- पूर्व नॉर्वे राष्ट्रपति थॉरबोर्न यागलैंड से एपस्टीन की थी अच्छी दोस्ती: रिपोर्ट
- यागलैंड की वजह से बिल गेट्स जैसे लोगों के संपर्क में आया एपस्टीन
- यागलैंड पर जेफरी एपस्टीन से कथित तौर पर लाभ प्राप्त करने के आरोप
Trump In Epstein Files: दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को दुनिया का सबसे बड़ा 'पीसमेकर' बुलाते हैं। इसके पीछे उनका तर्क है कि उन्होंने महज 10 महीने में 8 युद्ध रुकवा दिए। ट्रंप के इस दावे पर दुनिया यकीन करे या न करे, लेकिन वे खुद इस बात को सार्वजनिक मंचों पर दोहराने से परहेज नहीं करते। वहीं, ट्रंप ने कई बार इस बात पर दुख भी जताया है कि दुनिया में 'शांति' लाने के लिए उन्होंने इतनी मेहनत की फिर भी नोबेल समिति ने उन्हें अब तक इस पुरस्कार से नहीं नवाजा है।
एक तरफ जहां ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने का दुख है, वहीं दूसरी ओर वो पिछले कुछ महीनों से एपस्टीन फाइल्स की वजह से सवालों के घेरे में हैं। यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन का ट्रंप के साथ 'दोस्ताना' जगजाहिर है। हर गुजरते दिन के साथ एपस्टीन और ट्रंप के बीच संबंधों की नई परतें खुलती जा रही हैं।
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इसी बीच अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की गई एपस्टीन फाइल्स में ट्रंप के नोबेल शांति पुरस्कार पाने की चाहत का भी जिक्र मिला है। सामने आए दस्तावेजों के मुताबिक, एपस्टीन ने ट्रंप के एक सहयोगी को ई-मेल लिखा था। इस ई-मेल में एपस्टीन लिखते हैं, "डोनाल्ड को अगर इस बात का पता चलेगा कि नोबेल समिति का चेयरमैन यहां रुका है तो उसका सिर फट जाएगा।" इस खुलासे ने ये सवाल खड़ा कर दिया कि क्या एपस्टीन को ट्रंप का 'नोबेल प्रेम' की जानकारी थी?
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यागलैंड की वजह से बिल गेट्स जैसे हस्तियों से मिला था एपस्टीन
दरअसल, मामले को और विस्तार से समझते हैं। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की गई जेफरी एपस्टीन की फाइलों में इस बात का खुलासा हुआ है कि नोबेल शांति पुरस्कार समिति के चैयरमेन रहे थॉरबोर्न यागलैंड से एपस्टीन की अच्छी दोस्ती थी। यागलैंड की वजह से ही वो बिल गेट्स और स्टीव बैनन जैसे प्रभावशाली लोगों के संपर्क में आया। बता दें कि साल 2009 से लेकर 2015 तक यागलैंड नोबेल समिति के प्रमुख थे।
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यागलैंड पर लगा भ्रष्टाचार का आरोप
75 वर्षीय यागलैंड नॉर्वे के पूर्व प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने साल 1996 से 1997 तक प्रधानमंत्री का पद संभाला था। साल 2009 से 2019 तक वो यूरोप परिषद के महासचिव रहे। उस दौरान उन्होंने नॉर्वे की नोबेल समिति की अध्यक्षता भी की थी। थोरब्योर्न यागलैंड पर यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से कथित तौर पर लाभ प्राप्त करने के आरोप में "गंभीर भ्रष्टाचार" का आरोप लगाया गया है।
नॉर्वे की वित्तीय अपराध इकाई, ओकोक्रिम, इस बात की जांच कर रही है कि 2011 और 2018 के बीच यागलैंड और उनके परिवार के सदस्य कथित तौर पर पेरिस और न्यूयॉर्क में एपस्टीन के अपार्टमेंट के साथ-साथ फ्लोरिडा के पाम बीच स्थित उनकी संपत्ति में रुके थे या नहीं। बता दें कि एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में यागलैंड का नाम हजारों बार सामने आता है। हालांकि, दस्तावेज में इस बात का जिक्र नहीं है कि ट्रंप को नोबेल पुरस्कार दिलाने के लिए कोई लॉबिंग की गई हो।
एक टीचर जिसने खड़ा किया 'एपस्टीन साम्राज्य'
वो 70 के दशक में न्यूयॉर्क में एक स्कूल में गणित और फिजिक्स टीचर था। माना जाता है कि उस स्कूल में पढ़ने वाले एक छात्र के पिता उससे काफी ज्यादा प्रभावित हुए। उन्होंने एपस्टीन की दोस्ती वॉल स्ट्रीट इन्वेस्टमेंट बैंक बेयर स्टनर्स से जुड़े एक इन्वेस्टर से कराई। कुछ सालों बाद एपस्टीन ने 'एपस्टीन एंड कंपनी' के नाम से खुद की एक फर्म खोल ली। उसने अमीर लोगों के पैसे मैनेज करने का काम शुरू कर दिया। धीरे-धीरे एपस्टीन की शोहरत अमेरिका में बढ़ती चली गई।
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कैसे हुई ट्रंप और एपस्टीन की दोस्ती?
