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Janmashtami 2026 Vrat Puja Vidhi Live: आज है जन्माष्टमी 2026, जानें कब शुरु होगा जन्माष्टमी का व्रत, पूजा विधि, कान्हा जी के भजन, आरती, श्री कृष्ण चालीसा

Avni BagrolaUpdated Sep 4, 2026, 09:59 IST

Janmashtami Puja Vidhi, Samagri List, Mantra, Vrat Paran Timing Live Updates: जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेने के बाद रात 12 विशेष पूजा की जाती है, लेकिन सुबह भी पूजा का विधान होता। ये पूजा कैसे करें आइए जानते हैं।

Janmashtami 2026 Vrat Puja Vidhi Live: आज है जन्माष्टमी 2026, जानें कब शुरु होगा जन्माष्टमी का व्रत, पूजा विधि, कान्हा जी के भजन, आरती, श्री कृष्ण चालीसा
Janmashtami 2026 Vrat Puja Vidhi Live: आज है जन्माष्टमी 2026, जानें कब शुरु होगा जन्माष्टमी का व्रत, पूजा विधि, कान्हा जी के भजन, आरती, श्री कृष्ण चालीसा

Janmashtami 2026 Vrat Puja Vidhi, Mantra, Aarti, Janmashtami Bhajan, Chalisa Puja Samagri List Live Updates: जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का दिन है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात में हुआ था। मान्यता है कि जब धरती पर अत्याचार बढ़ने लगा और कंस का आतंक लोगों के लिए परेशानी बन गया, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। इसी खुशी में हर साल जन्माष्टमी का त्योहार बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं। रात 12 बजे कृष्ण जन्म के समय मंदिरों और घरों में घंटे-घड़ियाल बजाए जाते हैं और भक्त जन्मोत्सव की खुशी मनाते हैं।

जन्माष्टमी के व्रत और पूजा की तैयारी पहले से शुरू हो जाती है। इस दौरान सात्विक भोजन करने और ब्रह्मचर्य का पालन करने की परंपरा है। जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। इसके बाद हाथ में जल, फल, कुश और गंध लेकर व्रत का संकल्प लें।

सुबह की पूजा के बाद दोपहर में स्नान करके माता देवकी की पूजा करें। स्नान के पानी में काले तिल डालना भी शुभ माना जाता है। इसके बाद घर में एक छोटा सा सूतिकागृह बनाकर वहां बाल गोपाल की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। साथ में माता देवकी और देवी लक्ष्मी को भी स्थान दें।

रात में कृष्ण जन्म से पहले पूजा की तैयारी कर लें। धूप-दीप जलाकर भगवान को फूल, अक्षत, चंदन, रोली, नैवेद्य और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें। कृष्ण जन्म के समय बाल गोपाल को पालना जरूर झुलाएं। उन्हें माखन-मिश्री, धनिया की पंजीरी, फल और मिठाई का भोग लगाया जा सकता है। पूजा में माता देवकी, वसुदेव, बलराम, नंद बाबा, यशोदा मैया और माता लक्ष्मी का स्मरण भी करें।

जन्माष्टमी का व्रत केवल खाना छोड़ने का नाम नहीं है। इस दिन क्रोध, झूठ, अपशब्द और किसी की निंदा से बचना भी जरूरी माना जाता है। दिनभर कान्हा का नाम लें, बच्चों के साथ झांकी सजाएं और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को फल या भोजन दान करें। बड़ी सजावट न हो तो भी कोई बात नहीं। सच्ची श्रद्धा से जलाया गया एक दीपक और माखन-मिश्री का भोग भी कान्हा को प्रिय माना जाता है।

