Notice Period पूरा नहीं किया तो क्या कंपनी आपको Blacklist कर सकती है?

नौकरी छोड़ते वक्त नोटिस पीरियड पूरा न करने पर अक्सर कंपनियां ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देती हैं। लेकिन भारतीय कानून के तहत जबरन काम करवाना अवैध है और ब्लैकलिस्टिंग पर क्या अधिकार मिलते हैं, आइए जानते हैं।

कॉर्पोरेट जगत में नौकरी बदलने की प्रक्रिया के दौरान 'notice period' (नोटिस पीरियड) एक बेहद अहम हिस्सा होता है। अमूमन हर कंपनी यह उम्मीद करती है कि कर्मचारी इस्तीफा देने के बाद तय समय (जैसे 1 महीने, 2 महीने या 3 महीने) तक काम करे, ताकि कामकाज का सुचारू रूप से ट्रांजिशन हो सके और नए व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपी जा सके। लेकिन कई बार ऐसी स्थितियां बन जाती हैं कि कर्मचारियों को तुरंत नई नौकरी ज्वाइन करनी पड़ती है या वे पुराना ऑफिस समय से पहले छोड़ना चाहते हैं। ऐसे में जब कोई कर्मचारी बिना नोटिस पीरियड पूरा किए अचानक कंपनी छोड़ देता है, तो एचआर (HR) या मैनेजमेंट की तरफ से उसे ब्लैकलिस्ट (Blacklist) करने या करियर बर्बाद करने की धमकियां मिलने लगती हैं। इस तरह के मामलों को लेकर कर्मचारियों के मन में हमेशा यह डर बना रहता है कि क्या वाकई कोई कंपनी उन्हें कानूनी रूप से ब्लैकलिस्ट कर सकती है।

Notice Blacklist

Notice Period पूरा नहीं किया तो क्या कंपनी आपको Blacklist कर सकती है?

कंपनी के पास क्या हैं अधिकार?

कानूनी विशेषज्ञों और लेबर लॉ के जानकारों के मुताबिक, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 23 (Article 23) जबरन श्रम (Forced Labour) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाता है। इसका मतलब यह है कि कोई भी कंपनी किसी भी कर्मचारी को उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरदस्ती काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती है। भारतीय अनुबंध अधिनियम (Indian Contract Act, 1872) के तहत भी व्यक्तिगत सेवा के समझौतों को जबरन लागू नहीं कराया जा सकता है। यदि कोई कर्मचारी नोटिस पीरियड पूरा किए बिना ऑफिस छोड़ देता है, तो कंपनी उसे शारीरिक या मानसिक रूप से रोकने का अधिकार नहीं रखती। हालांकि, यह एक अनुबंध (Contract) का उल्लंघन जरूर माना जाता है, जिसके तहत कंपनियों के पास कुछ वित्तीय और कानूनी विकल्प जरूर मौजूद होते हैं।

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