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न तो रिजीम चेंज, न ही ईरान को 'पाषाण युग' में भेज पाए, होर्मुज पर भी नाकाम, फिर क्यों इतरा रहे ट्रंप?

इस युद्ध को अमेरिका ने शुरू किया और इसे खत्म करने की छटपटाहट भी ईरान से ज्यादा उसी में देखने को मिली। इस युद्ध का तीसरा पक्ष इजराइल है, वह भी इस सीजफायर के पक्ष में नहीं था। इस युद्ध को लेकर इजराइल के उद्देश्य साफ थे। उसका मकसमद ईरान में रिजीम चेंज करना था।

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Photo : AP
अमेरिका-ईरान के बीच हुआ सीजफायर।
Written by: Alok Rao
Updated Apr 8, 2026, 09:24 IST

US Iran Ceasefire: बीते 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध की आग फैल गई। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने और मध्य पूर्व के देशों पर ईरान के हमलों के बाद दुनिया भर में ईंधन की किल्लत होने लगी थी। महंगाई बढ़ने लगी थी और बाजार धाराशायी होने लगे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बार-बार की धमकियों और ईरान के नहीं झुकने की वजह से युद्ध के नए स्तर पर पहुंचने के संकेत मिल रहे थे। लेकिन ऐसा लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का ईरान को दी गई 'अंतिम चेतावनी' काम कर गई और 14 दिनों का युद्धविराम लागू हो गया। अमेरिका और ईरान दो सप्ताह के सीजफायर पर राजी हो गए। बताया जा रहा है कि ईरान के 10 सूत्री मांगों पर अमेरिका तैयार हो गया है और इस सीजफायर के ब्योरों पर आगे इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच बातचीत होगी।

    अमेरिका के रुख पर उठ रहे सवाल

    इस सीजफायर को ईरान अपनी जीत के तौर पर पेश कर रहा है। सीजफायर की घोषणा होने के बाद ईरान में लोग खुशी से झूम उठे। ईरान की राजधानी तेहरान में लोग सड़कों पर आ गए। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लिए लोगों के चेहरों पर मुस्कान थी। उन्होंने 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगाकर अपने खुशी का इजहार किया। फिलहाल, इस सीजफायर से ईरान, इजराइल एवं मध्य पूर्व के लोगों को राहत मिलेगी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से तेल एवं गैस की आपूर्ति बहाल हो सकेगी। जाहिर है कि इससे दुनिया के उन देशों को भी राहत मिलेगी जो इस युद्ध की आंच महूसस कर रहे थे लेकिन इस सीजफायर और अमेरिका के रुख को लेकर एक्सपर्ट सवाल भी उठा रहे हैं।

    iran

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    ट्रंप में दिखी सीजफायर की छटपटाहट

    इस युद्ध को अमेरिका ने शुरू किया और इसे खत्म करने की छटपटाहट भी ईरान से ज्यादा उसी में देखने को मिली। इस युद्ध का तीसरा पक्ष इजराइल है, वह भी इस सीजफायर के पक्ष में नहीं था। इस युद्ध को लेकर इजराइल के उद्देश्य साफ थे। उसका मकसमद ईरान में रिजीम चेंज करना था लेकिन अमेरिका के उद्देश्य शुरू से बदलते रहे। इस युद्ध पर ट्रंप अपना रुख बार-बार बदलते रहे। कभी उन्होंने कहा कि उनका यह हमला प्रदर्शनकारियों पर ईरान की कार्रवाई के खिलाफ था। तो कभी कहा कि ईरान के तेल पर उनका नियंत्रण होना चाहिए। ईरान के मिसाइल, परमाणु कार्यक्रम खत्म करने के लिए अपने आक्रमण को सही ठहराया। उनकी नजर ईरान में रिजीम चेंज से ज्यादा तेहरान के साथ 'डील' करने पर थी।

