Rajmata Vijayraj Kumari Passes Away: उदयपुर के पूर्व मेवाड़ राजपरिवार की राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का 83 वर्ष की आयु में सोमवार (14 सितंबर 2026) देर रात लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन से पूरे मेवाड़ और राजस्थान अंचल में शोक की लहर दौड़ गई है। मंगलवार सुबह शहर के ऐतिहासिक शंभू निवास पैलेस से उनकी अंतिम यात्रा निकली और आयड़ स्थित शाही श्मशान स्थल 'महासतियाजी' में पारंपरिक राजकीय सम्मान (गार्ड ऑफ ऑनर) और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
कौन थीं राजमाता विजयराज कुमारी?
कच्छ राजपरिवार में जन्म और मेवाड़ की बहू
राजमाता विजयराज कुमारी का जन्म गुजरात के कच्छ के पूर्व राजपरिवार में हुआ था। वे कच्छ के महाराज फतेह सिंहजी की छोटी बेटी और महाराव की पौत्री थीं। 1972 में उनका विवाह मेवाड़ राजपरिवार के स्वर्गीय अरविंद सिंह मेवाड़ से हुआ था। (मार्च 2025 में उनके पति का निधन हुआ था)। वे प्रसिद्ध समाजसेवी व शिक्षाविद् डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की माताजी थीं।
शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान
उनकी शुरुआती पढ़ाई तमिलनाडु के ऊटी स्थित फ्रांसिस्कन कॉन्वेंट स्कूल में हुई थी। 1980 के दशक में उन्होंने उदयपुर के प्रतिष्ठित महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल के पुनर्गठन और विकास में मुख्य भूमिका निभाई। वे स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की अध्यक्ष भी रहीं और इसे एक आधुनिक व अनुशासित संस्थान बनाने में अहम योगदान दिया।
समाज सेवा, आध्यात्म और हेरिटेज संरक्षण
वे श्री एकलिंगजी ट्रस्ट और महाराणा ऑफ मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन से जुड़ी रहीं और मेवाड़ के प्राचीन मंदिरों व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए काम किया। वे 'बिहार स्कूल ऑफ योग' से भी जुड़ी हुई थीं और अध्यात्म तथा भारतीय संस्कारों के प्रति उनकी गहरी निष्ठा थी।
शिक्षा से रहा गहरा जुड़ाव
शिक्षा राजमाता विजयराज कुमारी के सार्वजनिक जीवन का एक प्रमुख हिस्सा रही। 1980 के दशक के दौरान वे महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल के विकास से गहराई से जुड़ी रहीं। HRH ग्रुप के आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने वर्षों तक स्कूल के दृष्टिकोण को पेशेवर बनाने और उदयपुर के लोगों के प्रति इसकी शैक्षिक प्रतिबद्धता को मजबूत करने में मदद की।
स्कूल के साथ उनका यह जुड़ाव वर्षों तक कायम रहा। महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल के रिकॉर्ड उन्हें स्कूल प्रबंधन समिति की अध्यक्ष के रूप में दर्ज करते हैं। वे वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोहों सहित स्कूल के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में लगातार शामिल होती रहीं। उनके लिए शिक्षा का सीधा संबंध इस बात से था कि युवा अपने अवसरों का उपयोग कैसे करते हैं। उनका यह विश्वास परोपकार और समाज कल्याण में उनकी रुचि से भी स्वाभाविक रूप से मेल खाता था।
सेवा और अध्यात्म में रचा-बसा जीवन
राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ के प्राचीन मंदिरों के रखरखाव और संरक्षण से जुड़े धर्मार्थ ट्रस्टों, जैसे 'श्री एकलिंगजी ट्रस्ट' और 'महाराणा ऑफ मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन' से जुड़ी हुई थीं। उन्होंने इन संस्थानों से जुड़ी विकास गतिविधियों का भी समर्थन किया। अध्यात्म उनके जीवन का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा था। उनके आधिकारिक प्रोफाइल में 'बिहार स्कूल ऑफ योग' से उनके जुड़ाव और इसकी शिक्षाओं के समर्थन का जिक्र है।
उनके सार्वजनिक जीवन का एक पेशेवर पहलू भी था। HRH ग्रुप प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने 'हिस्टोरिक रिसॉर्ट्स होटल्स प्राइवेट लिमिटेड' (HRH Group) की जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर (JMD) के रूप में भी सेवाएं दीं। इसलिए जहां राजमाता का पद उन्हें स्वाभाविक रूप से मेवाड़ के शाही इतिहास में रखता था, वहीं उनका काम शिक्षा, धर्मार्थ गतिविधियों और परिवार की विरासत से जुड़े संस्थानों तक फैला हुआ था।
शोक सभा का आयोजन
राजपरिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, दिवंगत राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ की शोक सभा (तीये की बैठक) 16 सितंबर से 23 सितंबर 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 2:00 बजे से 3:00 बजे तक उदयपुर स्थित 'शंभू निवास पैलेस' (सिटी पैलेस परिसर) में आयोजित की जाएगी।
