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'निर्भया के दोषियों को 16 दिसंबर को ही हो फांसी', न्‍याय प्रक्रिया में देरी पर मां ने उठाए सवाल

Updated Dec 11, 2019 | 12:52 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Nirbhaya's Mother on convict's appeal: निर्भया के दोषी अक्षय ने फांसी को टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है, जिस पर पीड़‍िता की मां आशा देवी की पहली प्रतिक्रिया आई है।

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तस्वीर साभार:&nbspANI
निर्भया की मां आशा देवी ने दोषियों को जल्‍द सजा देने की मांग की है (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली : देश की राजधानी दिल्‍ली में निर्भया के साथ 7 साल पहले दरिंदगी को अंजाम देने के चार दोषियों में से एक अक्षय सिंह ने मंगलवार को अजीबोगरीब दलील देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की कि जब दिल्‍ली 'गैस चैम्‍बर' में तब्‍दील हो गई है और लोग प्रदूषण से ही मर रहे हैं तो उन्‍हें फांसी देने की जरूरत क्‍या है। निर्भया के दोषी की इस अजीबोगरीब अपील पर अब पीड़‍िता की मां आशा देवी ने प्रतिक्रिया दी है।

अपनी पहली प्रतिक्रिया में उन्‍होंने कहा कि यह वास्‍तव में पूरी न्‍याय प्रक्रिया का माखौल है। दोषियों को 16 दिसंबर को ही फांसी देने की मांग करते हुए उन्‍होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का निपटारा जल्‍दी करना चाहिए। उन्‍होंने यह भी कहा कि एक साल तक इंतजार करने के बाद उन्‍होंने अदालत का रुख किया।

दोषी की याचिका पर आशा देवी ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट और पूरी कानूनी प्रक्रिया का मजाक बना रहे हैं। उन्‍होंने कहा, 'हमें मानवाधिकारों के बारे में बताया जा रहा है, लेकिन क्‍या तब उन्‍हें इसकी याद नहीं रही थी जब उन्‍होंने मेरी बच्‍ची की आंत बाहर निकाल दी थी। आखिर हमेशा पीड़‍ित को ही सभी नियम-कानून के बारे में क्‍यों बताया जाता है?'

उन्‍होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी का नमा हर जगह लिया जा रहा है, लेकिन सरकार ने उसके नाम पर आवंटित फंड का पूरा इस्‍तेमाल तक नहीं किया। साइबराबाद और उन्‍नाव के संदर्भ में उन्‍होंने यह भी कहा कि अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे पीड़‍िताओं को जला दे रहे हैं। यह पूरे सिस्‍टम पर तमाचा है।

यहां उल्‍लेखनीय है कि निर्भया के दोषी अक्षय सिंह की ओर से यह याचिका ऐसे समय में शीर्ष अदालत में दायर की गई है, जब ऐसी रिपोर्ट है कि तिहाड़ जेल प्रशासन दोषियों को जल्‍द फांसी देने की तैयारियों में जुटा है। निर्भया के दोषी की इस याचिका को मामले को और उलझाने और फांसी की सजा को टालने या इसमें देरी करने की पैंतरेबाजी के रूप में देखा जा रहा है।

दिल्‍ली में 16 दिसंबर, 2012 को 23 साल की पैरा मेडिकल छात्रा के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस मामले में पांच को दोषी ठहराया गया था, जिनमें से एक राम सिंह की तिहाड़ जेल में ही संदिग्‍ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस मामले में अब मुकेश सिंह, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय को मृत्‍युदंड दिया जाना है।

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