TIMES Network National Defence Conclave 2026: बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) सैयद अता हसनैन ने टाइम्स नेटवर्क नेशनल डिफेंस कॉन्क्लेव 2026 में चीन की रणनीति, पाकिस्तान के साथ उसके सैन्य सहयोग, अमेरिकी की बदलती वैश्विक प्राथमिकताओं और कश्मीर समेत कई अहम राष्ट्रीय एवं भू-राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बात की।
बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) सैयद अता हसनैन
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में भारत को अपनी सैन्य क्षमता, कूटनीतिक संतुलन और तकनीकी तैयारियों को मजबूत बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने चीन की सीमा नीति, पाकिस्तान के साथ उसकी बढ़ती नजदीकी, आधुनिक युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका और अफगानिस्तान के जरिए मध्य एशिया तक भारत की पहुंच जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की।
राजभवन और सेना में जिम्मेदारी का सिद्धांत एक जैसा
लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन ने संवैधानिक पदों और सैन्य नेतृत्व के बीच जिम्मेदारी के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ही क्षेत्रों में नेतृत्व का मूल आधार जिम्मेदारी और स्वामित्व की भावना है। बकौल राज्यपाल हसनैन, किसी पद पर रहते हुए व्यक्ति को अपनी अंतिम ऊर्जा तक अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए और फैसलों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
क्या है चीन की रणनीति
चीन की विदेश और सीमा नीति पर चर्चा करते हुए राज्यपाल हसनैन ने कहा कि भारत के प्रति बीजिंग का रुख उसकी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि चीन की 14 देशों के साथ सीमा लगती है और अधिकांश सीमा विवादों का समाधान कर चुका है, जबकि भारत और भूटान के साथ सीमा विवाद अभी भी बना हुआ है। वहीं, लद्दाख पर चीन के दावों पर उन्होंने कहा कि इसमें कोई हैरानी नहीं है।
बकौल राज्यपाल हसनैन, चीन लंबे समय से भारत के साथ संबंधों में कभी तनाव बढ़ाने और कभी नरमी दिखाने की नीति अपनाता रहा है। इसका मकसद भारत को असमंजस में रखना है।
उन्होंने 1962 के युद्ध, 1967 में नाथू ला की झड़पों, 1975 की घटना, 1986 के सुमदोरोंग चू गतिरोध और बाद के सीमा विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि चीन की बॉर्डर पॉलिसी को लंबे ऐतिहासिक संदर्भ में समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चीन चाहता है कि भारत अपनी पूरी ऊर्जा और संसाधन भूमि सीमाओं पर लगाए रखे ताकि वह अपनी ब्लू-वॉटर नेवी का विस्तार न कर सके।
गलवान घाटी झड़प
2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प को लेकर राज्यपाल हसनैन ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की तेज प्रगति को रोकने और भारत को एक 'झटका' देने के इरादे से चीन ने 2020 में गलवान/सीमा पर यह कार्रवाई की थी। बकौल राज्यपाल, चीन का मकसद भारत को रणनीतिक झटका देना और उसकी गति को प्रभावित करना था।
उन्होंने चीन की 'थ्री वॉरफेयर' रणनीति का भी उल्लेख किया। इस अवधारणा में तीन अहम पहलू शामिल हैं- मनोवैज्ञानिक युद्ध, मीडिया के जरिए प्रभाव और कानूनी युद्ध। इसके तहत साइबर क्षमताओं और सूचना के इस्तेमाल से भी विरोधी देश पर दबाव बनाने की कोशिश की जा सकती है।
चीन-पाकिस्तान सैन्य सहयोग पर क्या बोले राज्यपाल
राज्यपाल हसनैन ने चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य एवं रणनीतिक सहयोग को भारत की सुरक्षा के लिहाज से अहम बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को चीन द्वारा रीयल-टाइम इंटेलिजेंस देने, J-10 विमानों की सर्विसिंग करने तथा गिलगित-बालटिस्तान व चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC)में उपस्थिति की भारत को पूरी जानकारी है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका, फ्रांस और इजरायल जैसे देशों के साथ अपने संबंधों और तकनीकी स्रोतों को विविध बनाकर इसका सामना कर रहा है।
अमेरिका की बदलती प्राथमिकताएं
राज्यपाल हसनैन ने अमेरिका की बदलती प्राथमिकताओं पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि 1991 के बाद से रणनीतिक परिस्थितियों में बदलाव एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समय यूक्रेन, गाजा, फारस की खाड़ी और लाल सागर में हूती समूहों से जुड़े संकटों पर ध्यान दे रहा है। इस वजह से इंडो-पैसिफिक पर उसका ध्यान थोड़ा कम हुआ है।
उन्होंने भारत की कूटनीतिक परिपक्वता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक कूटनीतिक रूप से परिपक्व राष्ट्र है, जो अमेरिका या उसके नेतृत्व के बयानों और अनिश्चितता के बावजूद अपने रणनीतिक हितों को कुशलता से संतुलित रख रहा है।
