सोशल मीडिया पर आजकल रील्स और वीडियो की भरमार है, जहां आम निवेशकों को यह कहकर लुभाया जाता है कि मात्र ₹500 या ₹1000 महीने की SIP शुरू करें और 30 साल में ₹30 लाख से ज्यादा के मालिक बन जाएं! यह गणित कागजों पर बिल्कुल सही बैठता है, लेकिन, कोई भी इंफ्लूएंसर यह नहीं बताता कि आज से 30 साल बाद उस ₹30 लाख की बाजार में औकात (खरीदने की ताकत) क्या रह जाएगी? जब तक वह पैसा आपके हाथ आएगा, तब तक महंगाई उस रकम की चमक फीकी कर चुकी होगी।
आइए, एक उदाहरण से समझते हैं कि अगर आपने SIP के जरिए 15 साल में 50 लाख रुपये का फंड बनाया, तो महंगाई को ध्यान में रखने के बाद उसकी असली वैल्यू कितनी रह जाएगी।
15 सालों में 50 लाख रुपये जमा करने का कैलकुलेशन
- मासिक SIP राशि: 10,000 रुपये
- निवेश की अवधि: 15 साल
- रिटर्न की अनुमानित दर: 12%
- निवेश की गई कुल राशि: 18,00,000 रुपये
- अनुमानित रिटर्न: 32,45,759 रुपये
- 15 साल बाद फंड की कुल वैल्यू: 50,45,759 रुपये
15 साल बाद 50 लाख रुपये की असलियत
50 लाख रुपये एक बड़ी रकम लग सकती है, जिसका इस्तेमाल आप अपने निजी वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कर सकते हैं। लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। सिक्के का दूसरे पहलू से आपको रूबरू कराते हैं।
मान लीजिए कि हर साल महंगाई की औसत दर 6% है। आज जो चीज आपको 1 लाख रुपये में मिल सकती है, 15 साल बाद उसकी कीमत 2.4 लाख रुपये तक हो सकती है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि आज 50 लाख रुपये में आप जो चीजें खरीद सकते हैं, 15 साल बाद उतने ही पैसों में आप उतनी चीजें नहीं खरीद पाएंगे। आज से 15 साल बाद 50 लाख रुपये की वैल्यू महंगाई को एडजस्ट करने के बाद 20.9 लाख रुपये रह जाएगी। यानी आप हकीकत में 21 लाख रुपये के ही मालिक होंगे।
आपकी असली संपत्ति क्या है?
आपकी असली संपत्ति सिर्फ वह रकम नहीं है जो आपके इन्वेस्टमेंट ऐप पर दिख रही है। असली संपत्ति वह है, जिससे जरूरत पड़ने पर आप वास्तव में चीजें खरीद सकें। उदाहरण के लिए, अगर आप 15 साल बाद घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आज 50 लाख रुपये की रकम काफी लग सकती है। लेकिन अगर प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो उस समय उसी घर की कीमत कहीं ज्यादा हो सकती है।
आपको क्या करना चाहिए?
सबसे पहले, जैसे-जैसे आपकी आय बढ़े, अपनी SIP की रकम भी बढ़ाते रहें। हर साल 5–10% की बढ़ोतरी भी लंबे समय में एक बड़ा फर्क ला सकती है। दूसरा, आज की कीमतों के बजाय अपने भविष्य के खर्चों का हिसाब लगाएं। अंत में, अपने निवेश की नियमित समीक्षा करें और देखें कि क्या आपका पोर्टफोलियो आपके लक्ष्यों और महंगाई के हिसाब से सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
