Mahashivratri Shiv Ji Ki Aarti: जय शिव ओंकारा...महाशिवरात्रि शिव जी की आरती यहां देखें

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Feb 25, 2025, 10:47 PM IST

Mahashivratri Shiv Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi (ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा आरती): महाशिवरात्रि का दिन भगवान शिव की अराधना का सबसे बड़ा दिन माना जाता है। इस दिन शिव जी की पूजा करते समय उनकी इस आरती को करना बिल्कुल भी न भूलें।

Mahashivratri Shiv Ji Ki Aarti Lyrics In Hindi, Om Jai Shiv Omkara Aarti: महाशिवरात्रि का पर्व इस साल 18 फरवरी को मनाया जा रहा है। ये पर्व भगवान शिव के भक्तों के लिए बेहद खास होता है। इस दिन शिव मंदिरों में अलग ही रौनक देखने को मिलती है। भक्तजन शिव जी की विधि विधान पूजा करते हैं। इस दिन शिवलिंग की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। महाशिवरात्रि पर शिव पूजा के समय मंत्र, कथा, शिव चालीसा के साथ एक और चीज है जो जरूरी मानी गई है वो है शिव जी की आरती। इस दिन शिव की आरती करना बिल्कुल भी न भूलें।

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शिव जी की आरती: जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा

Mahashivratri Shiv Ji Ki Aarti Lyrics In Hindi Video

शिव जी की आरती (Maha Shivratri Shiv Ji Ki Aarti)

ॐ जय शिव ओंकारा,

स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,

अर्द्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...॥

एकानन चतुरानन

पंचानन राजे ।

हंसासन गरूड़ासन

वृषवाहन साजे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...॥

दो भुज चार चतुर्भुज

दसभुज अति सोहे ।

त्रिगुण रूप निरखते

त्रिभुवन जन मोहे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...॥

अक्षमाला वनमाला,

मुण्डमाला धारी ।

चंदन मृगमद सोहै,

भाले शशिधारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...॥

श्वेताम्बर पीताम्बर

बाघम्बर अंगे ।

सनकादिक गरुणादिक

भूतादिक संगे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...॥

कर के मध्य कमंडल

चक्र त्रिशूलधारी ।

सुखकारी दुखहारी

जगपालन कारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव

जानत अविवेका ।

प्रणवाक्षर में शोभित

ये तीनों एका ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति

जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी

सुख संपति पावे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...॥

लक्ष्मी व सावित्री

पार्वती संगा ।

पार्वती अर्द्धांगी,

शिवलहरी गंगा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...॥

पर्वत सोहैं पार्वती,

शंकर कैलासा ।

भांग धतूर का भोजन,

भस्मी में वासा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...॥

जटा में गंग बहत है,

गल मुण्डन माला ।

शेष नाग लिपटावत,

ओढ़त मृगछाला ॥

जय शिव ओंकारा...॥

काशी में विराजे विश्वनाथ,

नंदी ब्रह्मचारी ।

नित उठ दर्शन पावत,

महिमा अति भारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...॥

ॐ जय शिव ओंकारा,

स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,

अर्द्धांगी धारा ॥

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