- सिचुआन प्रांत में परमाणु हथियार इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विकसित कर रहा चीन
- 2030 तक चीन के पास 1000 से ज्यादा परमाणु हथियार होने की आशंका: SIPRI
- हमेशा परमाणु परीक्षण पर रोक से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन किया: चीन
China Nuclear Weapons: 21वीं सदी में चीन 'बुलेट ट्रेन' की रफ्तार से विकास की पटरी पर दौड़ रहा है। चाहे उद्योग हो या सैन्य शक्ति, हर सेक्टर में ड्रैगन, अमेरिका से लोहा ले रहा है। हालांकि, चीन का विकास दुनिया के लिए सिरदर्दी भी है। दरअसल, चीन दूसरे विकसित देशों की तरह न तो लोकतंत्र पर विश्वास करता है और न ही उस देश की सही जानकारी दुनिया के सामने उजागर होती है।
हालांकि, समय-समय पर चीन से जुड़ी कुछ अहम जानकारी दुनिया के हाथ लग ही जाती है। ऐसी ही चीन से जुड़ी एक अहम जानकारी अमेरिकी अखबार द न्यू यॉर्क टाइम्स (The New York Times) ने दुनिया से साझा की है।
अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन, दक्षिण-पश्चिमी प्रांत सिचुआन में अपने परमाणु हथियार इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विकसित कर रहा है। रिपोर्ट में सैटेलाइट इमेज के आधार पर निर्माण गतिविधियों का जिक्र किया गया है।
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अखबार ने क्या किया दावा?
रिपोर्ट के अनुसार, सिचुआन प्रांत के जिटोंग और पिंगटोंग इलाकों में स्थित परमाणु सुविधाओं का विस्तार और आधुनिकीकरण किया गया है। जिटोंग में नए बंकर, किलेबंदी और जटिल पाइपिंग सिस्टम के निर्माण की बात कही जा रही है।
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के अनुमान के मुताबिक 2026 के अंत तक चीन के पास 600 से अधिक परमाणु हथियार हो सकते हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) और अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुमान के मुताबिक, चीन प्रति वर्ष लगभग 100 नए परमाणु हथियार जोड़ रहा है और 2030 तक यह संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है। फिलहाल चीन के पास 600 से अधिक परमाणु हथियार हैं।
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सीक्रेट न्यूक्लियर टेस्टिंग कर रहा चीन: अमेरिका
बता दें कि अमेरिका कई बार चीन पर सीक्रेट न्यूक्लियर टेस्टिंग करने का आरोप लगा चुका है। ट्रंप प्रशासन के दौरान चीन और रूस को शामिल करते हुए एक बड़े परमाणु हथियार समझौते की मांग उठाई गई थी। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि यहीं पर चीन परमाणु हथियारों के लिए प्लूटोनियम से भरे कोर का उत्पादन कर रहा होगा।
चीन के प्रमुख ठिकाने
पिंगटोंग परिसरइस साइट को प्लूटोनियम कोर तैयार करने वाली सुविधा के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्य इमारत में करीब 360 फुट ऊंचे वेंटिलेशन टावर को अपग्रेड किया गया है, जिसमें नए वेंट और हीट डिस्पर्शन सिस्टम जोड़े गए हैं।
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जिटोंग परिसर
इस क्षेत्र में हाल के वर्षों में किलेबंदी और नए बंकर बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। यहां विकसित किए गए नए कॉम्प्लेक्स में जटिल पाइपलाइन नेटवर्क दिखाई देता है, जो संवेदनशील या खतरनाक पदार्थों के प्रबंधन की ओर संकेत करता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस स्थान पर उच्च-विस्फोटक परीक्षण किए जा सकते हैं, जो परमाणु हथियारों के इम्प्लोजन सिस्टम को सटीक बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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कितना खास होता है प्लूटोनियम?
प्लूटोनियम, परमाणु हथियार निर्माण में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सामग्री मानी जाती है। यदि इसके उत्पादन ढांचे का विस्तार होता है, तो संभावित रूप से परमाणु वारहेड की संख्या बढ़ाई जा सकती है। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित संयंत्रों में नई मशीनरी सक्रिय की गई है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया तेज हो सकती है।
साल 2022 से 2026 तक की सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन से पता चला है कि चीन सिचुआन प्रांत में गुप्त रूप से परमाणु हथियारों के ठिकाने बना चुका है। सिचुआन में जिटॉन्ग नाम की जगह पर घाटियों के बीच चीन ने बड़े-बड़े बंकर बनाए हैं। कुछ जानकारों ने कहा है कि चीन ने यहां पर पहाड़ों को खोदकर परमाणु अड्डे बनाए हैं।
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अमेरिका का डर और ट्रंप की अपील
अमेरिका को यह डर सता रहा है कि परमाणु हथियार की रेस में चीन उसे आने वाले कुछ साल में पीछे छोड़ सकता है। 2020 में अमेरिका ने दावा किया था कि चीन छिपकर परमाणु परीक्षण भी कर रहा है। ट्रंप ने कहा है कि चीन और रूस मिलकर अमेरिका के साथ न्यूक्लियर वेपन एग्रीमेंट करें। अमेरिका ने कहा है कि अमेरिका और रूस के बीच न्यूक्लियर आर्म्स कंट्रोल पैक्ट खत्म हो चुका है; लिहाजा, चीन को भी भविष्य के समझौते का हिस्सा बनाया जाए।
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अमेरिका के आरोपों पर चीन ने क्या कहा?
परमाणु परीक्षण के आरोपों को ड्रैगन ने सिरे से खारिज कर दिया है। चीन ने उल्टा कहा है कि अमेरिका अपने स्वंय के परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू करने का रास्ता तैयार करना चाहता है। चीन का मानना है कि उसने हमेशा परमाणु परीक्षण पर रोक से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन किया है।किन देशों के पास कितने परमाणु हथियार?
रूस █████████████████████████████████████████████████ (5580)अमेरिका ████████████████████████████████████████████████ (5225)
चीन ████████████ (600)
फ्रांस █████████ (290)
ब्रिटेन ████████ (225)
भारत ███████ (172)
पाकिस्तान ███████ (170)
इजरायल ████ (90)
उत्तर कोरिया██ (50)
परमाणु हथियारों के इतिहास पर एक नजर
अमेरिका ने जुलाई 1945 में अपना पहला परमाणु परीक्षण विस्फोट किया और अगस्त 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर दो परमाणु बम गिराए। महज चार साल बाद, सोवियत संघ (रूस) ने अपना पहला परमाणु परीक्षण विस्फोट किया।
इसके बाद यूनाइटेड किंगडम (1952), फ्रांस (1960), और चीन (1964) ने भी ऐसा ही किया। परमाणु हथियारों के भंडार को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य समान विचारधारा वाले देशों ने 1968 में परमाणु अप्रसार संधि (Nuclear Non-Proliferation Treaty) और 1996 में व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty) पर बातचीत की।
भारत, इजराइल और पाकिस्तान ने कभी भी परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर नहीं किए, फिर भी उनके पास परमाणु हथियार मौजूद हैं।
