अमेरिका ने हमला किया तो ईरान के पास क्या-क्या हैं विकल्प? तेहरान दे चुका है जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
ईरान पर यदि हमला हुआ तो वह चुप नहीं रहेगा। वह जवाबी कार्रवाई करेगा। इसके संकेत उसने दे दिए हैं। ईरान ने कहा है कि उसकी अंगुली हथियारों के ट्रिगर पर हैं, यानी हमला हुआ तो वह इसका जवाब देगा। बताया जाता है कि ईरान के पास करीब 2000 मिसाइलें हैं जिनमें क्रूज एवं सुपरसोनिक मिसाइलें हैं।
- Written by: आलोक कुमार राव
- Updated Jan 31, 2026, 09:40 AM IST
Iran Vs US : ईरान के चारो तरफ से घेराबंदी करने के बाद अमेरिका लगातार तेहरान पर दबाव बना रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई से इंकार नहीं किया है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा है कि वह अमेरिका के साथ 'निष्पक्ष एवं तर्कसंगत' बातचीत करने के लिए तैयार है लेकिन यह बातचीत धमकियों के साए में नहीं होनी चाहिए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची तुर्किये पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि 'बातचीत से ईरान को कोई समस्या नहीं है लेकिन बातचीत धमकियों के साए में नहीं हो सकती।' दरअसल, ट्रंप ने कहा है कि ईरान यदि 'बिजनेस' पर बातचीत के लिए आगे नहीं आता है तो उस पर सैन्य कार्रवाई होनी तय है।
हमला हुआ तो ईरान चुप नहीं रहेगा
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान पर यदि हमला हुआ तो वह चुप नहीं रहेगा। वह जवाबी कार्रवाई करेगा। इसके संकेत उसने दे दिए हैं। ईरान ने कहा है कि उसकी अंगुली हथियारों के ट्रिगर पर हैं, यानी हमला हुआ तो वह इसका जवाब देगा। बताया जाता है कि ईरान के पास करीब 2000 मिसाइलें हैं जिनमें क्रूज एवं सुपरसोनिक मिसाइलें हैं। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हाल के दिनों में रूस और चीन ने भी उसे हथियार दिए हैं। खासतौर पर रूस की किंजल मिसाइल भी ईरान के पास होने की बात कही जा रही है। रूस की यह हाइपरसोनिक मिसाइल है जिसकी गति मैक 10 यानी आवाज की रफ्तार से 10 गुना ज्यादा मानी जाती है। ईरान ने यदि ये मिसाइल दागी तो अमेरिकी सेना को इसे इंटरसेप्ट करना काफी मुश्किल होगा।
ईरान ने की है जवाबी कार्रवाई की तैयारी।
ईरान के करीब आया एयरक्राफ्ट करियर अब्राहम लिंकन
बताया जा रहा है कि अमेरिका का एयरक्राफ्ट करियर युद्धपोत अब्राहम लिंकन दक्षिण चीन सागर से ईरान के करीब आ गया है। इस एयरक्राफ्ट पर पांचवीं पीढ़ी के एफ-35, एफ-20 लड़ाकू विमान और अन्य घातक हथियार तैनात हैं। ईरान ने इस एयरक्राफ्ट पर अगर अपने हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलों से हमले किए तो एयरक्राफ्ट डूब सकता है। इस इस एयरक्राफ्ट पर करीब 6500 अमेरिकी सैन्यकर्मी तैनात रहते हैं। जाहिर है कि ईरान वेनेजुएला नहीं है। वेनेजुएला की सैन्य ताकत ईरान के मुकाबले काफी कम थी। ईरान के पास पारंपरिक सेना के साथ-साथ आधुनिक ड्रोन और मिसाइलें हैं। ईरानी ड्रोनों ने हाल के समय में किस तरह से कहर बरपाया है, इसे यूक्रेन में देखा जा चुका है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
खाड़ी देश में अमेरिकी सैन्य बेस बन सकते हैं निशाना
अमेरिकी हमला होने पर ईरान खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बना सकता है। ईरान पहले ही कह चुका है कि यदि इन सैन्य बेस से हमले हुए तो वह इन्हें निशाना बनाएगाी। हालांकि, यूएई सहित कई अरब देशों ने अमेरिका से कहा है कि हमले के लिए वे ईरान के खिलाफ अपनी धरती का इस्तेमाल नहीं होने देंगे। उन्होंने अमेरिका से युद्ध व संघर्ष से बचने की अपील की है। खाड़ी के देश जानते हैं कि यदि ईरान पर हमला हुआ तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाले तेल व्यापार को अवरुद्ध कर सकता है। इस रास्ते दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का आता-जाता है। इस मार्ग से तेल की आवाजाही रुकी तो दुनिया भर में तेल की कीमतें अचानक से बढ़ जाएंगी। फिर बेतहाशा महंगाई बढ़ेगी। इससे अमेरिका भी अछूता नहीं रहेगा।
इजरायल पर मिसाइलें दाग सकता है ईरान
अपने ऊपर हमला होने पर ईरान, इजरायल की तरफ मिसाइलों की बौछार कर सकता है। पिछले ईरान-इजरायल संघर्ष में यह देखा जा चुका है। ईरान के मिसाइल हमलों को इजरायल पूरी तरह से रोक नहीं पाया। ईरान की कई मिसाइलें इजरायल के अंदरूनी एवं रिहायशी इलाकों में गिरीं और इससे इजरायल को भारी नुकसान हुआ।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
इजरायल के जो भी एयर डिफेंस सिस्टम हैं, वे एक हद तक तो मिसाइल हमलों को तो निष्क्रिय कर सकते हैं लेकिन मिसाइल हमलें एक साथ बहुत ज्यादा में हुए तो इन्हें पूरी तरह रोक पाना मुश्किल होगा।
ईरान के पास मजबूत समुद्री बेड़ा
इजरायल में मिसाइलें नीचे गिरेंगी तो इनसे भारी तबाही होना तय है। अमेरिका ने अपनी पैट्रिएट एवं थाड मिसाइलें इजरायल को दी हैं लेकिन इनकी भी एक सीमा है। इन मिसाइलों की लागत बहुत ज्यादा है। इन्हें बनाने में काफी समय भी लगता है। अमेरिका ने ये मिसाइलें यूक्रेन को भी दी हैं, ऐसे में ईरान पर हमले के बाद अमेरिका के लिए एक और मोर्चा खुल जाएगा जो अच्छी सैन्य रणनीति नहीं मानी जाएगी। ईरान के पास नौसेना का भी एक मजबूत बेड़ा है जो समुद्र में अमेरिका के लिए काफी परेशानी खड़ी कर सकता है।
