World Menopause Day: मेनोपॉज में रात को पैरों में क्यों होने लगता है दर्द? जानें इसके कारण और राहत के उपाय

World Menopause Day: मेनोपॉज और पेरीमेनोपॉज के दौरान रात में पैरों में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और नींद न आने की समस्या बढ़ सकती है। जानें इसके कारण, तनाव और जीवनशैली का असर तथा राहत पाने के 3 आसान उपाय।

World Menopause Day: मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति महिलाओं के जीवन का एक स्वाभाविक पड़ाव है, लेकिन इस दौरान शरीर में होने वाले बदलाव कई बार रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगते हैं। किसी को अचानक गर्मी लगने और पसीना आने की परेशानी होती है, तो किसी की नींद बार-बार टूटने लगती है। वहीं, कुछ महिलाओं को रात में पैरों में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव या भारीपन महसूस होता है। यह परेशानी न केवल आराम में बाधा डालती है, बल्कि अगले दिन थकान, कमजोरी और चिड़चिड़ापन भी बढ़ा सकती है। World Menopause Day के मौके पर समझें कि, मेनोपॉज के दौरान रात में पैरों में दर्द क्यों हो सकता है और इससे राहत पाने के लिए अपनी दिनचर्या में कौन-से बदलाव किए जा सकते हैं।

World Menopause Day 2026

मेनोपॉज के लक्षण और राहत के उपाय (Photo - AI)

मेनोपॉज में रात को पैरों में दर्द क्यों होता है?

मेनोपॉज से पहले के चरण यानी पेरीमेनोपॉज और मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बदलता है। इसका असर नींद, शरीर के तापमान, मूड और मांसपेशियों-जोड़ों से जुड़ी समस्याओं पर पड़ सकता है। कुछ महिलाओं को इस दौरान मांसपेशियों में दर्द, अकड़न या पैरों में असहजता महसूस होती है। हालांकि, हर महिला में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते और पैरों के दर्द की वजह केवल हार्मोनल बदलाव नहीं होते हैं।

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