Heramba Sankashti Chaturthi 2026: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को हेरंब संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। आज, 31 अगस्त 2026 को यह व्रत रखा जा रहा है। यह दिन भगवान गणेश के हेरंब स्वरूप की पूजा के लिए समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि हेरंब गणपति अपने भक्तों के भय, संकट और जीवन की रुकावटों को दूर करते हैं। इसलिए इस व्रत को केवल मनोकामना पूर्ति नहीं, बल्कि मन को मजबूत बनाने और कठिन समय में सही दिशा पाने की प्रार्थना से भी जोड़ा जाता है।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत कैसे करें, जानें संपूर्ण विधि
संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा का विशेष महत्व होता है। दिनभर उपवास करने के बाद शाम को गणेश पूजा की जाती है। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी 2026 का समय
| जरूरी जानकारी | समय |
|---|---|
| हेरंब संकष्टी चतुर्थी | 31 अगस्त 2026, सोमवार |
| चतुर्थी तिथि प्रारंभ | 31 अगस्त को सुबह लगभग 8:50 बजे |
| चतुर्थी तिथि समाप्त | 1 सितंबर को सुबह लगभग 7:41 बजे |
| दिल्ली में चंद्रोदय | रात लगभग 9:16 बजे |
चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग हो सकता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले अपने शहर का स्थानीय चंद्रोदय समय अवश्य देख लें। संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बाद ही पूरा माना जाता है। दृक पंचांग
कौन हैं हेरंब गणपति
हेरंब भगवान गणेश का एक विशेष और रक्षक स्वरूप है। इस स्वरूप में गणेश जी के पांच मुख बताए गए हैं और उनका वाहन सिंह माना जाता है। ‘हेरंब’ नाम का अर्थ कमजोर और असहाय लोगों की रक्षा करने वाला भी बताया जाता है।
इसी कारण जीवन में भय, असुरक्षा, काम में बार-बार आने वाली बाधा या परिवार से जुड़ी चिंता को दूर करने के लिए हेरंब गणपति की आराधना की जाती है। पूजा का उद्देश्य किसी चमत्कार की प्रतीक्षा करना नहीं, बल्कि अपनी उलझनों के बीच धैर्य और विवेक बनाए रखने का संकल्प लेना भी है।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत कैसे करें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर के पूजा स्थान को साफ करके भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प करें।
पूजा में बहुत अधिक सामग्री जुटाना जरूरी नहीं है। श्रद्धा के साथ उपलब्ध चीजों से भी पूजा की जा सकती है। पूजा के लिए ये सामग्री रख सकते हैं:
- भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर
- लाल या पीले फूल
- दूर्वा
- रोली, अक्षत और मौली
- धूप और दीपक
- गुड़, मोदक या लड्डू
- फल और पानी
- चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए पात्र
भगवान गणेश को रोली और अक्षत लगाएं। दूर्वा अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं। इसके बाद मोदक, लड्डू, गुड़ या घर में बने सात्विक प्रसाद का भोग लगाएं। पूजा के दौरान ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का 108 बार या अपनी सुविधा के अनुसार जाप किया जा सकता है।
शाम को दोबारा गणेश जी की पूजा करें। संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा पढ़ें या सुनें। चंद्रमा निकलने पर जल में थोड़ा दूध, अक्षत और फूल डालकर अर्घ्य दें। इसके बाद गणेश जी को प्रणाम करके प्रसाद ग्रहण करें और व्रत खोलें।
संकष्टी चतुर्थी व्रत में क्या खा सकते हैं
यह व्रत कई लोग निर्जल रखते हैं, जबकि कुछ भक्त फलाहार करते हैं। उपवास का तरीका अपनी सेहत और परिवार की परंपरा के अनुसार चुना जा सकता है। फलाहार में फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े या कुट्टू के आटे से बनी चीजें खाई जा सकती हैं। सेंधा नमक का प्रयोग करें। सामान्य नमक, गेहूं, चावल, दाल और तामसिक भोजन से बचें।
अगर किसी को डायबिटीज, लो ब्लड प्रेशर, गर्भावस्था या कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो निर्जल व्रत न रखें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेकर फलाहार या सामान्य सात्विक भोजन के साथ पूजा की जा सकती है।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत के नियम
- व्रत के दिन मांसाहार, शराब, प्याज और लहसुन से बचें।
- किसी का अपमान करने या कटु शब्द बोलने से बचें।
- भोजन और पानी को लेकर अपनी क्षमता से अधिक कठिन नियम न बनाएं।
- गणेश जी को तुलसी के पत्ते अर्पित न करें।
- पूजा में दूर्वा और लाल फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है।
- व्रत खोलने से पहले चंद्रमा को अर्घ्य दें।
- चंद्रमा दिखाई न दे तो स्थानीय चंद्रोदय समय के बाद अर्घ्य देकर पूजा पूरी की जा सकती है।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी पर क्या प्रार्थना करें
इस दिन भगवान गणेश से केवल धन या सफलता की कामना करने के बजाय अपने भय, भ्रम और गलत आदतों को दूर करने की प्रार्थना करें। परिवार में कोई कठिन दौर चल रहा हो तो उसके समाधान और सबके धैर्य के लिए प्रार्थना की जा सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर तैयार किया गया है। पूजा-विधि और व्रत के नियम अलग-अलग क्षेत्रों तथा पारिवारिक परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं।
