उत्पादन घटने के बाद भी दुनिया में सबसे सस्ता भारतीय चावल, निर्यात में भी दबदबा बरकरार

वैश्विक उत्पादन में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय तेजी के बावजूद भारत का चावल वैश्विक औसत से 10% सस्ता है। आईआरईएफ के अनुसार, सरकारी भंडार से निर्यात जारी रहेगा और अक्टूबर में इस पर सम्मेलन होगा।

वैश्विक स्तर पर चावल के उत्पादन में गिरावट आने और अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में चावल के दाम वैश्विक औसत से अब भी करीब 10 प्रतिशत कम बने हुए हैं। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने एक प्रेस रिलीज में यह जानकारी शेयर की है। संगठन के मुताबिक, भारत में प्रतिस्पर्धी कीमतें होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में देश की स्थिति मजबूत बनी हुई है, हालांकि निर्यातकों को लागत बढ़ने जैसी कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है।

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बीच छाया भारतीय चावल, वैश्विक औसत से 10% सस्ते हैं दाम

वियतनाम और थाईलैंड के मुकाबले भारतीय चावल बेहद सस्ती

आईआरईएफ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 5 प्रतिशत टूटे हुए सफेद चावल की कीमत 385 से 390 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन के दायरे में दर्ज की गई है। इसकी तुलना में वियतनाम का चावल 440 से 450 अमेरिकी डॉलर और थाईलैंड का चावल करीब 480 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में एक साल से अधिक समय में आई सबसे बड़ी तेजी के बाद भी भारतीय चावल अपनी किफायती कीमत और बढ़त को बनाए रखने में कामयाब रहा है।

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