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US-Iran War: ड्रोन, चिप और रूस-चीन का साथ... क्या ईरान के 'चक्रव्यूह' में फंस गया अमेरिका?

अमेरिकी-ईरान युद्ध हर बीत वक्त के साथ और भीषण होता जा रहा है। ईरान अमेरिका जैसे सुपरपावर को ही नहीं, बल्कि इजरायल सिहत कई खाड़ी देशों पर हमला कर रहा है। भले ही ट्रंप बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि ईरान की सैन्य ताकत तबाह हो चुकी है, लेकिन असलियत यह है कि अभी भी ईरान की सेना जंग-ए-मैदान में अपनी दमखम दिखा रही है। तो फिर सवाल ये है कि आखिर ईरान की मदद कर कौन रहा है?

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अमेरिका और इजरायल के हमलों का ईरान दे रहा करारा जवाब।
Authored by: Piyush Kumar
Updated Mar 14, 2026, 18:18 IST

US-Iran War: "ईरान पूरी तरह हार चुका है, उसकी सेना को हमने तबाह कर दिया है," दुनिया के सामने आकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावे कर रहे हैं। हालांकि, सच्चाई कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। न तो ईरान ने शिकस्त हासिल की है और न ही वह सरेंडर करने के मूड में है।

अमेरिका की 'ऑपरेशन एपीके फ्यूरी' हर बीते वक्त के साथ और भीषण मोड़ लेती जा रही है, लेकिन अमेरिकी सेना के हर हमले का ईरान मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। आखिरकार अमेरिका ने आग बबूला होकर ईरान की 'लाइफलाइन' कही जाने वाली खर्ग द्वीप पर भी भीषण बमबारी कर दी है, जहां से ईरान अपना 90 प्रतिशत कच्चा तेल चीन समेत दुनियाभर को बेचता है। इसी तेल को बेचकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के खर्चे सहित ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को चला रहा है।

सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर जो देश आसमान छूती महंगाई और बदहाल अर्थव्यवस्था से जूझ रहा है, उसके पास इतनी ताकत कहां से आ रही है कि वह न सिर्फ 'सुपरपावर' अमेरिका बल्कि इजरायल सहित कई खाड़ी देशों के खिलाफ डट कर खड़ा भी है और उनके हमलों का जवाब भी दे रहा है?

इस सवाल का जवाब पूर्व अमेरिकी अधिकारियों और सैन्य विशेषज्ञों ने दिया है। फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत करते हुए कहा कि आशंका है कि इस युद्ध में रूस लगातार ईरान की 'बैकडोर' मदद कर रहा है। मतलब यह है कि रूस अपनी सैटेलाइट की मदद से ईरान को अमेरिकी एयरबेस की सटीक लोकेशन शेयर कर रहा होगा।

US Iran War

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ओस्लो विश्वविद्यालय के मिसाइल युद्ध विशेषज्ञ फैबियन हॉफमैन के अनुसार, जैमिंग से निपटने वाले ड्रोन जैसे कुछ ईरानी ड्रोन में रूसी तकनीक का भी इस्तेमाल होता दिख रहा है। हालांकि, ट्रंप से बातचीत के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि इस युद्ध में रूस, ईरान की कोई सैन्य मदद नहीं कर रहा, लेकिन रूस ने यह कहा है कि अमेरिका ने यद्ध नियमों का उल्लंघन जरूर किया है।

क्या चीन कर रहा ईरान की मदद?

ईरान की सैन्य क्षमता को मजबूत करने में चीन की भूमिका भी काफी अहम है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्रैगन पिछले कई वर्षों से ईरान के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और निगरानी सिस्टम को आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने ईरान को एडवांस रडार सिस्टम मुहैय्या कराए हैं और उसकी सैन्य नेविगेशन सिस्टम को अमेरिकी जीपीएस से हटाकर चीन के सैटेलाइट नेटवर्क पर शिफ्ट करने में मदद की है। ईरान अब चीन के BeiDou-3 का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे उसकी सैन्य नेविगेशन और लक्ष्य पहचान क्षमता बेहतर हुई है।

