अगर आपके बच्चे को PM CARES for Children Scheme के तहत छात्रवृत्ति मिलती है और उसका आधार कार्ड अभी तक नहीं बना है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि सिर्फ आधार नंबर नहीं होने या आधार से पहचान का सत्यापन फेल होने के कारण किसी पात्र बच्चे को योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा। सरकार ने ऐसे मामलों में वैकल्पिक दस्तावेजों और पहचान सत्यापन की व्यवस्था की है।
आधार कार्ड नहीं है तो कैसे मिलेगी छात्रवृत्ति?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने 14 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में राजपत्र अधिसूचना जारी की है। नए नियमों के तहत आधार नामांकन से लेकर बायोमेट्रिक सत्यापन में आने वाली समस्याओं तक के लिए वैकल्पिक व्यवस्था निर्धारित की गई है।
आधार कार्ड नहीं है तो कैसे मिलेगी छात्रवृत्ति?
नियमों के मुताबिक, जिन पात्र बच्चों को अभी तक आधार नंबर नहीं मिला है, उन्हें आधार नामांकन के लिए आवेदन करना होगा। नामांकन केंद्र से मिली पावती में नामांकन आईडी होनी चाहिए। यदि बच्चा 18 साल से कम उम्र का है, तो आधार नामांकन के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति जरूरी होगी। आधार नंबर जारी होने तक बच्चा निर्धारित वैकल्पिक दस्तावेजों के जरिए अपनी पहचान साबित कर सकता है। इसके साथ माता-पिता या कानूनी अभिभावक के साथ संबंध का प्रमाण भी देना होगा।
18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी?
नाबालिग बच्चों के लिए पहचान और उम्र साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, भारतीय पासपोर्ट या मान्यता प्राप्त शिक्षा बोर्ड की 10वीं अथवा 12वीं की मार्कशीट या प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज स्वीकार किए जा सकते हैं। पंजीकृत बाल देखभाल संस्था में रहने वाले पात्र बच्चों के लिए संबंधित अधिकारी की ओर से जारी जन्मतिथि प्रमाण पत्र का विकल्प भी दिया गया है।
बच्चे का माता-पिता या कानूनी अभिभावक से संबंध साबित करने के लिए तस्वीर वाला राशन कार्ड, पासपोर्ट और अधिसूचना में निर्धारित अन्य सरकारी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। गोद लिए गए बच्चों या कानूनी अभिभावक के संरक्षण में रहने वाले बच्चों के लिए सक्षम प्राधिकारी या अदालत से जारी संबंधित दस्तावेज भी मान्य हो सकते हैं।
18 साल या उससे ज्यादा उम्र के लाभार्थियों के लिए नियम
यदि लाभार्थी की उम्र 18 साल या उससे अधिक है और उसके पास आधार नंबर नहीं है, तो उसे आधार नामांकन की पावती के साथ निर्धारित पहचान दस्तावेज देने होंगे। इनमें मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड, भारतीय पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और 10वीं या 12वीं का प्रमाण पत्र शामिल हैं। कुछ सरकारी संस्थानों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की ओर से जारी पहचान पत्र और निर्धारित दिव्यांगता पहचान दस्तावेज भी स्वीकार किए जा सकते हैं, हालांकि कौन-सा दस्तावेज मान्य होगा, यह संबंधित श्रेणी और अधिसूचना में दी गई शर्तों पर निर्भर करेगा।
आधार का बायोमेट्रिक सत्यापन फेल हुआ तो?
कई बार उंगलियों के निशान, आंखों की पुतली या चेहरे की पहचान नहीं हो पाती। ऐसे मामलों में वैकल्पिक सत्यापन का रास्ता अपनाया जा सकता है। जहां संभव हो, दूसरे बायोमेट्रिक तरीके या ओटीपी के जरिए पहचान की पुष्टि की जा सकती है।
यदि बायोमेट्रिक और ओटीपी, दोनों से सत्यापन नहीं हो पाता है, तो सुरक्षित क्यूआर कोड या आधार पेपरलेस ऑफलाइन ई-केवाईसी दस्तावेज के जरिए भी आधार की प्रामाणिकता जांची जा सकती है। इसके लिए UIDAI के डिजिटल हस्ताक्षर का ऑफलाइन सत्यापन किया जाएगा।
सरकार ने क्यों दी यह राहत?
इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी समस्या या आधार कार्ड नहीं होने के कारण कोई पात्र बच्चा छात्रवृत्ति और योजना के दूसरे लाभों से वंचित न रह जाए। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग को पहचान और अभिभावक से संबंध की पुष्टि करनी होगी। साथ ही, इन मामलों का रिकॉर्ड रखकर समय-समय पर समीक्षा और ऑडिट भी किया जाएगा।
कब से लागू हुए नए नियम?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की अधिसूचना संख्या का.आ. 5628(अ) के अनुसार, नए नियम 14 अक्टूबर 2026 को राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से लागू हो गए हैं। योजना के पात्र बच्चों और उनके अभिभावकों को आधार नामांकन की स्थिति और उपलब्ध पहचान दस्तावेज तैयार रखने चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक सत्यापन कराया जा सके।