    ईरान में नहीं हुआ रिजीम चेंज

    अभी ईरान और अमेरिका के बीच जिन मुद्दों पर सहमति बनी है और जिनके आधार पर सीजफायर की घोषणा हुई है, उसे देखें तो यूएस की एक तरह से 'हार' हुई है। पहली बात ईरान में कोई रिजीम चेंज नहीं हुआ है। ईरान में वही कट्टरपंथी विचारधारा वाली सरकार है जिसकी नुमाइंदगी सुप्रीम लीडर दिवंगत अयातुल्ला खामनेई करते आ रहे थे। ईरान की कमान अभी भी ईरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हाथों में है। खामनई के बेटे मोजतब खामनेई देश के नए सुप्रीम लीडर हैं। बताया जा रहा है कि मोजतबा घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है। यानी कि ईरान की सत्ता में वही लोग हैं जिनसे इजराइल की दुश्मनी है।

    donald trump

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    होर्मुज को अपने बलबूते नहीं खुलवा पाए ट्रंप

    दूसरा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिका अपने दम पर नहीं खुलवा पाया। ट्रंप इसे खुलवाने को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे थे। होर्मुज खुलवाने के लिए उन्होंने अपने-बड़े-बड़े एयरक्राफ्ट करियर, युद्धपोतों और मरीन को रवाना किया लेकिन ईरान के तेवरों और हमलों के बाद उन्हें अपने पैर पीछे खींचने पड़े। होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति तब बनी है जब ईरान इसके लिए राजी हुआ है। ट्रंप अपने बलबूते इस व्यापारिक मार्ग को नहीं खुलवा पाए। ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा था कि ईरान यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोलता है तो वह उसे 'पाषाण युग' में भेज देंगे। उन्होंने इसके लिए समयसीमा भी तय की थी लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियों से ईरान डरा नहीं।

    ईरान की शर्तों पर झुके ट्रंप!

    अपनी बात मनवाने के लिए ट्रंप बार-बार ईरान को धमकी दे रहे थे। अपनी ताजा धमकी ने उन्होंने कहा था कि वह ईरान के बिजली संयंत्रों को तबाह कर देंगे। वहां कोई बिजली नहीं होगी। उसे ऐसी चोट पड़ेगी कि वह दोबारा अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाएगा। ये सारी धमकियां एक तरह से ईरान पर बे-असर हो रही थीं। ईरान धमकियों से बे-परवाह अपनी शर्तों पर अड़ा रहा। ट्रंप की धमकियों के बीच ईरान के लोग सरकार के साथ आ गए। बिजली संयंत्रों को बचान के लिए उन्होंने मानव श्रृंखला बना ली। ईरान के संगीतकार संगीत बजाकर ट्रंप को संदेश देने लगे। ईरान ने साफ कर दिया कि धमकियों के आगे झुकेगा नहीं, भले ही उसे कितनी ही बड़ी कुर्बानी देनी पड़े। वह अपनी शर्तों से समझौता नहीं करेगा। ईरान तो नहीं झुका लेकिन अमेरिका को उसकी शर्तों के आगे नतमस्तक होना पड़ा।

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    सीजफायर पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या कहा

    युद्धविराम की वजह बताते हुए ट्रंप ने आगे कहा, 'ऐसा करने का कारण यह है कि हमने अपने सभी सैन्य उद्येश्यों को पहले ही पूरा कर लिया है और उनसे आगे भी निकल गए हैं। साथ ही हम ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति और मध्य-पूर्व में शांति सुनिश्चित करने वाले एक निर्णायक समझौते की दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं।' ट्रंप ने आगे लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर यह उनके लिए गर्व की बात है कि एक लंबे समय से चली आ रही यह समस्या अब समाधान के बेहद करीब है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने CNN को बताया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से किए गए दो हफ्ते के सीजफायर का इजरायल की भी हिस्सा है। अधिकारी ने बताया कि इजरायल भी बातचीत जारी रहने तक बमबारी रोकने पर समहत हो गया है।

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