US Iran तनाव के बीच आज हसन रूहानी से मिलेंगे पीएम मोदी, ट्रंप से है 36 का आंकड़ा

दुनिया
Updated Sep 26, 2019 | 09:55 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

अमेरिका और ईरान तनाव के बीच पीएम नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्‍ट्रपति हसन रूहानी से मुलाकात होने वाली है। यह मुलाकात ऐसे समय में होने जा रही है, जबकि अमेरिका के साथ भारत के रिश्‍ते नई ऊंचाइयां छूते दिख रहे हैं।

PM Narendra Modi and Hassan Rouhani
पीएम मोदी और हसन रूहानी (फाइल फोटो)  |  तस्वीर साभार: PTI

मुख्य बातें

  • अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पीएम मोदी और हसन की मुलाकात होने जा रही है
  • भारत के अमेरिका से बेहतर संबंध हैं तो ईरान के साथ भी उसके अच्‍छे रिश्‍ते हैं
  • वैश्विक नेता अमेरिका-ईरान तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हैं

संयुक्त राष्ट्र : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के 74वें अधिवेशन में हिस्‍सा लेने के लिए न्‍यूयार्क में हैं, जहां दुनिया के कई अन्‍य देशों के नेता भी जुटे हुए हैं। इस दौरान उनकी अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप सहित दुनिया के कई अन्‍य नेताओं से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातचीत हुई, जिसका सिलसिला अब भी जारी है। पीएम मोदी इसी क्रम में आज ईरान के राष्‍ट्रपति हसन रूहानी से मिलेंगे, जिनका अमेरिका के साथ छत्‍तीस का आंकड़ा है।

इससे पहले ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और रूहानी की भी यहां मुलाकात हो सकती है, पर इसकी संभावान फिलहाल नजर नहीं आ रही है। पीएम मोदी की ईरान के राष्‍ट्रपति से मुलाकात ऐसे समय में होने जा रही है, जबकि अमेरिका के साथ उसका तनाव चरम पर पहुंच गया है, जबकि भारत-अमेरिका के रिश्‍ते नई ऊंचाइयों को छूते नजर आ रहे हैं। पीएम मोदी और रूहानी की मुलाकात स्‍थानीय समयानुसार, पूर्वाह्न करीब 11 बजे (भारतीय समयानुसार रात करीब 8:30 बजे)  होने वाली है।

भारत के जहां अमेरिका से अच्‍छे ताल्‍लुकात हैं, वहीं ईरान से भी बेहतर रिश्‍ते हैं और इसलिए यह मुलाकात बेहद खास होने वाली है। इससे पहले पीएम मोदी और डोनाल्‍ड ट्रंप ने ह्यूस्‍टन में Howdy Modi कार्यक्रम को साथ-साथ संबोधित किया तो बाद में न्‍यूयार्क में भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और कई अन्‍य मुद्दों पर सहमति बनी। वहीं, अमेरिका और ईरान के संबंधों में तनाव चरम पर पहुंच गया है। सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी के दो संयंत्रों पर हुए मिसाइल हमलों के बाद इसमें और बढ़ोतरी हुई है।

सऊदी अरब की तेल कंपनी के संयंत्रों पर हमले की जिम्‍मेदारी यमन के हौती विद्रोहियों ने ली है और अमेरिका के साथ-साथ सऊदी अरब का भी मानना है कि यमन के हौती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन हासिल है। वहीं, ट्रंप ईरान को पहले ही आतंकियों के लिए नंबर 1 देश बता चुके हैं। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक नेता इस कोशिश में जुटे हैं कि संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के अधिवेशन के दौरान ट्रंप और रूहानी की मुलाकात हो जाए, पर इसकी संभावना नजर नहीं आ रही है।

फ्रांस के राष्‍ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने कहा कि अगर रूहानी, राष्ट्रपति ट्रंप से मिले बिना देश से चले गए तो वह एक अवसर खो देंगे, क्योंकि ऐसा मौका अगले कुछ महीनों तक दोबारा नहीं आने वाला। उन्‍होंने यह भी कहा कि ट्रंप तेहरान नहीं जाएंगे और इसलिए रूहानी को उनसे यहीं मिलना होगा, पर ईरान के राष्ट्रपति ने साफ कर दिया कि जब तक उनके देश पर पाबंदियां रहेंगी, अमेरिका से बातचीत की संभावना नहीं है। उन्‍होंने यह भी कहा कि ट्रंप के साथ 'स्मृति फोटो' खिंचवाने में उन्‍हें कोई दिलचस्पी नहीं है।

इससे पहले पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी संकेत दिए थे कि वह ईरान-अमेरिका के बीच तनाव करने में दखल दे सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने भी उनसे ईरान से बात करने के लिए कहा है और वह मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि इससे उलट ट्रंप ने कहा कि पाकिस्‍तान ने मध्‍यस्थता की इच्‍छा जताई है, पर इसे लेकर अमेरिका अभी राजी नहीं हुआ है। इन घटनाक्रमों के बीच पीएम मोदी की ईरान के राष्‍ट्रपति से होने वाली मुलाकात को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

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