पटना : राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को नागरिकता संशोधन बिल 2019 पर अपना रूख स्पष्ट करते हुए कहा कि हम इस बिल का मजबूती के साथ विरोध करेंगे। यह एक ऐसा बिल है जो देश को विभाजित करेगा। हम इसके खिलाफ लड़ेंगे। नीतीश कुमार ने बिल का समर्थन करके बिहार की जनता को फिर धोखा दिया है। नीतीश कुमार बीजेपी और आरएसएस से डरते हैं।
जनता नता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने लोकसभा में इस बिल समर्थन किया था। लोकसभा में जेडीयू के 16 सांसद हैं। इसके बाद पार्टी के उपाध्यक्ष और रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर सवाल उठाया था। अब पार्टी नेता पवन वर्मा ने भी सवाल उठाया है।
नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित कराने में सरकार का समर्थन करने वाली शिवसेना के प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि शिवसेना प्रस्तावित कानून का समर्थन नहीं करेगी जब तक कि राज्यसभा में पार्टी के सवालों का समाधान नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि हम इस बिल को तब तक समर्थन नहीं देंगे, जब तक कि चीजें स्पष्ट नहीं होतीं। यदि कोई भी नागरिक इस बिल से डरता है, तो किसी को भी अपने संदेह को स्पष्ट करना चाहिए। वे हमारे नागरिक हैं।
उद्धव ने कहा कि हमें इस धारणा को बदलना होगा कि इस बिल और बीजेपी का समर्थन करने वाले देशभक्त हैं और जो इसका विरोध कर रहे हैं वो देशद्रोही हैं। बिल को लेकर उठाए गए सभी मु्द्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवसेना ने जिन संशोधनों का सुझाव दिया है, उन्हें राज्यसभा में पेश किए जाने वाले बिल में शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये शरणार्थी कहां रुकेंगे। किस राज्य में। यह सबकुछ स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने कुछ सवाल उठाए हैं लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिए हैं। यह एक भ्रांति है कि सिर्फ बीजेपी को देश का खयाल है।
गौर हो कि यह बिल लोकसभा ने सोमवार रात को 80 मतों के मुकाबले 311 मतों पारित कर दिया है। अगर यह कानून बन जाता है तो अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए गैर मुस्लिम शरणार्थी - हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता मिल जाएगी।