुछ दिन पहले जारी एक रिपोर्ट में कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राजकोषीय घाटे को 5.1 प्रतिशत पर सीमित रखने के अंतरिम बजट में घोषित लक्ष्य पर टिकी रह सकती हैं।

अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए राजकोषीय गुंजाइश सीमित

रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशक बजट से राजकोषीय सशक्तीकरण की राह में कुछ ढिलाई और पूंजीगत व्यय से कल्याणकारी व्यय पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म को इसकी संभावना नहीं दिख रही है। गोल्डमैन शैक्स ने कहा, ‘‘हमारी राय में उच्च सार्वजनिक ऋण को देखते हुए अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए राजकोषीय गुंजाइश सीमित है। बुनियादी ढांचा बेहतर होने से सकारात्मक विकास के दीर्घकालिक प्रभाव पैदा हुए हैं, जिसे नीति-निर्माता छोड़ना नहीं चाहेंगे।’’

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