अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग जल्द खत्म खत्म होने की उम्मीद बढ़ गई है। ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के साथ बातचीत करने और किसी समझौते पर पहुंचने के लिए सहमति जताई है। अगर यह युद्ध खत्म होता है तो भारत समेत पूरी दुनिया को बड़ी राहत मिलेगी। कच्चे तेल की कीमतें कम होंगी और होर्मुज स्ट्रेट खुलने से सप्लाई चेन बेहतर होगी। लेकिन इस युद्ध से दुबई को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई शायद ही अगले कुछ सालों में हो पाए। विशेषज्ञों का कहना हे कि ईरान के दुबई पर हमले से उसका 'सेफ सिटीज' का टैग खत्म हो गया है। इस नुकसान की भरपाई दुबई के लिए करना आसान नहीं होगा। दुबई जो भारतीय NRI निवेशकों की पहली पसंद बना था, अब नहीं रह जाएगा। इसका फायदा इंडियन प्रॉपर्टी मार्केट को होगा। आइए समझते हैं कि कैसे ईरान युद्ध ने दुबई की पूरी तस्वीर बदल दी है और भारतीय रियल्टी मार्केट के लिए बड़े मौके खोल दिए हैं।
दुबई बनाम भारत का रियल एस्टेट मार्केट
दुबई की प्रॉपर्टी मांग और कीमत में बड़ी गिरावट
ईरान युद्ध् का दुबई की अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा असर पड़ा है। फरवरी के आखिर में अबतक दुबई का रियल एस्टेट इंडेक्स कथित तौर पर लगभग 32% गिर गया है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है आने वाले दिनों में प्रॉपर्टी की कीमतें 30-40% तक गिर सकती हैं। दुबई पर हमले से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। दुबई का रियल एस्टेट बाजार एक साथ दो झटक लगा है। अभी लगभग 3.85 लाख यूनिट्स का कंस्ट्रक्शन चल रहा है, जिनमें से लगभग 80% के 2026 और 2028 के बीच डिलीवर होने की उम्मीद है। अमेरिका-ईरान युद्ध से 'सेफ-हेवन' (सुरक्षित ठिकाना) का टैग खत्म हो गया है। Citi Research ने कहा कि कमजोर मांग वाले माहौल में कीमतों में गिरावट का जोखिम काफी ज्यादा हो सकता है।
इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, मिडिल ईस्ट में हालिया संघर्ष शुरू होने के बाद से UAE में प्रॉपर्टी के लेन-देन में तेजी से गिरावट आई है। बैंक का कहना है कि क्षेत्रीय अनिश्चितता बढ़ने का सीधा असर घर खरीदने वालों की मांग पर पड़ा है। युद्ध शुरू होने के बाद से, मार्च के पहले पखवाड़े में लेन-देन का कुल मूल्य साल-दर-साल (YoY) 31% और महीने-दर-महीने (MoM) 51% गिर गया।
भारत एक 'सेफ हेवन' बनकर उभरा
रियल एस्टेट एक्सपर्ट प्रदीप मिश्रा ने टाइम्स नाउ नवभारत को बताया कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में NRIs के लिए भारत एक 'सेफ हेवन' बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि पहले कोविड महामारी और अब ईरान युद्ध जैसे वैश्विक संकटों ने अनिवासी भारतीयों (NRIs) की सोच बदल दी है। ईरान युद्ध ने एनआरई को अपनी जड़ों की अहमियत समझा दी है। विदेशी बाजारों में बढ़ते जोखिम के कारण अब अरबों रुपये का निवेश भारतीय रियल एस्टेट, विशेषकर लग्जरी हाउसिंग में आने वाला है। यह न केवल बड़े शहरों की तस्वीर बदलेगा, बल्कि पूरे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ा 'बूस्टर डोज' साबित होगा।
सुरक्षित निवेश का इकलौता पता 'हिंदुस्तान'
अंतररिक्ष इंडिया के सीएमडी राकेश यादव ने टाइम्स नाउ को बताया कि ईरान युद्ध ने दुबई के प्रॉपर्टी बाजार को बड़ा झटका दिया है। NRIs निवेशकों को समझ में आ गया है कि दुबई अब सेफ हेवन नहीं रहा है। प्रवासी भारतीयों को यह भी समझ में आ गया है कि चाहे कोरोना महामारी हो या अब युद्ध, भारत से सुरक्षित जगह पूरी दुनिया में कहीं नहीं है। रियल एस्टेट में निवेश का ट्रेंड अब बदल चुका है अब बात सिर्फ रिटर्न की नहीं, बल्कि भरोसे की भी हो रही है। इस बदलाव का सीधा फायदा भारत को मिल रहा है, जहां पूंजी तेजी से शिफ्ट हो रहा है। खासतौर पर दिल्ली—एनसीआर, गुरुग्राम और मुंबई जैसे शहरों में लग्जरी प्रॉपर्टी की मांग हाल के दिनों में बढ़ी है। एक ओर जहां दुनिया युद्ध के साये में जोखिम देख रही है, वहीं NRIs के लिए सुरक्षित निवेश का इकलौता पता अब केवल 'हिंदुस्तान' है।
