वित्तीय वर्ष की समाप्ति के साथ ही आयकर विवरण यानी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। जो करदाता पहली बार अपना ITR फाइल करने जा रहे हैं, उनके लिए आवश्यक दस्तावेजों की सही जानकारी होना बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि रिटर्न भरते समय किसी भी प्रकार की गलती या इनकम टैक्स विभाग के नोटिस से बचा जा सके।
ITR filing कौन कौन से कागज हैं जरुरी?
पहली बार रिटर्न दाखिल करते समय सबसे पहला और बुनियादी दस्तावेज आपका पैन कार्ड (PAN Card) और आधार कार्ड (Aadhaar Card) है, जिनका आपस में लिंक होना अनिवार्य है। इनके बिना आप ई-फाइलिंग पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन या लॉगिन नहीं कर सकते। इसके बाद, वेतनभोगी कर्मचारियों (Salaried Employees) के लिए सबसे प्रमुख दस्तावेज 'फॉर्म 16' (Form 16) होता है, जो कंपनी द्वारा जारी किया जाता है और इसमें आपकी कुल आय, अलाउंस और काटे गए टैक्स (TDS) का पूरा ब्योरा दर्ज होता है।
कौन कौन से डॉक्यूमेंट चाहिए होंगे?
हालांकि, केवल फॉर्म 16 पर निर्भर रहने के बजाय आयकर विभाग के आधिकारिक पोर्टल से 'फॉर्म 26AS' (Form 26AS), एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) डाउनलोड करना बेहद जरूरी है। इनमें आपके बैंक खातों पर मिला ब्याज, शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड से हुई कमाई, लाभांश (Dividend), और साल भर में हुए उच्च मूल्य वाले वित्तीय लेनदेन (High-Value Transactions) का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद होता है।
इसके अतिरिक्त, करदाता को अपने सभी सक्रिय बैंक खातों के विवरण (जैसे खाता संख्या और IFSC कोड) और पूरे वित्तीय वर्ष का बैंक स्टेटमेंट या इंटरेस्ट सर्टिफिकेट (Interest Certificate) तैयार रखना चाहिए, क्योंकि बचत खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से मिलने वाले ब्याज की जानकारी देना कानूनन अनिवार्य है।
Old Tax Regime के तहत मिलने वाले फायदे
अगर आप पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनते हैं, तो धारा 80C के तहत मिलने वाले लाभों के लिए एलआईसी (LIC), पीपीएफ (PPF), ईएलएसएस (ELSS), ट्यूशन फीस, धारा 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम की रसीदें और होम लोन पर ब्याज का सर्टिफिकेट जैसे टैक्स सेविंग प्रूफ भी पास रखना आवश्यक होता है। वहीं अगर आप नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) चुनते हैं तो इनमें से अधिकतर कटौतियों की आवश्यकता नहीं पड़ती।
शेयर या प्रॉपर्टी की बिक्री से हुई आय के लिए कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट और फ्रीलांस या बिजनेस इनकम होने पर बैंक पासबुक व खर्चों की रसीदें संभालकर रखनी चाहिए। इन सभी कागजातों का प्री-वेरिफिकेशन करने के बाद सही ITR फॉर्म (जैसे ITR-1 या ITR-2) का चयन कर समय रहते रिटर्न फाइल करने से न केवल पेनल्टी से बचाव होता है, बल्कि रिफंड मिलने की प्रक्रिया भी आसान और तेज हो जाती है।
