दिल्ली में साहित्य के जरिए भारतीय चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प, इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती की नई कार्यसमिति का हुआ ऐलान

नई दिल्ली के मंडी हाउस स्थित मेघदूत थिएटर में इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती का राज्यस्तरीय कार्यक्रम साहित्य, संस्कृति और भारतीय चेतना के संदेश के साथ आयोजित हुआ। इस अवसर पर नए पदाधिकारियों की घोषणा के साथ 'साहित्य परिक्रमा' के नए स्वरूप का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में विभाजन की त्रासदी पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को इतिहास के दर्दनाक अध्यायों की स्मृतियों से भावुक कर दिया।

Delhi News: अखिल भारतीय साहित्य परिषद न्यास की दिल्ली इकाई इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती का राज्यस्तरीय कार्यक्रम मंडी हाउस स्थित मेघदूत थिएटर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य के जरिए सर्वहित की भावना को व्यापक स्तर पर पहुंचाने और दिल्ली-एनसीआर में साहित्यिक गतिविधियों को नई गति देने का संकल्प लिया गया। इस दौरान संगठन की नई कार्यसमिति की घोषणा के साथ साहित्यिक पत्रिका 'साहित्य परिक्रमा' के नए स्वरूप का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और साहित्य भारती के उद्देश्य गीत 'लोकमंगल की कामना' के गायन से हुई।

Indraprastha Sahitya Bharati

‘साहित्य परिक्रमा’ के नए स्वरूप का हुआ विमोचन भी

अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अध्यक्ष डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी ने दिल्ली प्रांत की कार्यसमिति की औपचारिक घोषणा की। रामशरण गौड़ को संरक्षक, विनोद बब्बर को अध्यक्ष, पूनम माटिया को उपाध्यक्ष, मनोज शर्मा को महामंत्री और मुन्ना रजक को कोषाध्यक्ष बनाया गया। इसके अलावा प्रो. ममता को 'साहित्य परिक्रमा', मलखान सिंह को लोक साहित्य, राकेश कुमार को बाल साहित्य, सारिका कालरा को युवा कार्य और दिनेश वत्स को प्रचार कार्य की जिम्मेदारी दी गई। सरदार जगदीश सिंह और सुनीता बुग्गा को कार्यसमिति में सदस्य का दायित्व सौंपा गया। डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी ने कहा कि साहित्यकारों को सामूहिक प्रयास के जरिए भारतीय चेतना को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने का काम करना चाहिए। उनका कहना था कि साहित्य में निहित सर्वहित का संदेश देश की सीमाओं से आगे वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।

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