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नेपाल में Gen-Z आंदोलन के बाद पहला चुनाव, क्या बालेन शाह को प्रधानमंत्री देखते हैं युवा?

नेपाल चुनाव 2026 पर दुनिया के विभिन्न देशों की नजर है, क्योंकि सितंबर 2025 में युवाओं के हिंसक प्रदर्शनों के बाद यह पहला आम चुनाव है। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार गिर गई थी। इस बार सत्ता में वापसी के लिए 74 साल के केपी शर्मा ओली के सामने Gen-Z आंदोलन के चेहरा रहे काडमांडू के पूर्व मेयर व रैपर से राजनेता बने बालेन शाह हैं। तो लोगों के मन में सवाल है कि क्या इस चुनाव में Gen-Z ने बालेन शाह को संसद पहुंचाने के लिए मतदान किया है?

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क्या बालेन शाह पहुंचेंगे नेपाली संसद
Curated by: Pushpendra kumar
Updated Mar 6, 2026, 14:30 IST

नेपाल में आम चुनाव के लिए 5 मार्च को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक वोटिंग हुई। नेपाल चुनाव आयोग (Nepal Election Commission) के मुताबिक 60% वोटिंग हुई। वोटिंग के बाद अधिकारियों ने मतपेटियों को सील कर दिया। मीडिया खबरों के मुताबिक, रात 12 बजे से काउंटिंग शुरू होगी और इसी वीकेंड तक नतीजे सामने आएंगे। सवाल ये है कि नेपाल में सत्ता किसके हाथ जाएगी? हालांकि, ये तो चुनाव के नतीजे आने के बाद ही साफ हो पाएगा। ये साल 2025 में Gen G के विरोध प्रदर्शन के बाद पहला चुनाव है। हालात बिगड़ने के बाद इस्तीफा देने वाले केपी शर्मा ओली एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं। लेकिन उनके सामने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और उसके नेता के तौर पर बालेन शाह हैं, जो युवाओं के केंद्र में हैं। महज 35 साल के शाह काठमांडू के पूर्व मेयर और रैपर भी रहे हैं। शाह झापा-5 सीट से पूर्व पीएम ओली के खिलाफ ही ताल ठोंक रहे हैं। तो सवाल ये है कि क्या नेपाल में तख्ता पलट करने वाले बालेन को Gen-Z प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने के लिए वोट किया है?

केपी ओली V बालेन शाह

जानकारी के मुताबिक, नेपाल की आबादी 3 करोड़ के आसपास है, जिनमें 1.9 करोड़ वोटर हैं। इस बार सितंबर 2025 में युवाओं के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद नई सरकार की चाहत में वोट किया है। खास बात ये कि इस बार 8 लाख नए युवा वोटर हैं। पिछले साल सत्ता से हटाए गए 74 साल के मार्क्सवादी नेता केपी ओली सत्ता में वापसी की पुरजोर कोशिश में हैं। वहीं, उन्हें उनके ही गृह क्षेत्र झापा से पूर्व काठमांडू मेयर व 35 साल के रैपर से राजनेता बने बालेन शाह से सीधी टक्कर है।

झापा-5 केपी शर्मा ओली का गढ़

झापा-5 केपी शर्मा ओली का गढ़ माना जाता है। बीबीसी के हवाले से ओली ने 1991, 1994, 1999, 2013, 2017 और 2022 में झापा का संघीय संसद में प्रतिनिधित्व किया है। ऐसे में इस इलाक़े में उनकी पैठ तो रही है लेकिन चुनावी हवा में कई बार अतीत के पैटर्न काम नहीं आते हैं। इस सीट पर लगभग 163000 मतदाता हैं। 2022 के चुनाव में ओली को कुल 52,319 वोट मिल थे। वहीं, उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी नेपाली कांग्रेस के खगेन्द्र अधिकारी को 23,743 वोट मिले थे। उस समय राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रत्याशी को 11,748 वोटर्स ने अपना मत दिया था। लिहाजा, यहां से तय होगा कि ओली अपनी सीट बरकरार रख पाएंगे या शाह संसद में एंट्री लेंगे।

