AI की फर्जी तस्वीरें और चैटबॉट आपकी याददाश्त से कर रहे खिलवाड़, झूठ को सच मानने लगता है दिमाग

AI की फर्जी तस्वीरें, वीडियो और चैटबॉट कैसे इंसानी याददाश्त को प्रभावित कर रहे हैं? MIT और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के अध्ययन से जानिए झूठी यादों का खतरा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब सिर्फ सवालों के जवाब पाने या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं है। इसका असर हमारी सोच और याददाश्त पर भी पड़ने लगा है। हैरान करने वाली बात यह है कि AI से बनाई गई फर्जी तस्वीरें, वीडियो और गलत जानकारी वाले टेक्स्ट समरी लोगों को उन घटनाओं के बारे में भी गलत यादें दे सकते हैं, जिन्हें उन्होंने पहले देखा था। इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि लोगों को पता होने के बावजूद कि कंटेंट AI ने बनाया है, उनका दिमाग कई बार उस झूठी जानकारी को सच मान लेता है।

AI चैटबॉट से बात करने पर भी बन सकती हैं झूठी यादें

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AI की बनाई तस्वीरें बदल सकती हैं आपकी यादें

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) की वैज्ञानिक पैटी मेस की टीम ने एक अध्ययन में इस खतरे को समझने की कोशिश की। द वॉशिंगटन पोस्ट में साझा किए गए निष्कर्षों के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने कुछ लोगों को सामान्य तस्वीरें दिखाईं। कुछ समय बाद इनमें से कुछ लोगों को वही तस्वीरें दोबारा दिखाई गईं, जबकि दूसरे लोगों को AI की मदद से बदली गई तस्वीरें दिखाई गईं।

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