Air Pollution Health Effects: अक्टूबर का महीना आते ही मौसम में बदलाव महसूस होने लगता है। सुबह-शाम हल्की ठंडक के साथ कई शहरों में हवा की गुणवत्ता भी प्रभावित होने लगती है। खासकर दिल्ली-NCR जैसे इलाकों में वायु प्रदूषण बढ़ने पर सेहत का ख्याल रखना और भी जरूरी हो जाता है। परेशानी की बात यह है कि कई लोग प्रदूषण के शुरुआती संकेतों को सामान्य सर्दी, थकान या मौसमी एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में जरूरी है कि AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स पर नजर रखने के साथ-साथ शरीर में होने वाले बदलावों को भी समझें। आइए जानते हैं प्रदूषण के शुरुआती दिनों में किन 5 हेल्थ संकेतों (Air Pollution Health Effects) पर ध्यान देना चाहिए और खुद को फिट रखने के लिए क्या कर सकते हैं।
प्रदूषण का शरीर पर असर (Photo - Pinterest)
1. गले में खराश और खांसी
अगर मौसम बदलने के साथ गले में खराश, सूखापन या लगातार खांसी की परेशानी होने लगे, तो इसकी एक संभावित वजह प्रदूषित हवा भी हो सकती है। हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बारीक कण श्वसन तंत्र को परेशान कर सकते हैं। खासकर अस्थमा या एलर्जी से जूझ रहे लोगों में लक्षण बढ़ सकते हैं। हालांकि, खांसी के पीछे संक्रमण समेत कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। इसलिए परेशानी लंबे समय तक बनी रहे या बढ़ने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लें।
2. आंखों में जलन और पानी आना
प्रदूषण के शुरुआती दिनों में आंखों में खुजली, लालिमा, जलन या पानी आने की शिकायत हो सकती है। हवा में मौजूद प्रदूषक आंखों की संवेदनशील सतह को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में आंखों को बार-बार रगड़ने से बचें। बाहर से आने के बाद चेहरे और आंखों के आसपास की त्वचा को साफ करें। तेज दर्द, नजर धुंधली होने या लगातार परेशानी रहने पर नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।
3. सांस फूलना
अगर सामान्य गतिविधियां करते समय भी सांस फूलने लगे, सीने में जकड़न महसूस हो या घरघराहट होने लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें। प्रदूषण सांस संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है, खासकर अस्थमा और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों में। ऐसी परेशानी नई हो या सामान्य से अधिक हो, तो चिकित्सकीय जांच कराएं। गंभीर सांस की तकलीफ या सीने में दर्द होने पर तुरंत आपातकालीन मदद लें।
4. सिरदर्द और थकान
प्रदूषण के दिनों में कुछ लोगों को सिरदर्द, सुस्ती या असहजता महसूस हो सकती है। हालांकि, इन लक्षणों को केवल खराब हवा से जोड़ना सही नहीं है। कम नींद, पानी की कमी, तनाव और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं। अगर सिरदर्द बार-बार हो रहा है, असामान्य रूप से तेज है या इसके साथ दूसरे लक्षण हैं, तो डॉक्टर की सलाह लें।
5. एलर्जी और अस्थमा के लक्षण बढ़ना
यदि आपको पहले से एलर्जी या अस्थमा है, तो प्रदूषण बढ़ने पर छींक, नाक बहना, खांसी या घरघराहट बढ़ सकती है। अपने लक्षणों पर नजर रखें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार निर्धारित दवाएं व इनहेलर इस्तेमाल करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं की खुराक न बदलें।
प्रदूषण में फिट रहने के 5 तरीके
- बाहर निकलने और एक्सरसाइज की योजना बनाने से पहले AQI चेक करें।
- हवा खराब होने पर तेज आउटडोर एक्सरसाइज के बजाय घर के अंदर हल्की कसरत करें।
- प्रदूषण के संपर्क से बचाव के लिए अच्छी फिटिंग वाला N95 या समकक्ष रेस्पिरेटर मददगार हो सकता है।
- धुआं पैदा करने वाली गतिविधियां कम करें, किचन में एग्जॉस्ट का इस्तेमाल करें और एयर प्यूरीफायर का भी इस्तेमाल करें।
- पर्याप्त नींद लें, पानी पिएं और फल-सब्जियों सहित बैलेंस डाइट अपनाएं।
डिस्क्लेमर- बढ़ते प्रदूषण के बीच लगातार खांसी, बढ़ती घरघराहट या सांस लेने में परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। बदलते वातावरण के अनुसार अपनी दिनचर्या में समझदारी से बदलाव करें। बढ़ते AQI के दौरान हवा की गुणवत्ता पर नजर रखें।