US Iran War

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रिपोर्टों के अनुसार चीन द्वारा सप्लाई किया गया YLC-8B रडार भी ईरान की रक्षा क्षमता को बढ़ा सकता है। यह यूएचएफ (UHF) बैंड पर काम करने वाला एंटी-स्टेल्थ रडार है, जो कम फ्रीक्वेंसी वाली तरंगों का इस्तेमाल करता है। माना जाता है कि इससे अमेरिकी स्टेल्थ विमान जैसे B-21 Raider और F-35C Lightning II को ट्रैक करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

इसके अलावा खबर है कि ईरान, चीन से करीब 50 सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल खरीदने के करीब है। यह CM-302 मिसाइल है, जो चीन की YJ-12 मिसाइल का निर्यात संस्करण मानी जाती है। यह मिसाइल मैक-3 की रफ्तार से उड़ सकती है और समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ान भरते हुए लक्ष्य को भेद सकती है।

भले ही चीन ने अब तक खुलकर ईरान का साथ नहीं दिया है, लेकिन चीन ने शुक्रवार (13 मार्च, 2026) को घोषणा की है कि वह ईरान के मिनाब में 28 फरवरी को प्राइमरी स्कूल पर हुए घातक मिसाइल हमले में मारे गए छात्रों के परिवारों को 2 लाख डॉलर (करीब 1.67 करोड़ रुपये) की सहायता राशि देगा। ऐसी मदद ये साबित तो जरूर करती है ईरान को लेकर चीन की हमदर्दी है।

क्या वाकई युद्ध में रूस और चीन, ईरान की मदद कर रहे हैं या नहीं? इन बातों पर तीनों देशों ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन ये तो जरूर है कि फिलहाल ईरान के हथियार मिडिल ईस्ट में तबाही मचा रहे हैं।

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ईरान का 'ब्रह्मास्त्र'

इन हथियारों में सबसे ज्यादा तबाही तो ईरानी ड्रोन शाहेद-131 और शाहेद-136 ने मचाई है। ईरान के पास दुनिया का सबसे खतरनाक हमलावर ड्रोन है, जिसका नाम शाहेद-136 है। इससे पहले यह ड्रोन यूक्रेन में भी तबाही मचा चुका है। अब ईरान इसका इस्तेमाल मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने में कर रहा है। ईरान के पास कुल 80 हजार ड्रोन हैं। इतना ही नहीं, ईरान के पास 12 तरीके के ड्रोन हैं।

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मिसाइल की जगह ड्रोन से हमला क्यों कर रहा ईरान?

1. कम लागत में ज्यादा नुकसान की रणनीति

अमेरिकी थिंक टैंक Defense Priorities की मिडिल ईस्ट प्रोग्राम डायरेक्टर Rose Kelanic के मुताबिक ईरान सस्ते गोला-बारूद और ड्रोन से अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। इसका मकसद कम खर्च में ज्यादा नुकसान पहुंचाना है। ईरान की रणनीति युद्ध को लंबा खींचने और अमेरिका को थकाने की बताई जा रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने भी कहा है कि ईरान लंबे समय से अमेरिका का मुकाबला करने की तैयारी कर रहा है।

    मिसाइलों का सीमित भंडार

    ईरान के पास मिसाइलों की संख्या सीमित मानी जाती है, इसलिए वह उन्हें बचाकर रखना चाहता है। अनुमान के मुताबिक उसके पास करीब 2000 मिसाइलें हैं। रूस पहले से ही युद्ध में उलझा हुआ है, इसलिए वहां से सैन्य मदद मिलने की संभावना भी कम मानी जा रही है। ऐसे में ईरान रणनीतिक तौर पर ड्रोन का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है।

      ड्रोन सस्ते और प्रभावी हथियार

      ईरान के कई ड्रोन की कीमत करीब 18 लाख रुपये तक बताई जाती है। इसके मुकाबले आधुनिक लड़ाकू विमान की कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये तक हो सकती है। सस्ते ड्रोन के जरिए महंगे सैन्य उपकरणों को निशाना बनाना ईरान की बड़ी रणनीति है। इससे ईरान दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि कम लागत वाले हथियार भी आधुनिक युद्ध में बेहद खतरनाक हो सकते हैं।

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