SEPT 04, 2026 09:59 IST

Janmashtami 2026: श्री कृष्ण चालीसा लिरिक्स इन हिंदी

बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम ।

अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम ॥

पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज ।

जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज ॥

जय यदुनंदन जय जगवंदन ।

जय वसुदेव देवकी नन्दन ॥

जय यशुदा सुत नन्द दुलारे ।

जय प्रभु भक्‍तन के दृग तारे ॥

जय नट-नागर, नाग नथैया ।

कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया ॥

पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो ।

आओ दीनन कष्ट निवारो ॥

वंशी मधुर अधर धरि टेरौ ।

होवे पूर्ण विनय यह मेरौ ॥

आओ हरि पुनि माखन चाखो ।

आज लाज भारत की राखो ॥

गोल कपोल, चिबुक अरुणारे ।

मृदु मुस्कान मोहिनी डारे ॥

राजित राजिव नयन विशाला ।

मोर मुकुट वैजन्तीमाला ॥

कुंडल श्रवण, पीत पट आछे ।

कटि किंकिणी काछनी काछे ॥

नील जलज सुन्दर तनु सोहे ।

छबि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे ॥

मस्तक तिलक, अलक घुंघराले ।

आओ कृष्ण बांसुरी वाले ॥

करि पय पान, पूतनहि तार्‍यो ।

अका बका कागासुर मार्‍यो ॥

मधुवन जलत अगिन जब ज्वाला ।

भै शीतल लखतहिं नंदलाला ॥

सुरपति जब ब्रज चढ़्यो रिसाई ।

मूसर धार वारि वर्षाई ॥

लगत लगत व्रज चहन बहायो ।

गोवर्धन नख धारि बचायो ॥

लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई ।

मुख मंह चौदह भुवन दिखाई ॥

दुष्ट कंस अति उधम मचायो ।

कोटि कमल जब फूल मंगायो ॥

नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें ।

चरण चिह्न दै निर्भय कीन्हें ॥

करि गोपिन संग रास विलासा ।

सबकी पूरण करी अभिलाषा ॥

केतिक महा असुर संहार्‍यो ।

कंसहि केस पकिड़ दै मार्‍यो ॥

मात-पिता की बन्दि छुड़ाई ।

उग्रसेन कहँ राज दिलाई ॥

महि से मृतक छहों सुत लायो ।

मातु देवकी शोक मिटायो ॥

भौमासुर मुर दैत्य संहारी ।

लाये षट दश सहसकुमारी ॥

दै भीमहिं तृण चीर सहारा ।

जरासिंधु राक्षस कहँ मारा ॥

असुर बकासुर आदिक मार्‍यो ।

भक्‍तन के तब कष्ट निवार्‍यो ॥

दीन सुदामा के दुःख टार्‍यो ।

तंदुल तीन मूंठ मुख डार्‍यो ॥

प्रेम के साग विदुर घर माँगे ।

दुर्योधन के मेवा त्यागे ॥

लखी प्रेम की महिमा भारी ।

ऐसे श्याम दीन हितकारी ॥

भारत के पारथ रथ हाँके ।

लिये चक्र कर नहिं बल थाके ॥

निज गीता के ज्ञान सुनाए ।

भक्‍तन हृदय सुधा वर्षाए ॥

मीरा थी ऐसी मतवाली ।

विष पी गई बजाकर ताली ॥

राना भेजा साँप पिटारी ।

शालीग्राम बने बनवारी ॥

निज माया तुम विधिहिं दिखायो ।

उर ते संशय सकल मिटायो ॥

तब शत निन्दा करि तत्काला ।

जीवन मुक्‍त भयो शिशुपाला ॥

जबहिं द्रौपदी टेर लगाई ।

दीनानाथ लाज अब जाई ॥

तुरतहि वसन बने नंदलाला ।

बढ़े चीर भै अरि मुंह काला ॥

अस अनाथ के नाथ कन्हैया ।

डूबत भंवर बचावै नैया ॥

`सुन्दरदास' आस उर धारी ।

दया दृष्टि कीजै बनवारी ॥

नाथ सकल मम कुमति निवारो ।

क्षमहु बेगि अपराध हमारो ॥

खोलो पट अब दर्शन दीजै ।

बोलो कृष्ण कन्हैया की जै ॥
SEPT 04, 2026 08:05 IST

जन्माष्टमी के व्रत में क्या खाना चाहिए?

जन्माष्टमी के व्रत में फल, दूध, दही, और सात्विक चीजें खाई जाती हैं
SEPT 04, 2026 07:27 IST

Janmashtami 2026: बद्रीनाथ धाम में ऐसे मनाई जाएगी

श्री बदरीनाथ धाम में श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां हुई पूरी आज बद्रीनाथ धाम में श्री कृष्ण जन्म अष्टमी उत्सव बड़े ही धूम धाम से मनाया जाएगा जाएगा,बीकेटीसी सहित बद्रीनाथ होटल एसोसिएशन द्वारा इस बाबत जबरदस्त तैयारी की जा रही है, बद्रीनाथ होटल एसोसिएशन द्वारा श्री कृष्ण जन्माष्टमी से पूर्व ही श्री बद्रीनाथ मंदिर परिसर को सुन्दर भव्य रौशनी से सजाया गया है,रात्रि में पूरा मंदिर सिंह द्वार सतरंगी लाइटों से जगमगाता नजर आ रहा है, होटल एसोसिएशन बद्रीनाथ के राम नारायण भंडारी ने बताया कि यात्री मंदिर की जगमगाती इस अलौकिक शोभा देख मन्त्रमुग्ध हैं श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर होटल एसोसिएशन सोशिएशन द्वारा बदरी पुरी आने वाले तीर्थ यात्रियों सहित तमाम श्रृद्धालुओं को विशाल भंडारे का आयोजन किया जायेगा
SEPT 04, 2026 07:07 IST

Janmashtami 2026 Puja Samagri : जन्माष्टमी व्रत की पूजा सामग्री

बाल गोपाल की मूर्ति या तस्वीर
पंचामृत के लिए दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल
नए पीले वस्त्र और आभूषण
मोर पंख और बांसुरी
चंदन, रोली, अक्षत और कुमकुम
फूल और फूलों की माला
तुलसी दल
धूप, दीप और कपूर
मक्खन-मिश्री और माखन
फल और सूखे मेवे
मखाने, नारियल और पंजीरी
पूजा की थाली और घंटी
झूला और सजावट की सामग्री
व्रत के लिए साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, सेंधा नमक और फल
SEPT 04, 2026 06:40 IST

श्री कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है?

