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F&O से जल्दी अमीर नहीं, बर्बाद हो रहे निवेशक! एक्सपर्ट ने बताया निवेश का सही तरीका

शेयर बाजार के फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) सेग्मेंट में 99% रिटेल ट्रेडर्स को नुकसान होता है। लेकिन, फिर भी हर बार नए लोग इस आग से खेलने आ जाते हैं। आखिर क्या है निवेश का सही तरीका जानें?

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ऑप्शन मार्केट में लालच से हो रहा नुकसान

शेयर बाजार में निवेश शुरू करने के पीछे हर व्यक्ति का अपना मकसद होता है। कोई रिटायरमेंट के लिए पैसा जुटाना चाहता है, तो कोई बच्चों की पढ़ाई और घर खरीदने के लिए पूंजी बनाना चाहता है। लेकिन कुछ निवेशक ऐसे भी हैं, जो कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के लिए बाजार में उतरते हैं। खासकर युवाओं में Futures and Options (F&O) ट्रेडिंग को लेकर आकर्षण देखा जाता है। उन्हें लगता है कि थोड़े से पैसे लगाकर कम समय में बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है। इसी उम्मीद में कई बार निवेशक बिना पर्याप्त जानकारी और तैयारी के जोखिम उठा लेते हैं।

Weekend Investing के MD आलोक जैन ने बताया कि F&O ट्रेडिंग में नुकसान का जोखिम क्यों ज्यादा है। जानिए 35–40 की उम्र में निवेश शुरू करने वालों को कैसे बनाना चाहिए अपना पोर्टफोलियो। संजय कथूरिया के पॉडकास्ट में निवेश की रणनीति पर चर्चा करते हुए उन्होंने F&O को बेहद हाई-स्किल वाला गेम बताया। उनके मुताबिक, इसमें बिना तैयारी के उतरकर आसानी से पैसा कमाने की उम्मीद करना सही नहीं है। जैन ने यह भी बताया कि अगर आपने 35–40 साल की उम्र तक निवेश शुरू नहीं किया है, तो इसकी भरपाई जल्दबाजी में जोखिम उठाकर करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश की समझ विकसित करनी चाहिए।

क्यों F&O लोग गंवा रहे पैसा?

आलोक जैन के मुताबिक, F&O ऐसा सेगमेंट नहीं है जिसमें कोई भी व्यक्ति बिना सीखे और अभ्यास किए आसानी से पैसा कमा सकता है। पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि उनके आकलन के मुताबिक, इस सेगमेंट में करीब 1% लोग पैसा कमाते हैं, जबकि 99% लोग नुकसान उठाते हैं। जैन का कहना है कि F&O में सफल होने के लिए तेजी से फैसले लेने, बाजार की चाल समझने और भावनाओं पर नियंत्रण रखने की क्षमता जरूरी है।

छोटे पैसे से करें शुरुआत, उधार लेकर ट्रेडिंग करने से बचें

आलोक जैन ने F&O में दिलचस्पी रखने वालों के लिए छोटे कैपिटल से शुरुआत करने की सलाह दी। उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति इस सेगमेंट में अपना करियर बनाना चाहता है, तो वह 2–3 साल तक सीमित पूंजी के साथ अपनी रणनीति को परख सकता है। लेकिन इसके लिए शुरुआत में ही कुछ नियम तय होने चाहिए।

ट्रेडिंग शुरू करने से पहले यह तय करें कि कितना नुकसान होने पर आप अपनी रणनीति रोक देंगे। इसके अलावा, सही पोजिशन साइजिंग और रिस्क मैनेजमेंट सीखना जरूरी है। यानी किसी ट्रेड में कितना पैसा लगाना है और संभावित नुकसान को किस सीमा में रखना है, यह समझना होगा।

सेफ कुछ भी नहीं

जैन ने ऑप्शन सेलिंग (Options Selling) के संदर्भ में भी चेताया कि शुरुआती कुछ महीनों में नियमित मुनाफा मिलने से सुरक्षा का भ्रम पैदा हो सकता है। उनके मुताबिक, कई महीनों की कमाई एक ही खराब महीने में खत्म हो सकती है। इसलिए कुछ समय तक मुनाफा मिलने को स्थायी सफलता का प्रमाण नहीं मानना चाहिए। उनकी सलाह है कि अगर पर्याप्त समय और मेहनत के बावजूद ट्रेडिंग में सफलता नहीं मिल रही है, तो किसी दूसरे निवेश विकल्प पर विचार करना बेहतर हो सकता है।

बाजार के सामने जिद नहीं चलती

F&O में नुकसान होने के बाद कई निवेशक उसे जल्द से जल्द वापस कमाना चाहते हैं। आलोक जैन ने इसे एक बड़ी गलती बताया। उनके मुताबिक, अगर किसी ट्रेड में पैसा डूब गया है, तो उसी से हर हाल में नुकसान की भरपाई करने की जिद निवेशक को और बड़ी मुश्किल में डाल सकती है।

35–40 की उम्र में निवेश शुरू कर रहे हैं, तो क्या करें?

F&O में जल्द मुनाफा कमाने की चाह के पीछे एक बड़ी वजह निवेशकों का FOMO यानी पीछे छूट जाने का डर भी हो सकता है। खासकर वे लोग जिन्होंने 35–40 साल की उम्र तक निवेश शुरू नहीं किया है, दूसरों को बाजार से कमाई करते देखकर दबाव महसूस कर सकते हैं। लेकिन जैन के मुताबिक, यही जल्दबाजी सबसे बड़ी गलती बन सकती है। इसलिए देर से निवेश शुरू करने वालों को शुरुआत में ही ज्यादा जोखिम लेने के बजाय छोटे कदम उठाने चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह स्टोरी Weekend Investing के मैनेजिंग डायरेक्टर आलोक जैन द्वारा पॉडकास्ट में व्यक्त विचारों पर आधारित है। इसे व्यक्तिगत निवेश सलाह न समझें। निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम सहने की क्षमता और जरूरतों का आकलन करें। F&O में ट्रेडिंग में काफी जोखिम होता है और पूंजी का बड़ा हिस्सा या पूरी पूंजी गंवाने की आशंका हो सकती है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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