Gold Price Forecast : शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के इस दौर में सोना एक बार फिर निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना साबित हो रहा है। अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा गर्म रहने और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं के बावजूद सोने की कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिला है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह सपोर्ट सोने में किसी बड़ी या टिकाऊ तेजी के लिए काफी नहीं हो सकता है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, मजबूत होता डॉलर और फेडरल रिजर्व का सख्त रुख सोने के रास्ते में सबसे बड़े रोड़े हैं।
क्या और गिरेगी सोने की कीमत? (तस्वीर-Canva)
क्यों बढ़ी सोने की मांग?
हाल ही में अमेरिकी शेयर बाजार में बड़ी टेक और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। इस गिरावट का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दक्षिण कोरिया के 'कोस्पी' (KOSPI) और जापान के 'निकेई' (Nikkei 225) जैसे एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। जब शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ी, तो निवेशकों ने अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए बॉन्ड्स और सोने का रुख किया। भारी मांग के कारण बॉन्ड यील्ड घटी और डॉलर इंडेक्स में गिरावट आई। इस वजह से सोने को करीब 4,150 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर मजबूत सपोर्ट मिला।
क्या सोना अपने ऑल-टाइम हाई को दोबारा छू पाएगा?
सोने ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,602 डॉलर प्रति औंस और भारतीय बाजार (MCX) में 1,76,306 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑल-टाइम हाई बनाया था। वर्तमान स्थिति (16 अक्टूबर तक) अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,185 डॉलर प्रति औंस (ऑल-टाइम हाई से करीब 25% नीचे) है। जबकि भारतीय सोना (MCX) 1,45,511 रुपये प्रति 10 ग्राम (ऑल-टाइम हाई से करीब 17% नीचे) है।
क्या इस साल नया रिकॉर्ड संभव है?
कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, इस साल सोने का फिर से ऑल-टाइम हाई छूना मुश्किल है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के लिए सोने को तीन महीने से भी कम समय में करीब 34% उछलना होगा, जो कि मौजूदा परिस्थितियों (ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड) में आसान नहीं है। हालांकि, भारत में रुपये की स्थिति और इम्पोर्ट ड्यूटी के कारण घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले कम गिरी हैं।
तो सोना कितना गिर सकता है?
तकनीकी रूप से 4,100 डॉलर से 4,110 डॉलर का दायरा सोने के लिए एक मजबूत सपोर्ट जोन बना हुआ है। अगर सोना इस स्तर से नीचे गिरता है और बंद होता है, तो आगे और गिरावट आ सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,100 डॉलर का स्तर टूटने पर अगला सपोर्ट 4,000 डॉलर और उसके बाद 3,880 डॉलर से 3,900 डॉलर के आसपास है। यानी मौजूदा स्तर से 4% से 7% की अतिरिक्त गिरावट हो सकती है। अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतें गिरती हैं, तो भारत में सोना 1,43,500 रुपये और फिर 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है। ऑग्मोंट की मुख्य अनुसंधान अधिकारी डॉ. रेनीशा चीनानी के अनुसार अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व एक से अधिक बार ब्याज दरें बढ़ाता है, तो सोना 3,800 डॉलर ( 1,36,000 रुपये से 1,37,000 रुपये प्रति 10 ग्राम) तक भी फिसल सकता है। हालांकि, इससे बड़ी गिरावट की संभावना बहुत कम है।
इस भाव पर भी कौन खरीद रहा है सोना?
कीमतों में रिकॉर्ड ऊंचाई से आई गिरावट के बावजूद खरीदार बाजार से गायब नहीं हुए हैं। सितंबर में खत्म हुई तिमाही के दौरान वैश्विक गोल्ड ETFs में 31 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश आया। दुनियाभर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। अगस्त में 39 टन की खरीदारी के बाद सितंबर में केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी में और तेजी दर्ज की गई है। भारत जैसे देशों में फेस्टिव सीजन और उपभोक्ता व्यवहार भी सोने की भौतिक (फिजिकल) मांग को बनाए रखने में मदद कर रहा है।
3 मुख्य संकेत, जिन पर निवेशकों की नजर है
- फेडरल रिजर्व का रुख:- अक्टूबर की FOMC बैठक में ब्याज दरों में बदलाव न होने की संभावना 85% से अधिक है। अगर अक्टूबर में दरें नहीं बढ़ती हैं, तो यह सोने के लिए राहत की बात होगी। हालांकि, दिसंबर में दरें बढ़ने की संभावना 70% से ज्यादा जताई जा रही है।
- बॉन्ड यील्ड और डॉलर:- अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5% के आसपास बनी हुई है। अगर यील्ड और डॉलर इंडेक्स में नरमी आती है, तो सोने को मजबूती मिलेगी।
- भू-राजनीतिक तनाव:- अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी महंगाई और बाजार के मूड को प्रभावित कर रही हैं, जिससे सोने की 'सेफ-हेवन' मांग पर असर पड़ता है।
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
सोना इस समय दो परस्पर विरोधी ताकतों के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और अनिश्चितता के दौर में सुरक्षित निवेश की मांग इसे सहारा दे रही है, तो दूसरी तरफ ऊंची ब्याज दरें और मजबूत बॉन्ड यील्ड इसकी रफ्तार रोक रहे हैं। अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो दैनिक उतार-चढ़ाव या गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है। सोने के बुनियादी फंडामेंटल्स मजबूत हैं, और यह आपके पोर्टफोलियो को विविधता (डाइवर्सिफिकेशन) और सुरक्षा प्रदान करता है। कम समय के लिए दांव लगाने वाले ट्रेडर्स को सावधान रहने की सलाह है, क्योंकि आने वाले दिनों में बाजार काफी उतार-चढ़ाव भरा (वोलेटाइल) रह सकता है।
