Bank Merger News : सोशल मीडिया पर इन दिनों सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) के बैंकों से जुड़ी एक खबर तेजी से वायरल हो रही है। इस खबर में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार ने 9 प्रमुख सरकारी बैंकों का विलय (Merger) करके उन्हें 3 बड़े बैंकों में मिलाने का आदेश जारी किया है। हालांकि, सरकार की आधिकारिक फैक्ट चेक एजेंसी प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के 'फैक्ट चेक' यूनिट ने इस पूरे दावे को पूरी तरह से फर्जी और निराधार करार दिया है। PIB ने साफ किया है कि सरकार ने ऐसा कोई भी आदेश या अधिसूचना जारी नहीं की है।
क्या केनरा बैंक, इंडियन बैंक समेत 9 सरकारी बैंकों का SBI, PNB, बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय होगा? PIB ने किया साफ
अधिसूचना बनाकर फैलाया गया झूठ
इंटरनेट पर फैलाए जा रहे इस फर्जी पत्र को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वह वित्त मंत्रालय द्वारा जारी 'भारत का राजपत्र' (Gazette of India) का आधिकारिक आदेश लगे। वायरल दस्तावेज में दावा किया गया था कि इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का विलय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में कर दिया जाएगा और इसे 'SBI ग्रुप' का नया नाम दिया जाएगा। इसी तरह, पत्र में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में मिलाने की बात कही गई थी। वहीं, केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूको बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) के साथ जोड़ने का फर्जी दावा किया गया था। PIB ने लोगों को सचेत करते हुए कहा कि इस तरह के किसी भी पत्र पर भरोसा न करें, यह पूरी तरह से फर्जी है।
पहले भी वायरल हो चुकी हैं ऐसी अफवाहें
बैंकों के विलय से जुड़ी झूठी खबरें वायरल होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जून महीने में भी एक मनगढ़ंत तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें एसबीआई, पीएनबी और केनरा बैंक के विलय की बात कही गई थी। उस समय भी PIB Fact Check को आगे आकर स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा था। बार-बार ऐसी अफवाहें फैलने के कारण बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच काफी भ्रम और चिंता का माहौल बन जाता है।
पुरानी वास्तविक घटनाओं का उठाया जा रहा फायदा
इन अफवाहों के इतनी जल्दी वायरल होने के पीछे एक मुख्य वजह भारत में पहले हुए बैंकों के असली विलय का इतिहास भी है। साल 2019 में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 10 सरकारी बैंकों का विलय करके 4 बड़े बैंक बनाए थे। उस समय देश में सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई थी। आम जनता और बैंक कर्मचारी पहले ही ऐसे बड़े बदलावों के गवाह रह चुके हैं, इसलिए जालसाज इसी बात का फायदा उठाकर फर्जी दस्तावेजों को असली जैसा बनाकर लोगों को आसानी से गुमराह कर देते हैं।
कैसे होती है बैंकों के विलय की असली प्रक्रिया?
सरकारी बैंकों के विलय जैसी बड़ी प्रक्रिया सिर्फ किसी सोशल मीडिया पोस्ट या अनधिकृत पत्र से लागू नहीं हो सकती। PIB और वित्तीय एक्सपर्ट्स के अनुसार, किसी भी PSU बैंक के विलय के लिए एक लंबी और वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है। इसमें वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सीधी भागीदारी होती है। इसके अलावा, संसद की मंजूरी और विभिन्न नियामक निकायों से अनुमति लेना आवश्यक होता है।
सत्यापित जानकारी पर ही करें भरोसा
फिलहाल सरकार के पास बैंकों के विलय का ऐसा कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। अधिकारियों ने आम नागरिकों और बैंक ग्राहकों को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप्स पर आने वाली ऐसी किसी भी खबर पर आंख मूंदकर विश्वास न करें और न ही इसे आगे शेयर करें। सरकार या बैंकिंग प्रणाली से जुड़े किसी भी बड़े फैसले की पुष्टि हमेशा केवल आधिकारिक माध्यमों, जैसे आरबीआई (RBI) की आधिकारिक वेबसाइट या वित्त मंत्रालय के संचार चैनलों के जरिए ही करें।
