ज्योतिर्लिंगों में देवघर की है खास महिमा, धूमधाम से निकलती है शिव जी की बारात, बाबा को चढ़ता है मोर मुकुट

महाशिवरात्रि विशेष: शिव जी के भक्‍तों में बाबा बैद्यनाथ धाम की खास महिमा है जो झारखंड के देवघर में विराजे हैं। देवघर शिव और शक्ति दोनों का स्थान है। मान्‍यता है कि यहां सती जी का हृदय गिरा था। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां शहर भर में बारात निकलती है। बाबा का श्रृंगार नहीं होता लेकिन उनको मोर मुकुट चढ़ाया जाता है। पढ़ें देवघर के ज्योतिर्लिंग के बारे में।

महाशिवरात्रि विशेष: देघरे बिराजे गौरा साथ, बाबा भोलानाथ - पूजनीय भवप्रीतानंद रचित इस झूमर में बाबा बैद्यनाथ की महिमा का बखान है। झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम जिसे कामनालिंग और हृदयापीठ भी कहा जाता है। यह एक जागृत स्थल है। बाबा बैद्यनाथ की महिमा अपने आप में अनोखी है, बाबा भोले की भक्ति के रूप अलग-अलग हैं, सबका आशीर्वाद 'तथास्तु' के रूप में पूर्ण होता है। बाबा बैद्यनाथ से आप कुछ भी मांग लीजिए, बाबा उसे पूरा करते हैं। कहते हैं - कर्ता करे न कर सके, शिव करे सो होय, तीन लोक नौ खंड में, शिव से बड़ा न कोय। यह देवघर स्थित कामनालिंग के भक्तों से बढ़कर कोई नहीं जानता है।

baba baidyanath dham in deoghar

बाबा बैद्यनाथ धाम

देवघर में महाशिवरात्रि पर धार्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत कई भव्य आयोजन होते हैं, जिसके केंद्र-बिंदु शिव होते हैं, जो साकार भी हैं और निराकार भी। महाशिवरात्रि पर भगवान भोले की चतुष्प्रहर पूजा होती है, यह अपने आप में अनूठी परंपरा है, जो अन्यत्र नहीं होती है। देवघर शिव और शक्ति दोनों का स्थान है, यहां माता सती का हृदय गिरा था और उसके ऊपर बाबा शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। इसी कारण इसे आत्मालिंग और कामनालिंग भी कहा जाता है। बाबा बैद्यनाथ धाम का उल्लेख करते हुए द्वादश ज्योतिर्लिंग स्रोतम में लिखा गया है - पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसंतं गिरिजासमेतम्। सुरासुराराधितपादपद्यं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि।

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