अफगानिस्‍तान में तालिबान का बढ़ता खौफ, जला डाले कई स्‍कूल, घर छोड़कर भागे हजारों लोग

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Updated Jul 13, 2021 | 15:39 IST

उत्तरी अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते प्रभाव के कारण हजारों की संख्‍या में लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। चिलचिलाती गर्मी में लोग प्लास्टिक के टेंट और गंदगी भरे माहौल में रहने को मजबूर हैं।

तालिबान के खौफ से बेघर टेंट से झांकती एक अफगान मासूम
तालिबान के खौफ से बेघर टेंट से झांकती एक अफगान मासूम  |  तस्वीर साभार: AP

कैंप इस्तिकलाल (अफगानिस्तान) : उत्तरी अफगानिस्तान में तालिबान की सक्रियता बढ़ने के कारण हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। इन हजारों लोगों में से ही एक है 11 या शायद 12 वर्षीय सकीना, जिसे तालिबान के उसके गांव पर कब्जा करने और स्थानीय स्कूल को जलाकर खाक करने के बाद अपने परिवार के साथ अपना घर छोड़ना पड़ा।

देश के उत्तरी हिस्से में स्थित मजार-ए-शरीफ में एक चट्टान पर बने एक अस्थायी शिविर में ऐसे करीब 50 मजबूर परिवार रह रहे हैं। वे प्लास्टिक के टेंट में चिलचिलाती गर्मी में रहते हैं, जहां दोपहर में पारा 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इस स्थान पर एक भी पेड़ नहीं है और पूरे शिविर के लिए केवल एक शौचालय है। वह एक गंदा सा तंबू है, जो एक गड्ढे पर बना है, जिसमें से काफी दुर्गंध आती है।

An internally displaced Afghan woman stands with her daughters in front a makeshift tent in a camp on a rocky patch of land, after fleeing fighting between the Taliban and Afghan security personnel, on the edge of the city of Mazar-e-Sharif, northern Afghanistan, Thursday, July 8, 2021. Thousands of people have fled Taliban insurgents sweeping across northern Afghanistan, fearful of their harsh rule. (AP Photo/Rahmat Gul)

56 हजार परिवारों ने छोड़े घर

सरकार के शरणार्थी एवं प्रत्यावर्तन मंत्रालय के अनुसार, तालबिान की गतिविधियों के बढ़ने के कारण पिछले 15 दिन में 56,000 से अधिक परिवार अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जिनमें से अधिकतर देश के उत्तरी हिस्से से हैं।

कैंप इस्तिकलाल में एक के बाद एक परिवार ने तालिबानी कमांडर द्वारा भारी-भरकम हथकंडे अपनाने की बात बताई, जिन्होंने उनके कस्बों तथा गांवों पर कब्जा कर लिया है। इनमें से अधिकतर लोग जातीय अल्पसंख्यक समुदाय 'हजारा' से नाता रखते हैं। तालिबान की इन हरकतों से उसके उस वादे के संदर्भ में सवाल खड़े हो गए हैं, जिसमें उसने कहा था कि वे अतीत के अपने कठोर शासन को नहीं दोहराएगा।

An internally displaced Afghan woman who fled her home due to fighting between the Taliban and Afghan security personnel, burns thorny twigs to make tea in a makeshift tent camp on a rocky patch of land on the edge of the city of Mazar-e-Sharif, northern Afghanistan, Thursday, July 8, 2021. Thousands of people have fled Taliban insurgents sweeping across northern Afghanistan, fearful of their harsh rule. (AP Photo/Rahmat Gul)

स्‍कूल को लगाई आग

शिविर में रह रही सकीना ने बताया कि आधी रात की बात है जब उसके परिवार ने अपना सामान उठाया और वे बल्ख प्रांत स्थित अपने अब्दुलगन गांव से भाग निकले, लेकिन उनके यह कदम उठाने से पहले तालिबान स्थानीय स्कूल में आग लगा चुका था। सकीना ने कहा कि उसे समझ नहीं आता कि आखिर उसका स्कूल क्यों जलाया गया।

उन्होंने बताया कि कैंप इस्तिकलाल में बिजली नहीं है और कई बार रात के अंधरे में उन्हें आवाजे सुनाई देते हैं। 'मुझे लगता है कि शायद तालिबानी यहां आ गए हैं। मैं बहुत डरी हुई हूं।' सकीना का सपना एक दिन इंजीनियर बनने का है।

An internally displaced Afghan girl whose family fled their home due to fighting between the Taliban and Afghan security personnel, eats bread as she stand in front of her makeshift tent at a camp on the outskirts of Mazar-e-Sharif, northern Afghanistan, Thursday, July 8, 2021. As the Taliban surge through the north of Afghanistan, a traditional stronghold of U.S.-allied warlords and an area dominated by the country’s ethnic minorities, thousands of families like this girl’s are fleeing their homes, fearful of living under the insurgents’ rule. (AP Photo/Rahmat Gul)

कई लोगों को बनाया बंधक

वहीं, सांग शंदा गांव से भागकर आए याकूब मरादी ने बताया कि तालिबान ने उनके गांव के लोगों को धमकाया। मरादी के भाई और परिवार के कई सदस्यों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है... 'उन्हें बंधक बना लिया गया है ताकि वह वहां से जाएं नहीं।' मरादी ने कहा, 'शायद उसे आज छोड़ दिया जाए, लेकिन उसे वहां से जाने नहीं दिया जाएगा।'

अमेरिका और तालिबान के बीच फरवरी 2020 में हुआ समझौता विद्रोहियों को प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा करने से रोकता है, लेकिन अब भी दक्षिण में कंधार और उत्तर में बादगीस पर उनका कब्जा है।

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