Delhi News: दिल्ली में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के मामलों से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने Delhi Cyber Crime Coordination Centre (D4C) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। मंगलवार 25 अगस्त 2026 को जारी आदेश के मुताबिक D4C दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध से जुड़ी गतिविधियों के लिए नोडल और शीर्ष समन्वय एजेंसी के तौर पर काम करेगा।
दिल्ली में ऑनलाइन फ्रॉड की जांच में अब आएगी तेजी
D4C का काम सिर्फ साइबर ठगी तक ही सीमित नहीं रहेगा। यह ऑनलाइन अपराधों की जांच, साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर इंटेलिजेंस, वित्तीय धोखाधड़ी रोकने और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल का काम भी करेगा।
15 जिलों की साइबर पुलिस पर नजर
D4C का अधिकार क्षेत्र पूरी दिल्ली होगा। दिल्ली के सभी 15 पुलिस जिलों में चल रहे साइबर पुलिस स्टेशनों को D4C की ओर से जारी साइबर अपराध से जुड़ी नीतियों और ऑपरेशनल दिशा-निर्देशों के मुताबिक काम करना होगा। इससे अलग-अलग जिलों में दर्ज साइबर अपराध के मामलों और उनके पैटर्न की केंद्रीय स्तर पर निगरानी की जा सकेगी।
JCP होंगे D4C के CEO
D4C का रोजमर्रा का प्रशासनिक नियंत्रण ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस स्तर के अधिकारी के पास होगा, जिन्हें Chief Executive Officer (CEO), D4C बनाया जाएगा। CEO सीधे स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस, स्पेशल सेल की निगरानी में काम करेंगे, जबकि अंतिम प्रशासनिक नियंत्रण दिल्ली के पुलिस कमिश्नर के पास रहेगा। CEO के साथ अलग-अलग विशेषज्ञ विंग के डीसीपी काम करेंगे।
1930 हेल्पलाइन D4C का हिस्सा
D4C में मौजूदा 1930 साइबर हेल्पलाइन कंट्रोल रूम और Fraud Mitigation Centre (FMC) को भी शामिल किया गया है। 1930 हेल्पलाइन साइबर वित्तीय ठगी की शिकायतों के लिए नागरिकों का प्रमुख संपर्क केंद्र होगी। वहीं FMC का काम ठगी की रकम को जल्द से जल्द रोकने, बैंक खातों पर लियन मार्क कराने, पैसों के लेन-देन की कड़ी का पता लगाने और पीड़ितों को राहत दिलाने पर रहेगा।
FMC में बैंकों के प्रतिनिधियों को भी रखा जाएगा, ताकि ठगी की शिकायत मिलने के बाद बैंकिंग सिस्टम में तेजी से कार्रवाई की जा सके।
AI और डेटा एनालिटिक्स से पकड़े जाएंगे साइबर अपराधी
D4C की एक खास जिम्मेदारी साइबर अपराधियों के तौर-तरीकों का डेटा के आधार पर विश्लेषण करने की होगी। इसके लिए Research & Innovation Unit और Data Analytics & Response Team काम करेंगे।
ये टीमें साइबर ठगी के नए तरीकों, अपराधियों के पैटर्न, हॉटस्पॉट और संगठित साइबर गिरोहों का विश्लेषण करेंगी। जरूरत के मुताबिक AI, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
फर्जी बम धमकी वाले ई-मेल की भी होगी विशेष जांच
D4C में Hoax Bomb E-mail Investigation Cell भी बनाया जाएगा। यह VPN, अनॉनिमाइजेशन तकनीक, फर्जी या गुमनाम ई-मेल और ऑनलाइन बम धमकी जैसे मामलों की तकनीकी जांच करेगा। इसके अलावा डिजिटल सबूत जुटाने और टेलीकॉम कंपनियों, इंटरनेट प्लेटफॉर्म तथा ई-मेल सर्विस प्रोवाइडरों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी भी इस सेल की होगी।
महिलाओं-बच्चों से जुड़े ऑनलाइन अपराधों के लिए अलग विंग
D4C में Online Crimes against Women & Children (OCWC) Wing भी बनाया गया है। यह महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले साइबर अपराधों पर विशेष रूप से काम करेगा।
इसमें साइबर स्टॉकिंग, सेक्सटॉर्शन, ऑनलाइन ग्रूमिंग, बिना-सहमति केनिजी तस्वीरें शेयर करना, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री और AI से तैयार किए गए अश्लील कंटेंट जैसे मामलों पर कार्रवाई शामिल होगी।
यह विंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटवाने, डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने और पीड़ितों को जरूरी कानूनी तथा दूसरी सहायता दिलाने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल करेगा।
दिल्ली पुलिस के साइबर सिस्टम की भी निगरानी
D4C में Cyber Security Division बनाया गया है, जो दिल्ली पुलिस के कंप्यूटर सिस्टम, नेटवर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर साइबर हमलों की निगरानी करेगा। इसके तहत Network/Security Operations Centre, Cyber Commandos, Preventive Security Unit और Incident Response Unit काम करेंगे।
IFSO यूनिट अब D4C में शामिल
आदेश में एक अहम बदलाव करते हुए दिल्ली पुलिस की मौजूदा Intelligence Fusion & Strategic Operations (IFSO) यूनिट, द्वारका को D4C में शामिल करने का फैसला किया गया है। IFSO की इंवेस्टिगेशन विंग, डिजिटल इंवेस्टिगेशन लैब, साइबर अवेयरनेस सेंटर, 1930 साइबर हेल्पलाइन कंट्रोल रूम और फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर अब D4C का अभिन्न हिस्सा होंगे।
D4C के लिए अलग-अलग पदों के सृजन और मंजूरी की प्रक्रिया बाद में की जाएगी। तब तक दिल्ली पुलिस मुख्यालय मौजूदा पुलिस बल में से जरूरी अधिकारियों और कर्मचारियों को D4C में तैनात करेगा।
इस नई व्यवस्था का मकसद साइबर अपराध से जुड़े मामलों में जिलेवार कार्रवाई के बजाय पूरी दिल्ली के स्तर पर एकीकृत रणनीति बनाना है, ताकि ऑनलाइन ठगी, संगठित साइबर गिरोह, डिजिटल अपराध और साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरों पर तेजी से कार्रवाई की जा सके।
