Dhanteras Gold Price : भारत में धनतेरस और दिवाली के पावन अवसर पर सोने-चांदी की खरीदारी को बेहद शुभ माना जाता है। 'धनत्रयोदशी' के नाम से जाना जाने वाला यह त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को आता है और पांच दिवसीय दिवाली उत्सव की शुरुआत करता है। पारंपरिक रूप से इस दिन लोग नए आभूषण, सोने-चांदी के सिक्के और कीमती धातुएं खरीदते हैं। अगर आपने भी पिछले साल धनतेरस के आसपास सोना खरीदा था, तो हाल के दिनों में कीमतों में आई गिरावट (करेक्शन) के बावजूद आपका निवेश फायदे का सौदा साबित हो रहा है। भले ही सोने की कीमतें अपने उच्चतम स्तर से थोड़ी नीचे आई हैं, लेकिन वे पिछले साल की तुलना में अब भी काफी ऊपर बनी हुई हैं। इससे पिछले साल त्योहारी सीजन के दौरान पीली धातु में निवेश करने वाले लोगों को शानदार रिटर्न मिला है। आइए समझते हैं कि पिछले साल के मुकाबले इस साल सोने की क्या स्थिति है, इसमें कितना मुनाफा हुआ है और बाजार का मौजूदा रुख क्या संकेत दे रहा है।
पिछले धनतेरस से इस धनतेरस तक कितना बदला सोना का रेट
एक साल में कितना बढ़ा सोने का भाव?
कीमतों के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24-कैरेट सोना करीब ₹1,45,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि 22-कैरेट सोने का भाव करीब 1,34,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास चल रहा है। ध्यान दें कि इन कीमतों में जीएसटी (GST) और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं। अगर हम पिछले साल यानी अक्टूबर 2025 के धनतेरस से तुलना करें, तो उस समय 24 कैरेट सोना 1,32,278 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा था। इस लिहाज से पिछले साल की धनतेरस के मुकाबले 24K सोने में अब तक 9 से 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, अगर ठीक एक साल पहले (नवंबर की शुरुआत) की बात करें, तब 10 ग्राम सोने की कीमत 1,23,085 रुपये थी। इस तरह दिल्ली में बीते एक साल के दौरान सोने में करीब 14.85% से 15% तक का तगड़ा उछाल आया है। रुपये के हिसाब से देखें तो 10 ग्राम सोने पर सीधे 11,000 रुपये से 12,000 रुपये तक का फायदा हुआ है। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार पिछले साल 18 अक्टूबर को धनतेरस के अवसर पर सोने का भाव 1,32,400 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 1.70 लाख रुपये प्रति किलो था। गौरतलब है कि जनवरी 2026 के उत्तरार्ध में सोने ने करीब 1.83 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑल-टाइम हाई (उच्चतम स्तर) छुआ था। हालांकि, उस शिखर से अब तक सोने में करीब 18 से 20 प्रतिशत का करेक्शन यानी गिरावट देखने को मिली है, जिसके बाद कीमतें मौजूदा स्तर पर आई हैं।
भारत और वैश्विक बाजार में क्यों बनी हुई है सोने की मांग?
कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने के प्रति निवेशकों और संस्थागत खरीदारों का भरोसा मजबूत बना हुआ है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने जुलाई-सितंबर की तिमाही में 321 टन सोने की शुद्ध खरीदारी की है, जो पिछले साल की इसी अवधि से 42% अधिक है। इसके अलावा, ग्लोबल गोल्ड ETF में भी इस तिमाही के दौरान 211 टन का भारी निवेश दर्ज किया गया है।
भारतीय बाजार की बात करें तो सितंबर तिमाही में सोने की मांग में पिछली तिमाही (अप्रैल-जून) के मुकाबले 29% की बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि, ऊंचे आयात शुल्क और रिकॉर्ड कीमतों के कारण पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कुल मांग 29% घटकर 162.5 टन रही। इसके बावजूद ज्वेलरी की मांग में तिमाही-दर-तिमाही 33% का सुधार हुआ और यह 100 टन तक पहुंच गई। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का अनुमान है कि इस पूरे साल भारत में कुल सोने की मांग 625 से 675 टन के बीच रह सकती है। वहीं, देश में 'डिजिटल गोल्ड' की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और इसमें सालाना आधार पर 44% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इस धनतेरस क्या सोना खरीदना सही फैसला होगा?
वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका-ईरान तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे भू-राजनीतिक संकटों के बीच सोना हमेशा एक सुरक्षित निवेश और पोर्टफोलियो को मजबूती देने वाला जरिया साबित हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरी नहीं कि इतिहास में मिला शानदार रिटर्न आने वाले महीनों में भी ठीक उसी तरह दोहराया जाए। सोने की भावी कीमतें अमेरिकी डॉलर की स्थिति, ब्याज दरों में बदलाव, महंगाई दर और दुनिया भर के आर्थिक हालातों पर निर्भर करती हैं।
इसलिए, इस धनतेरस पर सोने में निवेश करने का फैसला केवल हालिया रिटर्न को देखकर जल्दबाजी में न लें। सोना खरीदने का निर्णय आपके लॉन्ग टर्म वित्तीय लक्ष्यों और बजट के अनुरूप ही होना चाहिए। सही रणनीति के साथ किया गया निवेश ही आपको भविष्य में बेहतर और सुरक्षित रिटर्न दे सकता है।
