वैश्विक स्तर पर चावल के उत्पादन में गिरावट आने और अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में चावल के दाम वैश्विक औसत से अब भी करीब 10 प्रतिशत कम बने हुए हैं। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने एक प्रेस रिलीज में यह जानकारी शेयर की है। संगठन के मुताबिक, भारत में प्रतिस्पर्धी कीमतें होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में देश की स्थिति मजबूत बनी हुई है, हालांकि निर्यातकों को लागत बढ़ने जैसी कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बीच छाया भारतीय चावल, वैश्विक औसत से 10% सस्ते हैं दाम
वियतनाम और थाईलैंड के मुकाबले भारतीय चावल बेहद सस्ती
आईआरईएफ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 5 प्रतिशत टूटे हुए सफेद चावल की कीमत 385 से 390 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन के दायरे में दर्ज की गई है। इसकी तुलना में वियतनाम का चावल 440 से 450 अमेरिकी डॉलर और थाईलैंड का चावल करीब 480 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में एक साल से अधिक समय में आई सबसे बड़ी तेजी के बाद भी भारतीय चावल अपनी किफायती कीमत और बढ़त को बनाए रखने में कामयाब रहा है।
वैश्विक उत्पादन में भारी कमी का अनुमान
अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) के ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए फेडरेशन ने बताया कि वैश्विक चावल का उत्पादन वर्ष 2025-26 के करीब 545.7 मिलियन टन से घटकर वर्ष 2026-27 में 533.1 मिलियन टन रहने का अनुमान जताया गया है। यानी वैश्विक स्तर पर कुल उत्पादन में करीब 12.6 मिलियन टन की भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके बावजूद भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश बना रहेगा और वैश्विक चावल व्यापार का अनुमान वर्ष 2027 के लिए करीब 61.4 मिलियन टन तय किया गया है।
निर्यातकों के सामने बढ़ रही हैं चुनौतियां
एएनआई के मुताबिक आईआरईएफ के पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष और ईस्टमैन इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमन सिंगल ने बताया कि भारत के सस्ते दाम अंतरराष्ट्रीय बासमती और गैर-बासमती चावल बाजारों में देश की स्थिति को मजबूत करने में मददगार साबित हुए हैं, खासकर एशिया और अफ्रीका के देशों में। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धान की बढ़ती लागत, परिवहन और मालभाड़े (फ्रेट) के ऊंचे चार्ज तथा फसल की उपलब्धता को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण निर्यातकों के मुनाफे पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। सिंगल का कहना है कि केवल कम निर्यात कीमतें ही काफी नहीं हैं, बल्कि भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बचाए रखने के लिए कुशल लॉजिस्टिक्स, दूरदर्शी और अनुमानित नीतियां तथा भरोसेमंद आपूर्ति का होना भी बेहद जरूरी है।
देश में बंपर स्टॉक से मिलेगी सुरक्षा और मजबूती
प्रेस रिलीज के अनुसार, भारत का कुल चावल उत्पादन पिछले अनुमानित करीब 154 मिलियन टन की तुलना में अब करीब 147 मिलियन टन रहने का अनुमान है। हालांकि, आईआरईएफ का यह भी मानना है कि देश के पास मौजूद सरकारी चावल का पर्याप्त भंडार आपूर्ति में आने वाली किसी भी तरह की अस्थाई बाधाओं से निपटने में मदद करेगा। यह स्टॉक न केवल घरेलू खाद्य सुरक्षा को सुरक्षित रखेगा, बल्कि निर्यात की निरंतरता को भी सुचारू रूप से चलाए रखने में पूरी तरह सक्षम होगा।
भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC) 2026 में होगी चर्चा
चावल बाजार के इस पूरे परिदृश्य और भविष्य के रुख पर आगामी 23 से 25 अक्टूबर के दौरान नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले 'भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2026' में विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में एसएंडपी ग्लोबल, बिगमिंट, ईवाई और आईआरईएफ के प्रमुख विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। वे साल 2027 के लिए चावल के उत्पादन, वैश्विक मांग, भंडार की स्थिति, मौसम से जुड़े जोखिमों और संभावित मूल्य परिदृश्यों का बारीकी से विश्लेषण करेंगे।
