- कल्पना चावला का जन्म करनाल में 1961 में हुआ और सायना नेहवाल का जन्म 1990 में हिसार में
- कल्पना चावाल और सायना नेहवाल दुनिया भर की लड़कियों के लिए बनीं प्रेरणा की स्रोत
- सायना और कल्पना ने इन दोनों ने अपनी उपलब्धियों से विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई
नई दिल्ली: भारत के इतिहास में 17 मार्च का दिन खासकर हरियाणा के लिए बहुत अहम है क्योंकि इस दिन इस राज्य में दो ऐसी बेटियों ने जन्म लिया, जिन्होंने विश्व स्तर पर अपने परिवार और राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया। इनमें से एक हैं 17 मार्च 1961 को करनाल में जन्मीं और अंतरिक्ष यात्री बनकर अंतरिक्ष की ऊंचाइयां नापने वाली कल्पना चावला और दूसरी हैं 17 मार्च 1990 को हिसार में जन्मी बैडमिंटन जगत की सिरमौर खिलाड़ी सायना नेहवाल। इन दोनों ने अपनी उपलब्धियों से विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
डोनाल्ड ट्रंप ने भी सराहा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की प्रशंसा करते हुए उन्हें अमेरिकी नायक और लाखों लड़कियों को अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए प्रेरित करने वाला बताया था। ट्रंप ने कहा था कि भारतीय-अमेरिकी कल्पना चावला अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं और अंतरिक्ष शटल कार्यक्रम के प्रति अपने समर्पण के लिए वो अमेरिकी हीरो बन गईं।ट्रंप ने कहा था कि 'कल्पना चावला का साहस और जुनून लाखों अमेरिकी लड़कियों के लिए एक प्रेरणा के रूप में काम करता है जो एक दिन अंतरिक्ष यात्री बनने का सपना देखती हैं।
कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थीं
कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थीं। वो 2003 में कोलंबिया अंतरिक्ष यान आपदा में मारे गए सात यात्री दल सदस्यों में से एक थीं। नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) की वैज्ञानिक-अंतरिक्ष यात्री चावला को उनकी उपलब्धियों के लिए कांग्रेस द्वारा मरणोपरांत कांग्रेशनल अंतरिक्ष पदक से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा, 'नासा ने उन्हें मरणोपरांत नासा स्पेस फ्लाइट पदक और नासा विशिष्ट सेवा पदक दिया।
1960 में हरियाणा के करनाल में हुआ जन्म
कल्पना चावला का जन्म 1960 में हरियाणा के करनाल में हुआ था। वह अपने परिवार में चार भाई बहनो में सबसे छोटी थीं। वो बचपन से ही अंतरिक्ष में जाना चाहती थीं।कल्पना 1982 में अमेरिका चली गईं और 1984 वैमानिक अभियान्त्रिकी में विज्ञान निष्णात की उपाधि टेक्सास विश्वविद्यालय आर्लिंगटन से प्राप्त की। 1986 में उन्होंने दूसरी विज्ञान निष्णात की उपाधि पाई और 1988 में कोलोराडो विश्वविद्यालय बोल्डर से वैमानिक अभियंत्रिकी में विद्या वाचस्पति की उपाधि पाई। 1988 में उन्होंने नासा के एम्स अनुसंधान केंद्र के लिए ओवेर्सेट मेथड्स इंक के उपाध्यक्ष के रूप में काम करना शुरू किया।
1 फरवरी 2003 को क्रूर हादसे ने कल्पना को हमसे छीन लिया
कल्पना चावला ने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमा पूरी की। इस कामयाब मिशन के बाद 2003 में एक बार फिर उनका नाम नासा ने चुना और दूसरी उड़ान कोलंबिया शटल 2003 से भरी। उनकी यह उड़ान 6 जनवरी, 2003 को स्पेस शटल कोलम्बिया से शुरू हुई। यह मिशन 16 दिन का था जिसके लिए खास तैयारी की गई थी। लेकिन सात स्पेस यात्रियों के लिए यह उड़ान आखिरी उड़ान साबित हुई जिसमे कल्पना चावला भी शामिल थीं। 1 फरवरी 2003 को धरती पर वापस आने के क्रम में यह यान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते अंतरिक्ष यान आग के गोलों में तब्दील हो गया जिसमें कल्पना चावला अनंत में कहीं विलीन हो गईं।
खेल की दुनिया में छा गईं सायना
सायना नेहवाल खेल की दुनिया की ऐसी हस्ती हैं जो किसी परिचय की मोहताज नहीं है। सायना नेहवाल का जन्म हरियाणा के हिसार में 19 मार्च 1990 को हुआ था। सायना 23 मई 2015 को वर्ल्ड बैडमिंटन रैंकिंग में वर्ल्ड नंबर वन बनी थीं। इस मुकाम पर पहुंचने वाली वो पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। वह एक महीने में तीसरी बार पहली वरीयता पाने वाली अकेली महिला खिलाड़ी हैं।
लंदन ओलंपिक 2012 मे साइना ने इतिहास रचते हुए बैडमिंटन की महिला एकल स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया था। बैडमिंटन मे ऐसा करने वाली वे देश की पहली खिलाड़ी हैं। साइना भारत सरकार द्वारा पद्म श्री और सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित हो चुकीं हैं। उनका विवाह बैडमिंटन खिलाड़ी परुपल्ली कश्यप से हुआ है।