Scrap Policy पर योगी सरकार का बड़ा फैसला, UP में 1 अप्रैल से पहले कबाड़ होंगे 15 साल पुराने वाहन

  • Authored by: कुलदीप राघव
  • Updated Feb 3, 2023, 01:50 PM IST

Scrap Policy in UP: केंद्र सरकार की स्क्रैप पॉलिसी को प्रदेश में लागू कर रही योगी सरकार। 15 वर्ष या उससे अधिक के शासकीय व अर्धशासकीय वाहनों को कबाड़ करने के संबंध में जारी किया गया पत्र। निजी वाहनों के लिए रोड टैक्स में 15% और कमर्शियल वाहनों के लिए 8 वर्ष पर कुल टैक्स में 10% की छूट की अधिसूचना भी जारी।

UP Scrap Policy: योगी सरकार स्क्रैप पॉलिसी पर केंद्र सरकार के नए नोटिफिकेशन के तहत 1 अप्रैल 2023 से पहले प्रदेश में सभी 15 साल से पुराने वाहनों को स्क्रैप में भेजने के प्रति गंभीरता से प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है जिसमे केंद्र और राज्य सरकारों के सभी 15 साल पुराने वाहनों को स्क्रैप करना होगा। नया नियम निगमों और परिवहन विभाग की बस और अन्य गाड़ियों के लिए भी अनिवार्य होगा। सड़क परिवहन मंत्रालय की मंशा के अनुरूप प्रदेश सरकार 15 वर्ष से ऊपर के निजी वाहनों के साथ-साथ विभागों में लगे पुराने वाहनों को स्क्रैप में बदलने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए माइलस्टोन तय किए गए हैं। माइलस्टोन-1 के अंतर्गत वाहनों की जानकारी हेतु गूगल शीट के साथ 23-01-2023 को जारी आरवीएसएफ में 15 वर्ष या उससे अधिक के शासकीय व अर्धशासकीय वाहनों को कबाड़ करने के संबंध में पत्र जारी कर दिया गया है। 28-11-2022 को निजी वाहनों के लिए रोड टैक्स में 15% और कमर्शियल वाहनों के लिए 8 वर्ष पर कुल टैक्स में 10% की छूट के लिए अधिसूचना जारी की गई है। पुराने वाहनों पर लंबित देयता की एकमुश्त छूट की प्रक्रिया चल रही है। सभी पदाधिकारियों से कहा गया है कि अपने विभाग के 15 वर्ष पुराने वाहनों की जानकारी 5 फरवरी तक अवश्य दे दें ताकि आगे की कार्यवाही पूरी की जा सके।

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केंद्र सरकार देगी 300 करोड़ रुपए

इस हिस्से के प्रोत्साहन के लिए 2000 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। राज्यों को यह राशि 31मार्च तक पहले आओ पहले पाओ के आधार पर उपलब्ध होगी। राज्य को इस योजना के तहत प्रोत्साहन अनुदान के लिए पात्र बनने के लिए माइलस्टोन-1 और माइलस्टोन-2 हासिल करना है। प्रत्येक माइलस्टोन को प्राप्त करने के बाद मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे, राज्य सरकार को 300 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा।

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