​वर्ल्ड फेमस है कानपुर की कपड़ाफाड़ होली, जानिए 7 दिन तक क्यों चलता है रंग​

Pushpendra kumar

Mar 28, 2024

​​मथुरा में लट्ठमार, फूलों की होली तो काशी में मसाने की होली खेली जाती है।​​

Credit: Istock

यहां पढ़ें अपने शहर की खबरें

​कानपुर की होली​

लेकिन, कानपुर में सात दिन तक भौकाली होली खेली जाती है। यहां होली से ज्यादा गंगा मेला में हुड़दंग देखने को मिलता है।

Credit: Istock

पढ़ें काम की खबर

​ऐसे हुई गंगा मेला की शुरुआत​

कानपुर में गंगा मेला की शुरुआत 1942 में हुई थी। 1942 में व्यापारियों ने इस ऐतिहासिक होली की नींव रखी थी।

Credit: Istock

​ अंग्रेजों ने लगाया होली पर बैन​

सन 1942 में ब्रिटिश सरकार ने होली खेलने पर बैन लगा दिया और व्यापारियों का लगान बढ़ा दिया, जिसके खिलाफ जमींदारों ने जंग छेड़ दी।

Credit: Istock

You may also like

राजस्थान का पुराना नाम क्या था? नहीं माल...
साउथ का सिल्क सिटी कहलाता है ये शहर, आज ...

​ आजादी का बजा डंका​


अंग्रेज कलेक्टर ने जमींदारों को जेल में डाल दिया। फिर ग्रामीणों ने आजादी का बिगुल फूंक दिया और चारो तरफ प्रदर्शन करने शुरू कर दिए।

Credit: Istock

​होली खेलने का ऐलान​

जमींदारों की गिरफ्तारी से प्रदर्शन शुरू हुए और पूरे शहर में भयंकर होली खेली गई। ऐलान किया गया कि जब तक जमींदारों को नहीं छोड़ा जाएगा, तबतक लगातार होली खेली जाएगी।

Credit: Istock

​ अंग्रेजों ने मानी हार​

अंग्रेजों को हारकर अपना फैसला बदलना पड़ा और जेल से जमींदारों को छोड़ने के साथ लगान भी माफ करना पड़ा। इसी खुशी में ग्रामीणों ने रंग और गुलाल से यहां होली खेलने की शुरुआत की।

Credit: Istock

​​ हटिया होली मेला​​

वर्तमान में कानपुर हटिया होली मेला तक होली का उल्लास रहता है। इस बार 83वां होली का गंगा मेला 30 मार्च को मनाया जाएगा।

Credit: Istock

​​भैंसा गाड़ी में रंग भरकर चलते हैं होरियारे​​

शहर के जनरलगंज, नौघड़ा, बिरहाना रोड पर होरियारों की टोली भैंसा गाड़ी से रंग, अबीर और गुलाल की बौछार करती है।

Credit: Istock

इस स्टोरी को देखने के लिए थॅंक्स

Next: राजस्थान का पुराना नाम क्या था? नहीं मालूम होगा जवाब

ऐसी और स्टोरीज देखें