Manipur Relief Camp Deaths: मणिपुर हिंसा के बाद राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की अप्राकृतिक मौतों की खबरों पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने मणिपुर के मुख्य सचिव को राहत शिविरों में हुई 25 अप्राकृतिक मौतों की विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस मोहना की पीठ ने कहा कि सरकार बताए कि इन मौतों की परिस्थितियां क्या थीं और मौत के कारणों का पता लगाने के लिए क्या कदम उठाए गए। कोर्ट ने सभी 25 मामलों से जुड़े पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज भी मांगे हैं। राज्य सरकार को यह भी बताना होगा कि राहत शिविरों में रह रहे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
640 मौतों की रिपोर्ट पर भी कोर्ट की नजर
640 मौतों की रिपोर्ट पर भी कोर्ट की नजर
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया। रिपोर्ट में मणिपुर के आठ जिलों के राहत शिविरों में 640 मौतों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराया गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि बाकी मामलों में पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया। कोर्ट ने राहत शिविरों में मौत के मामलों में सिर्फ 20 से 30 हजार रुपये मुआवजा दिए जाने की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाया। राज्य सरकार को इस बारे में भी स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
हर अप्राकृतिक मौत में FIR और जांच का निर्देश
कोर्ट ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को इन मामलों पर तुरंत काम करने का निर्देश दिया है। प्राधिकरण को सुनिश्चित करना होगा कि सभी अप्राकृतिक मौतों के मामलों में FIR दर्ज हो। इसके साथ ही मौत के कारणों का पर्याप्त तरीके से पता लगाया जाए। पहले से दर्ज FIR की जांच तेजी से पूरी की जाए और राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों तथा पीड़ितों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने मणिपुर के महाधिवक्ता से भी पूछा कि समिति ने 4 जुलाई को 25 अप्राकृतिक मौतों को लेकर जो जानकारी मांगी थी, उस पर अब तक क्या कार्रवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मुख्य सचिव से कहिए कि अदालत को आदेश देने की स्थिति में न आने दें। हमें बताइए कि आपने क्या कदम उठाए हैं।
302 मामलों में चार्जशीट हो चुकी है दाखिल
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जांच की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आठ जिलों में 3,020 मामलों की जांच के लिए 42 विशेष जांच दल बनाए गए हैं। इनमें 302 मामलों में आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं। 1,583 मामलों में जांच बंद करने की रिपोर्ट दाखिल की गई है, जबकि 1,135 मामले अभी जांच के अधीन हैं। 33 मामलों में मुकदमे की कार्यवाही शुरू हो चुकी है।
CBI के 31 मामलों की भी हुई समीक्षा
CBI से जुड़े मामलों की स्थिति भी कोर्ट के सामने रखी गई। अदालत को बताया गया कि CBI 31 मामलों की जांच कर रही है। इनमें 28 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं, जबकि छह मामलों में जांच बंद करने की रिपोर्ट दाखिल हुई है। तीन मामले अभी जांच के अधीन हैं। इन मामलों में 978 गवाहों के नाम दिए गए हैं, लेकिन अभी तक सिर्फ छह गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं। इन मामलों में 38 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाने पर जोर दिया। फिलहाल CBI से जुड़े स्थानांतरित मामलों की सुनवाई गुवाहाटी की विशेष अदालत में हो रही है। पीड़ितों की ओर से पेश वकील निजाम पाशा ने बताया कि जिरह की कार्यवाही चल रही है, लेकिन अदालत इन मामलों को सप्ताह में केवल दो दिन सुन पा रही है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सप्ताह में दो दिन भी सुनवाई होने से मुकदमे को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने CBI मामलों की सुनवाई के लिए दो अदालतें उपलब्ध कराने की संभावना पर भी विचार करने को कहा।
