Mohamed Muizzu : मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू 20 से 22 अक्टूबर तक पाकिस्तान की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर रहेंगे। किसी मालदीवी राष्ट्रपति की पाकिस्तान की यह यात्रा 11 साल बाद हो रही है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 60 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्ते 1966 में स्थापित हुए थे। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने रविवार को बताया कि यह यात्रा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निमंत्रण पर हो रही है। राष्ट्रपति मुइज्जू के साथ प्रथम महिला साजिदा मोहम्मद और एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आएगा, जिसमें कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। मालदीव के राष्ट्रपति के इस पाकिस्तान दौरे पर भारत की नजर है।
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू।
राष्ट्रपति जरदारी से मिलेंगे मुइज्जू
अपनी इस यात्रा के दौरान मुइज्जू पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मुलाकात करेंगे। जरदारी उनके सम्मान में राजकीय भोज भी आयोजित करेंगे। इसके अलावा मुइज्जू प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। विदेश कार्यालय के अनुसार, दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे। बातचीत में व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, कृषि, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के रास्ते तलाशे जाएंगे। इसके साथ ही दोनों पक्ष क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी साझा हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
बिजनेस फोरम और समझौते
यात्रा के दौरान पाकिस्तान-मालदीव बिजनेस फोरम का भी आयोजन होगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों के कारोबारी समुदायों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना और व्यापार व निवेश के नए अवसर तलाशना है। विदेश कार्यालय ने कहा कि इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े कई समझौतों और सहमति ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।11 साल के बाद हो रही यात्रा
पाकिस्तानी विदेश कार्यालय का कहना है कि यह यात्रा दोनों देशों की द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने तथा आपसी लाभ के नए रास्ते खोलने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। 11 वर्षों के अंतराल के बाद हो रही इस उच्चस्तरीय यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। अब सबकी नज़र इस पर रहेगी कि इस दौरे में किन समझौतों पर मुहर लगती है और रक्षा व समुद्री सुरक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सहयोग को कितना आगे बढ़ाया जाता है।
