Kolkata Stampede: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार को मची भगदड़ में कम से कम 19 लोगों की जान चली गई, जबकि 25 लोग घायल हो गए। इस दर्दनाक हादसे के बाद राज्य प्रशासन सतर्क हो गया है। विशेष टीम के निरीक्षण के आधार पर पश्चिम बंगाल अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा के दक्षिण कोलकाता प्रभाग ने तीन प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों को नोटिस जारी किया है। इनमें चेतला अग्रानी क्लब, त्रिधारा सम्मिलनी और बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन शामिल हैं। विभाग ने इन पंडालों के आयोजकों को अग्निशमन और सुरक्षा संबंधी नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसके लिए उन्हें रविवार रात तक की समयसीमा दी गई।
3 बड़े दुर्गा पूजा पंडालों को नोटिस (फोटो- ANI)
मुख्य निर्देश और अनुपालन संबंधी आदेश
लाइट व्यवस्था में तत्काल सुधार: आयोजकों को निर्देश दिया गया है कि वे पंडाल परिसर में तुरंत पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करें, ताकि कहीं भी अंधेरा न रहे और भीड़ प्रबंधन के लिए दृश्यता बनी रहे।
बेहतर वेंटिलेशन (हवा-पानी की निकासी) व्यवस्था: पंडालों के अंदर पर्याप्त पंखे और एयर कंडीशनिंग यूनिट लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि भीड़ अधिक होने पर दम घुटने जैसी स्थिति न बने।
अनधिकृत व्यावसायिक ढांचों को हटाना: निरीक्षण टीम ने पाया कि पंडालों के पास कई अस्थायी व्यावसायिक ढांचे बनाए गए हैं, जैसे खाने पाइन के स्टाल। पंडालों के पास बने इन अस्थायी स्टॉलों में LPG सिलेंडरों का होना एक गंभीर सुरक्षा खतरा माना गया है, खासकर तब जब ये पंडाल अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री से बने हों।
सख्त समय-सीमा (डेडलाइन) अनुपालन की समय-सीमा: 18 अक्टूबर को रात 8:00 बजे तक दी गई।
अनिवार्य कार्रवाई: सभी अनधिकृत अस्थायी ढांचों और खतरनाक स्टॉलों को तुरंत हटा दिया जाना चाहिए। साथ ही, तय समय-सीमा के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सीधे स्थानीय फायर स्टेशन में जमा करनी होगी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी
इस हादसे के बाद पश्चिम बंगाल समेत देश के कई राज्यों में शोक की लहर है। वहीं पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट में भगदड़ के दौरान हुई मौतों को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश लोगों की जान भीड़ के भारी दबाव के चलते छाती पर दबाव पड़ने और दम घुटने से गई। वहीं, 19 मृतकों में से कम से कम छह के मामले में पसलियां टूटकर फेफड़ों तक पहुंच गई थीं।
