- नागरिकता संशोधन बिल 2019 अब कानून बना
- नागरिकता संशोधन बिल का दिल्ली समेत देश भर के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहा है
- पीएम मोदी ने लोगों से शांति की अपील की
नई दिल्ली। लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर के बाद नया नागरिकता संशोधन बिल कानून की शक्ल में हम सबके सामने हैं। ये बात अलग है कि इस कानून के विरोध में असम से लेकर दिल्ली और देशभर के कई राज्यों में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अपील करते हुए कहा कि लोकसतंत्र में असहमति हो सकती है। लेकिन जिन तरीकों से विरोध किया जा रहा है वो दुखद है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि जो लोग विरोध में हैं उन्हें कानून को पढ़ने और समझने की जरूरत है। लेकिन कुछ राजनीतिक दलों का कहना है कि सरकार एक साजिश के तहत सामाजिक ताने बाने पर चोट पहुंचाने का काम रही है, यही नहीं एनआरसी में जिन लोगों का नाम छूट जाएगा उसे कैब के जरिए नागरिकता दे दी जाएगी।
नागरिकता संशोधन कानून पर डर कितना वास्तविक
- सवाल ये है कि क्या राजनीतिक दल इस विषय पर भ्रम का निर्माण कर रहे हैं। यहां हम पहले बताएंगे कि पूर्वोत्तर में लोगों का क्यों डर सता रहा है।पूर्वोत्तर के लोगों को लगता है कि इस बिल के पारित होने से बाहर से आए लोगों को नागरिकता हासिल होगी और इस तरह से उनकी आजीविका के लिए खतरा पैदा होगा।
- इसके साथ ये भी डर है कि सिर्फ हिंदू, सिख, पारसी, जैन, बौद्ध, ईसाई को नागरिकता देने का मतलब है कि सरकार धर्म के आधार पर बंटवारा कर रही है।
- लोगों का यह भी मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में बांग्लादेश से आए हिंदुओं को इस बिल के तहत भारतीय नागरिक बनाया जा सकता है।
अब समझें क्या है एनआरसी
- 2013 में उच्चतम न्यायालय के निर्देश में असम में एनआरसी की प्रक्रिया शुरू की गई। इसका मकसद था कि 1971 के बाद बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों या घुसपैठियों की पहचान की जाए।
- एनआरसी में सिर्फ उन लोगों को शामिल किया गया जो 24 मार्च 1971 की मध्य रात्रि से पहले असम में दाखिल हुए या उनके पूर्वज असम में रहते थे।
- इसी वर्ष अगस्त में असम में एनआरसी की अंतिम सूची जारी की गई जिसमें करीब 19 लाख लोगों को बाहरी माना गया और 3.11 करोड़ लोग भारतीय नागरिक बताए गए।
यह है नागरिकता संशोधन कानून
- इस कानून के तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से उन धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी जो धार्मिक प्रताणना की वजह से भारत आए।
- इस कानून से हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, पारसी और बौद्ध समाज का फायदा मिलेगा।
- खास बात ये है इस समूह के सभी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी भले ही उनके पास कोई दस्तावेज हो या न हो। ऐसे लोग जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत में दाखिल हो चुके हैं, वो भारतीय नागरिकता के लिए सरकार के पास आवेदन कर सकते हैं।
नागरिकता संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने कहा था कि कि मोदी सरकार देश को किस तरफ ले जाना चाहती है। लेकिन गृहमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जिन लोगों को व्यर्थ बहस की आदत पड़ चुकी है उन्हें समझाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी मुल्कों पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यक जीते जागते उदाहरण हैं कि उनके साथ क्या हुआ था।