एपस्टीन ने न्यू मेक्सिको में एक फार्महाउस, न्यूयॉर्क में सबसे बड़ा प्राइवेट घर और फ्लोरिडा में एक हवेली खरीद ली थी। इन जगहों पर वह शानदार पार्टियां करता था, जिनमें बिल क्लिंटन, मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग और पॉपस्टार माइकल जैक्सन जैसे चर्चित लोग शामिल होते थे। ट्रंप और उसकी मुलाकात भी एक ऐसी ही पार्टी में हुई थी। साल 2002 में ट्रंप ने एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा था, "मैं जेफ को 15 साल से जानता हूं, कमाल का आदमी है। हम दोनों को कम उम्र की खूबसूरत लड़कियां पसंद हैं।"
लोलिता एक्सप्रेस के किस्से
माना जाता है कि एपस्टीन का एक विमान था, जिसका नाम लोलिता एक्सप्रेस था। इस विमान में कम उम्र की लड़कियों को लेकर एपस्टीन के प्राइवेट आइलैंड (लिटिल सेंट जेम्स) ले जाया जाता था। इन आइलैंड पर पार्टियां होती थीं।साल 2004 में फ्लोरिडा के पाम बीच पर बनी एक 6 एकड़ की 'हाउस ऑफ फ्रेंडशिप' प्रॉपर्टी की वजह से ट्रंप और एपस्टीन के बीच दोस्ती में दरार पड़ गई थी। ट्रंप इस प्रॉपर्टी को खरीदना चाहते थे, लेकिन एपस्टीन राजी नहीं था। 15 नवंबर, 2004 को ट्रंप ने 356 करोड़ की बोली के साथ यह प्रॉपर्टी हासिल कर ली थी। हालांकि, इस घटना के बाद दोनों की दोस्ती में दरार आ गई थी।
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एपस्टीन का काला सच कब आया सामने?
एपस्टीन पर साल 2005 में 14 साल की लड़की को संबंध बनाने के लिए पैसे देने का आरोप लगा था। चौदह साल की एक लड़की के मां-बाप ने इल्ज़ाम लगाया कि जेफ़री एपस्टीन ने अपने घर में उनकी बेटी पर यौन हिंसा की। यही नहीं, एपस्टीन के घर की तलाशी के दौरान कई और लड़कियों की तस्वीरें भी मिलीं। इसके बाद साल 2008 में एपस्टीन को यौन अपराध के लिए दोषी ठहराया गया। उसे 18 महीने की सजा हुई। हालांकि, वह जेल से रिहा हो गया।
आलीशान जीवन और रहस्यमयी मौत
फिर 6 जुलाई, 2019 को न्यूयॉर्क में एपस्टीन की फिर से सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तारी हुई। 23 जुलाई को उसे सेल में बेहोश पाया गया। उसके गले पर निशान थे। 10 अगस्त, 2019 को एपस्टीन की जेल में ही मृत्यु हो गई।
सरकारी रिपोर्ट में कहा गया कि उसने फांसी लगाकर आत्महत्या की, मगर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया कि एपस्टीन की गर्दन की कुछ हड्डियां टूटी थीं। जेल में लगे कैमरों से कई फुटेज भी गायब मिले। हालांकि, उसकी मौत एक रहस्य बनकर रह गई।