नेपाल में कितनी सीटों के लिए चुनाव

नेपाल संसद की 165 सीटों पर चुनाव के लिए कई प्रमुख नेता मैदान में हैं। संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा (275 सदस्य) के 165 सीटों के लिए प्रत्यक्ष चुनाव में 3400 से अधिक उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में हैं, जबकि 110 सीटें पार्टी प्रतिनिधित्व के माध्यम से चुनी जाएंगी। पहाड़ी इलाकों में मतदान खत्म होने के बाद बैलेट बॉक्स को मतगणना केंद्रों तक लाने में वक्त लग सकता है। मुख्य चुनाव आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने कहा कि प्रत्यक्ष चुनाव के प्रारंभिक परिणाम 24 घंटे के भीतर प्रकाशित कर दिए जाएंगे। मीडिया खबरों के हवाले से चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि नेपाल में लोकतंत्र आने के बाद लंबे समय से किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। इस बार भी ऐसा होते नहीं दिख रहा है। अगर गठबंधन की नौबत आती है तो नई सरकार शक्ल लेने में काफी वक्त लग सकता है।

प्रधानमंत्री पद की रेस में नेपाली कांग्रेस के नए प्रमुख 49 साल के गगन थापा भी हैं। उनका कहना है कि उम्मीद है कि इस बार एक ऐसी सरकार बनेगी, जो सुशासन वाली हो और भ्रष्टाचार मुक्त हो।

प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने क्या कहा?

उधर, अंतरिम सरकार चला रहीं प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने काठमांडू के धापासी स्थित मतदान केंद्र पर मतदान करने के बाद कहा कि अब उनका रोल पूरा हो चुका है। आज का यह चुनाव देश का भविष्य तय करने वाला है। नेपाल चुनाव पर दुनिया के कई देशों की नजर है, क्योंकि सितंबर 2025 में युवाओं के हिंसक प्रदर्शनों के बाद यह पहला आम चुनाव है।

मतदाताओं ने क्या कहा?

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के बालेंद्र शाह ने युवाओं के नायक के तौर पर पेश चुनावी मैदान पर थे। उनका चुनाव चिन्ह भी परिवर्तन की घंटी बजाने वाला है। झापा में वोट डालने के लिए कतार में खड़े मतदाताओं ने कहा, Gen-Z के विरोध प्रदर्शन में लोगों ने अपनी जान गंवाई और हम सभी को उम्मीद है कि उनका खून बदलाव लाएगा।

क्यों हुआ था आंदोलन?

साल 2025 में नेपाल में जब Gen-Z आंदोलन चरम पर था और आंदोलन के चलते प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया था। उस समय से हर किसी की जुबान पर बालेन शाह (Balen Shah) का ही नाम है। उस समय आंदोलनकारी बालेन का नाम लेकर नारेबाजी कर रहे थे। बालेन शाह इस आंदोलन का केंद्र थे। बालेन के फेसबुक और X पर नेपाली भाषा में किए गए पोस्ट पर जमकर कमेंट आ रहे थे, जिसमें से एक Now or never #balen भी कमेंट किया गया था। सोशल मीडिया पर बैन लगाने के बाद Gen-Z में भड़के गुस्से ने देखते ही देखते हिंसा का रूप ले लिया और कई मंत्रियों के साथ ही नेपाल की संसद को भी आग के हवाले कर दिया।

कौन हैं बालेन शाह

सीधे शब्दों में कहें तो बालेन शाह एक रैपर हैं, जिनकी आज की युवा पीढ़ी में काफी पैठ है। पेशे से वह एक स्ट्रक्चरल इंजीनीयर हैं और नेपाल की राजधानी काठमांडू के पूर्व मेयर हैं। इसके अलावा नेपाल में भड़के Gen-Z आंदोलन में जो एक नाम सबसे ज्यादा उभरकर सामने आया है वह बालेन शाह का ही है।

27 अप्रैल 1990 को जन्मे बालेंद्र शाह (Balendra Shah) उर्फ बालेन शाह काठमांडू के 15वें मेयर थे। वह पहले निर्दलीय उम्मीदवार भी थे, जिसने काठमांडू के मेयर का चुनाव जीता। साल 2010 से ही वह नेपाली हिप-हाप से जुड़े हुए हैं। साल 2022 के चुनाव में उन्होंने नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार सिरजना सिंह और सीपीएन (यूएमएल) के प्रत्याशी केशव स्थापित को हराकर चुनाव जीता था।

युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं बालेन शाह

जिस तरह से आंदोलनकारी बालेन शाह का नाम लेकर नारेबाजी कर रहे थे, इससे यह तो साफ है कि युवाओं में वह खासे पसंद किए जाते हैं। बालेन अगर सोशल मीडिया पर कोई बात छेड़ देते हैं तो उनका पोस्ट तेजी से वायरल होने लगती है और उनकी बात पर बहस चल पड़ती है। युवा उनके रहन-सहन, स्टाइल और जीवनशैली से खासे प्रभावित हैं। नेपाल में भड़के आंदोलन का केंद्र बिंदु बन गए। लेकिन दुनिया में वह पिछले कुछ वर्षों से अपनी पहचान छोड़ने में कामयाब रहे हैं।

टाइम मैगजीन में नाम

बालेन शाह का नाम साल 2023 में टाइम मैगजीन में छप चुका है। मैगजीन ने उन्हें Time 100 Next शख्सियतों की सूची में शामिल किया था। यही नहीं, द न्यू यॉर्क टाइम्स जैसे अखबारों ने भी उन्हें अपने पन्नों पर जगह दी है।

बालेन का भारत से संबंध?

जी हां, भारत में अगर हम बालेन की बात कर रहे हैं तो भारत से उनके संबंधों पर भी बात होगी। उन्होंने कर्नाटक में विश्वसराया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में Mtech की डिग्री ली है। इसके अलावा उनका संबंध भारत से ढूंढ़ेंगे तो वह बॉलीवुड फिल्म 'आदिपुरुष' से जुड़ता है। साल 2023 में जब यह फिल्म रिलीज हुई तो काठमांडू के मेयर बालेन शाह को फिल्म के कुछ डायलॉग्स को लेकर आपत्ति थी। उन्होंने इन डायलॉग्स को फिल्म से हटाने की मांग की। ऐसा नहीं करने पर उन्होंने नेपाल और काठमांडू में किसी भी भारतीय फिल्म को न चलने देने की धमकी भी दी थी।

ओली बनाम बालेन कैसे हो गया टकराव

2015 के आंदोलन के बाद अब दो पक्ष साफ नजर आने लगे हैं। बालेन शाह और केपी शर्मा ओली के बीच टकराव वर्तमान का नहीं, बल्कि पुराना है। बालेन शुरू से ही सरकारी नीतियों का विरोध करते आए हैं। दोनों के टकराव की जड़ में काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के 3500 से अधिक कर्मचारियों को लंबे समय से वेतन न मिलना भी था। काठमांडू के टीचर्स को भी चार महीने से सैलरी नहीं मिली थी तो उन्होंने मेयर बालेन से मदद मांगी थी।

उसी दौरान न्यू रोड में फुटपाथों का चौड़ीकरण किया जा रहा था। यूएमएल से जुड़े एक वार्ड अध्यक्ष ने इस परियोजना का विरोध किया। यूएमएल से जुड़े मंत्रालियों ने काम रोकने का आदेश भी जारी कर दिया। इस पर बालेन भड़क गए और उन्होंने विवादास्पद गिरि बंधु चाय बागान भूमि अदला-बदली घोटाले में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर नीतिगत भ्रष्टाचार का आरोप लगा दिया। यूएमएल के नेताओं ने बालेन पर हमला करते हुए उन्हें पिल्ला कहा। स्वयं ओली ने बालेन को राजनीति का बुलबुला बताकर खारिज कर दिया और कहा कि ये बुलबुला जल्द फूट जाएगा।

कैसे आंदोलन के केंद्र में आ गए बालेन शाह

नेपाल में राजनेताओं के बच्चों की भव्य जीवनशैली के खिलाफ सोशल मीडिया पर #Nepokid ट्रेंड करने लगा। इस पर सरकार ने इंटरनेट और सोशल मीडिया को नियंत्रित करने के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगा दिया। सरकार के इस कदम से युवा भड़क गए और इसे दुनिया का पहला Gen-Z आंदोलन कहा जाने लगा। हालांकि, युवाओं का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन सरकार ने इस पर कठोर प्रतिक्रिया दी। पुलिस कार्रवाई में 19 लोग मारे गए और सैकड़ों अन्य घायल हो गए। अकेले राजधानी काठमांडू में ही 18 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। बालेन ने इस पूरे आंदोलन को अपना समर्थन दिया। हालांकि, उन्होंने स्वयं Gen-Z नहीं होने के कारण इस आंदोलन में व्यक्तिगत तौर पर शामिल होने में असमर्थता जतायी। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में कहा, आयोजकों द्वारा निर्धारित आयु सीमा के कारण वे इसमें भाग नहीं ले सकते।

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