Ashadha Gupt Navratri 2026 Start Today: आज 15 जुलाई 2026, वार बुधवार से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो गई है, जिसका समापन 9 दिन बाद होगा। नवरात्रि में अधिकतर लोग मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा करते हैं, ऐसे में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि को लेकर भी लोगों के मन में कन्फ्यूजन रहता है कि इसमें किसकी पूजा करनी चाहिए। दरअसल, कुछ लोग इसमें 10 महाविद्याओं की भी उपासना करते हैं। चलिए आपकी कन्फ्यूजन दूर करें और जानें कि आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में किसकी पूजा की जाती है। साथ ही आपको आज आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पहले दिन की पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में पता चलेगा।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 आज से शुरू
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की तिथि
द्रिक पंचांग के अनुसार, कल 14 जुलाई 2026 की दोपहर 3 बजकर 12 मिनट से आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ हो गया है, जिसका समापन आज 15 जुलाई 2026 की सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर होगा। ऐसे में आज 15 जुलाई 2026 से ही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हुई है, जबकि इसका समापन 23 जुलाई 2026, वार गुरुवार को होगा।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में किसकी पूजा होती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की विशेष रूप से पूजा की जाती है। खासकर, तांत्रिक लोग 10 महाविद्याओं की गुप्त रूप से पूजा करते हैं। हालांकि, सामान्य गृहस्थ लोग भी 10 महाविद्याओं की पूजा कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें कुछ विशेष बातों पर ध्यान देना होता है। दरअसल, 10 महाविद्याओं की पूजा बिना किसी सिद्ध गुरु के मार्गदर्शन के नहीं करनी चाहिए, अन्यथा दुष्परिणाम का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से गृहस्थ लोग आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में भी मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा कर लेते हैं।
10 महाविद्याओं के नाम
10 महाविद्याओं को तंत्र शास्त्र की अधिष्ठात्री माना जाता है, जो मां दुर्गा के 10 सबसे शक्तिशाली और तांत्रिक रूप हैं। दस महाविद्याओं में सबसे पहले मां काली आती हैं, जिनके बाद देवी तारा, देवी त्रिपुर सुंदरी, देवी भुवनेश्वरी, देवी भैरवी, देवी छिन्नमस्ता, देवी धूमावती, देवी बगलामुखी, देवी मातंगी और देवी कमल हैं। बता दें कि इन सभी देवियों को शक्ति के साथ-साथ ज्ञान और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का भी प्रतीक माना जाता है।
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गृहस्थ लोग दस महाविद्याओं में से किसी पूजा कर सकते हैं?
पौराणिक शास्त्रों में बताया गया है कि गृहस्थ लोगों के लिए मां भुवनेश्वरी के अलावा मां मातंगी और मां कमला की पूजा करना शुभ माना जाता है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की घटस्थापना का मुहूर्त
आज से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हुई है, ऐसे में आज ही घटस्थापना करना शुभ रहेगा। आज 15 जुलाई को सुबह 5 बजकर 33 मिनट से सुबह 10 बजकर 9 मिनट के बीच आप घटस्थापना कर सकते हैं।
आज के शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय- सुबह 05:33 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:12 से सुबह 04:52 मिनट पर
- अभिजित मुहूर्त- नहीं है
- सायाह्न सन्ध्या- शाम 07:21 से रात 08:22 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त- सुबह 12:07 से सुबह 12:48 मिनट तक (16 जुलाई 2026)
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में घटस्थापना कैसे करें?
यदि आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में आप तंत्र साधना नहीं कर रहे हैं तो सामान्य लोगों की तरह शुभ मुहूर्त में अपने घर में घटस्थापना कर सकते हैं। इसके लिए प्रातः काल स्नान आदि कार्य करने के बाद घर के मंदिर की उत्तर-पूर्व दिशा में एक लकड़ी की चौकी रखें। चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। अब मिट्टी का एक पात्र लें, जिसमें मिट्टी डालकर जौ बोएं। इसके बाद एक तांबे या मिट्टी का कलश लें, जिसमें गंगाजल के साथ एक सिक्का, अक्षत और सुपारी डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते रखने के बाद नारियल लें और उस पर कलावा बांधकर स्थापित कर दें। अंत में हाथ में जल लेकर मां दुर्गा का स्मरण करें और पूजा-व्रत का संकल्प लें। घी का दीपक जलाने के बाद आप पूजा आरंभ कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।
