TDS Deduction: अगर वेतन आय तय सीमा को पार कर जाती है तो भारतीय इनकम टैक्स कानूनों के मुताबिक कोई कंपनी या संस्थान यानी नियोक्ता हमेशा कर्मचारी के वेतन से स्रोत पर टैक्स कटौती (टीडीएस) काटता है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले कर्मचारियों को अपने निवेश और खर्चों के डिटेल के साथ आयकर घोषणा (Income-tax declaration) पेश करने के लिए कहा जाता है। जो उन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान किया था। घोषित आय से अधिक होने पर नियोक्ता नियमित रूप से स्रोत पर कर कटौती (TDS) करता है या तो अतिरिक्त टैक्स में कटौती करके या कर्मचारी द्वारा दिखाए गए निवेश/बचत के वास्तविक प्रमाणों के आधार पर बाकी अवधि के लिए कम टैक्स में कटौती करता है। आपके वेतन से काटे जाने वाले टीडीएस को कम करने के 8 तरीके यहां दिए गए हैं। जिसके जरिये आप अपना पैसा बचा सकते हैं।
टीडीएस कटौती को कम करने के तरीके
घर किराया भत्ता
मकान किराया भत्ता (House Rent Allowance) यानी HRA का दावा करने के लिए कोई कर्मचारी से मकान मालिक का नाम, पता और पैन नंबर जैसे डिटेल पेश करने की अपेक्षा की जाती है और वह भी उन मामलों में जहां वित्त वर्ष के दौरान भुगतान किया गया कुल किराया 1 लाख रुपए से अधिक है। अगर मकान मालिक का पैन उपलब्ध नहीं है तो फॉर्म संख्या 60 में एक घोषणा दी जानी चाहिए।
फूड कूपन
अगर आपकी कंपनी भोजन कूपन नहीं देती है तो आप उनसे प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कह सकते हैं। भोजन वाउचर पर प्रति भोजन 50 रुपए की छूट है। इसका मतलब यह है कि महीने में 25 दिन की कार्य अवधि के लिए दोपहर के भोजन और रात के खाने (100 रुपये x 25 दिन) को ध्यान में रखते हुए भोजन वाउचर प्रति माह 2500 रुपए की सीमा तक टैक्स-फ्री हो सकते है।
अवकाश यात्रा भत्ता
अगर आपके वेतन ब्रेक-अप में यात्रा भत्ता शामिल नहीं है तो आप हमेशा अपने नियोक्ता से इसे अपने वेतन ब्रेक-अप में शामिल करने का अनुरोध कर सकते हैं। प्रत्येक टैक्सपेयर को छूट का दावा करने से पहले, यात्रा भत्ता खर्च उठाना चाहिए।
मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम
कर्मचारी ऐसे भुगतान के प्रमाण के रूप में सही बैंक डिटेल/पासबुक की प्रतियों के साथ भुगतान किए गए प्रीमियम की कटौती के समर्थन में बीमा कंपनियों से 80डी टैक्स प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अलावा एक कर्मचारी को वित्त वर्ष के दौरान किए गए किसी भी स्वास्थ्य नियमित जांच के लिए रसीदें या बिल पेश करने की भी जरूरत हो सकती है।
होम लोन पर ब्याज
इस मामले में ऋणदाता का नाम, पता और पैन समेत डिटेल, बैंक या अधिकृत संस्थान से एक प्रमाण पत्र जिसमें लोन प्राप्त करने की तारीख, किस्त राशि और देय ब्याज जैसे डिटेल शामिल हैं। उन्हें जमा करना होगा।
नेशनल पेंशन स्कीम (NPS)
नेशनल पेंशन स्कीम में वित्तीय वर्ष के दौरान जमा की गई राशि की जमा रसीद की एक प्रति और बैंक डिटेल की एक प्रति जमा करें।
ट्रस्ट और चैरिटी के लिए दान
अगर आपने अधिकृत ट्रस्टों, धर्मार्थ संस्थानों जैसे अधिसूचित मंदिरों, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष, राष्ट्रीय रक्षा कोष आदि को कुछ धनराशि दी है तो कोई कर्मचारी रसीद के रूप में दान का प्रमाण जमा कर सकता है जिसमें सभी डिटेल, नाम और पता शामिल हों। और ट्रस्ट या संस्था का पैन, दानकर्ता का नाम, रिजस्ट्रेशन नंबर या और उसकी वैलिडिटी।
80सी के माध्यम से टीडीएस की बचत
उपरोक्त के अलावा, वेतन पर टीडीएस बचाने के लिए सुनिश्चित करें कि आप धारा 80C और अन्य उपकरणों में निवेश करके पूरी राशि का उपयोग करें। वेतन से टीडीएस या टैक्स देनदारी कम करने का सबसे पसंदीदा तरीका पीपीएफ में निवेश करना है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) आपको सालाना करीब 1.5 लाख रुपए की टैक्स छूट प्रदान करता है।