श्री कृष्ण जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है।
SEPT 04, 2026 06:09 IST

जन्माष्टमी के भजन - नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की लिरिक्स

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥



आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥



कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥



पूनम के चाँद जैसी शोभी है बाल की।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥



भक्तो के आनंद्कनद जय यशोदा लाल की।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

जय हो यशोदा लाल की, जय हो गोपाल की।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥



आनद से बोलो सब जय हो बृज लाल की।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

जय हो बृज लाल की,पावन प्रतिपाल की।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥


आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की
SEPT 04, 2026 05:45 IST

Janmashtami 2026 Puja Kaise kre: जन्माष्टमी पूजा कैसे करें?

जन्माष्टमी पर घर की सफाई कर पूजा स्थान सजाएं। भगवान कृष्ण की मूर्ति को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाएं। रात में बाल गोपाल की पूजा करें, पंचामृत से अभिषेक करें, माखन-मिश्री का भोग लगाएं और आरती करके प्रसाद बांटें।
SEPT 04, 2026 05:21 IST

Janmashtami vrat start time: जन्माष्टमी का व्रत कब शुरु होगा

साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत 4 सितंबर (शुक्रवार) को रखा जा रहा है। 4 सितंबर 2026 को रात 02:25 बजे से अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी और ब्रह्म मुहूर्त से जन्माष्टमी का व्रत शुरु होगा।
SEPT 03, 2026 20:33 IST

जन्माष्टमी व्रत में क्या खाएं?



अगर आप फलाहार वाला व्रत रख रहे हैं तो फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना और कुट्टू जैसे व्रत वाले खाद्य पदार्थ ले सकते हैं। सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं अनाज, सामान्य नमक और कई घरों में वर्जित मानी जाने वाली चीजों से परहेज किया जाता है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत का पालन करें।
SEPT 03, 2026 20:06 IST

जन्माष्टमी पर ऐसे रखें व्रत



सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई करके भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें और व्रत रखने का संकल्प लें। अपनी सुविधा और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या अन्य सात्विक व्रत रख सकते हैं।
SEPT 03, 2026 19:34 IST

कृष्ण का स्मरण



व्रत के दौरान भगवान कृष्ण के मंत्रों का जाप करें। घर में कृष्ण भजन चलाएं और श्रीमद्भगवद्गीता या कृष्ण की कथा का पाठ कर सकते हैं। इस दिन मन को शांत रखने और अच्छे विचारों के साथ समय बिताने की कोशिश करें।
SEPT 03, 2026 18:45 IST

व्रत का पारण



पूजा और आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोला जा सकता है। हालांकि पारण का सही समय स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार देखना बेहतर होता है। श्रद्धा के साथ भगवान कृष्ण का स्मरण करते हुए व्रत पूरा करें।
SEPT 03, 2026 18:34 IST

जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को क्या भोग लगाएं



भगवान कृष्ण को माखन और मिश्री बेहद प्रिय माने जाते हैं। इसलिए जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री का भोग जरूर लगाया जाता है। इसके अलावा फल, मिठाई, दूध से बनी चीजें, पंजीरी और धनिया की पंजीरी भी भोग में रखी जा सकती है। भोग में तुलसी दल रखना भी शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि तुलसी के पत्ते साफ हों और उन्हें श्रद्धा के साथ भगवान को अर्पित करें।
SEPT 03, 2026 18:07 IST

सुबह से रात तक ऐसे करें पूजा की तैयारी



सुबह घर और पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद बाल गोपाल को स्नान कराकर साफ कपड़े पहनाएं। पूजा स्थल को फूलों से सजाएं और वहां भगवान कृष्ण का झूला रख सकते हैं। दिनभर भजन, मंत्र जाप और श्रीकृष्ण की कथाओं का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
SEPT 03, 2026 18:07 IST

जन्माष्टमी व्रत के लिए पूजा सामग्री



पूजा के लिए बाल गोपाल की मूर्ति, पंचामृत, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, मिश्री, तुलसी दल, रोली, अक्षत, चंदन, फूल, धूप, दीपक और माखन-मिश्री जैसी चीजें रख सकते हैं। भगवान के लिए नए वस्त्र और आभूषण भी रखे जा सकते हैं। पूजा की थाली में फल और सात्विक प्रसाद जरूर रखें।
SEPT 03, 2026 18:07 IST

जन्माष्टमी 2026 पर कब रखें व्रत?



जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और भगवान कृष्ण का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला, फलाहार या सात्विक व्रत रखा जा सकता है। अगर स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी है तो व्रत रखने से पहले सावधानी जरूर बरतें। व्रत के दौरान मन को शांत रखें और भगवान कृष्ण के नाम का जाप करें।