BIRC 2026: 'क्वांटिटी छोड़ो, क्वालिटी पकड़ो', चिराग पासवान ने बताया चावल सेक्टर में भारत का अगला बड़ा प्लान

BIRC 2026: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि भारत को अब केवल चावल का उत्पादन बढ़ाने के बजाय उसकी गुणवत्ता, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मूल्यवर्धन पर ध्यान देकर वैश्विक निर्यात को मजबूत करना चाहिए।

BIRC 2026 : भारत ने खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में एक लंबा सफर तय किया है। एक समय था जब देश में अनाज की भारी कमी थी, लेकिन आज भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादक और निर्यातक देशों में गिना जाता है। हालांकि, बदलते वक्त के साथ अब चुनौतियां और प्राथमिकताएं भी बदल गई हैं। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने स्पष्ट किया है कि भारत को अब केवल चावल का उत्पादन (मात्रा) बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय उसकी गुणवत्ता, ब्रांडिंग और मूल्यवर्धन (वैल्यू एडिशन) पर ध्यान देने की आवश्यकता है। शुक्रवार को भारतीय चावल निर्यातक परिसंघ (IREF) और कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा आयोजित 'भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन' (BIRC) के दूसरे संस्करण को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने भारत के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

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ग्लोबल राइस मार्केट में भारत की नई चाल: उत्पादन से आगे, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग पर फोकस (तस्वीर-X)

हरित क्रांति से लेकर आज तक का सफर

अपने संबोधन में चिराग पासवान ने कहा कि देश की आजादी के बाद शुरुआती दशकों में भारत की सबसे बड़ी चुनौती अपनी विशाल आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना था। उस समय हमारी प्राथमिकता ज्यादा से ज्यादा अनाज पैदा करने की थी ताकि देश को भुखमरी से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि हरित क्रांति ने भारत को अनाज की कमी से उबारने और आत्मनिर्भर बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। लेकिन आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। भारत के पास अब एक बेहद मजबूत उत्पादन क्षमता है। इसलिए, अब समय आ गया है कि हम सिर्फ ज्यादा उत्पादन करने की सोच से बाहर निकलें और प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), गुणवत्ता (क्वालिटी), ब्रांडिंग, स्थिरता और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) पर अपनी ऊर्जा लगाएं।

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