घर खरीदने के लिए ज्यादातर लोग होम लोन (Home Loan) लेते हैं। होम लोन की अवधि आमतौर पर 15 से 30 साल तक हो सकती है। लेकिन जब बैंक ब्याज दर बढ़ा देता है, तो इसका सीधा असर लोन की लागत पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में उधारकर्ताओं के सामने दो विकल्प होते हैं। पहला विकल्प यह कि वे हर महीने की ईएमआई बढ़वा लें और दूसरा विकल्प ये कि वे लोन चुकाने की अवधि बढ़वा लें। ऐसे में सवाल उठता है कि दोनों में से कौन-सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद है-
होम लोन का ब्याज बढ़ने पर ईएमआई बढ़वाएं या अवधि (Photo: iStock)
EMI बढ़वाने का क्या होगा फायदा?
अगर आपके होम लोन की ब्याज दर बढ़ गई है, तो आप बैंक से अपनी मंथली ईएमआई बढ़ाने का विकल्प चुन सकते हैं। इससे हर महीने आपको पहले के मुकाबले ज्यादा रकम चुकानी होगी, लेकिन लोन की अवधि को बढ़ाने से बचा जा सकता है। ईएमआई बढ़ाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपका मूलधन तेजी से कम हो सकता है और आपको लंबे समय तक ब्याज नहीं चुकाना पड़ेगा। इससे लोन पर कुल ब्याज का बोझ कम रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह विकल्प उन्हीं लोगों के लिए बेहतर है, जिनकी मंथली इनकम अधिक है और बढ़ी हुई ईएमआई चुकाने के बाद भी घर के बजट पर इसका असर नहीं आएगा।
लोन की अवधि बढ़वाना कब है सही?
अगर आपकी आमदनी सीमित है या पहले से ही घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दूसरी ईएमआई चुकाने में बजट का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है, तो लोन की अवधि बढ़वाना राहत दे सकता है। इससे आपकी मौजूदा ईएमआई कम रह सकती है या उसमें बढ़ोतरी से बचा जा सकता है।
हालांकि, इस विकल्प का नुकसान यह है कि लोन चुकाने में ज्यादा समय लगेगा। इस दौरान आपको अधिक अवधि तक ब्याज देना पड़ सकता है, जिससे कुल ब्याज का भुगतान बढ़ सकता है। इसलिए केवल हर महीने की किस्त कम रखने के लिए अवधि बढ़वाने का फैसला करने से पहले कुल ब्याज की लागत जरूर समझें।
कौन-सा विकल्प है ज्यादा बेहतर?
अगर आपकी आय स्थिर है और आप बढ़ी हुई ईएमआई आसानी से चुका सकते हैं, तो ईएमआई बढ़वाना आमतौर पर बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे लोन की अवधि नियंत्रित रखने और कुल ब्याज घटाने में मदद मिल सकती है।
वहीं, अगर आपकी आर्थिक स्थिति तंग है, तो अवधि बढ़वाने से मासिक बजट पर दबाव कम हो सकता है। आप चाहें तो आय बढ़ने पर अतिरिक्त भुगतान करके मूलधन घटाने की योजना बना सकते हैं।
