Aniruddha Chaturthi vrat katha: आषाढ़ शुक्ल अनिरुद्ध चतुर्थी व्रत कथा - क्यों करते हैं संन्यासियों को तुम्बी का दान

Aniruddha Chaturthi vrat katha (आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी की कहानी): अनिरुद्ध चतुर्थी व्रत की कहानी क्या है। क्यों आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी पर किया जाता है संन्यासियों को तुम्बी का दान। जानें आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी की पौराणिक कथा, पूजा विधि और दान का धार्मिक महत्व।

Aniruddha Chaturthi vrat katha (आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी की कहानी): 17 जुलाई 2026, शुक्रवार को आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी के दिन अनिरुद्ध चतुर्थी व्रत रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक गणेश पूजा करने, व्रत रखने और संन्यासियों को तुम्बी (सूखी लौकी से बना जलपात्र) दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

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अनिरुद्ध चतुर्थी पर कौन सी कथा पढ़ें

अनिरुद्ध चतुर्थी व्रत की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अनिरुद्ध चतुर्थी व्रत को भगवान गणेश के अत्यंत प्रभावशाली व्रतों में माना गया है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में भद्रसेन नाम के एक न्यायप्रिय और पराक्रमी राजा थे। उनका राज्य सुख-समृद्धि से भरा हुआ था। लेकिन एक समय ऐसा आया जब उनके राज्य पर एक के बाद एक संकट टूट पड़े। खेतों में कीट-पतंगों का प्रकोप बढ़ गया, फसलें बर्बाद होने लगीं और अनेक लोग बीमार पड़ने लगे। देखते ही देखते पूरे राज्य में चिंता और भय का माहौल बन गया।

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