तालिबान को पाकिस्‍तानी लड़ाकों का समर्थन, निशाने पर भारत

अफगानिस्‍तान में तालिबान के बढ़ते दबदबे के बीच 10 हजार से अधिक पाकिस्‍तानी लड़ाकों के वहां पहुंचने की जानकारी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि ISI ने उन्‍हें भारतीय हितों को निशाना बनाने के निर्देश दिए हैं।

तालिबान को पाकिस्‍तानी लड़ाकों का समर्थन, निशाने पर भारत
तालिबान को पाकिस्‍तानी लड़ाकों का समर्थन, निशाने पर भारत  |  तस्वीर साभार: ANI

नई दिल्ली : अफगानिस्‍तान में तालिबान की बढ़ती धमक पर दुनियाभर की नजरें हैं। भारत भी यहां पल-पल बदल रहे हालात पर करीब से नजर बनाए हुए है। चिंता अफगानिस्‍तान में तालिबान के समर्थन में बढ़ती पाकिस्‍तान लड़ाकों की भूमिका को लेकर भी है, जिनकी संख्‍या 10 हजार से अधिक बताई जाती है। इन पाकिस्‍तानी लड़ाकों के निशाने पर भारत है, जिसने बीते वर्षों में यहां कई विकासात्‍मक कार्यों में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बताया जा रहा है कि अफगानिस्‍तान में सक्रिय इन पाकिस्‍तानी लड़ाकों को पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस (ISI) की ओर से लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे भारत-निर्मित संपत्तियों को निशाना बनाएं। भारत ने पिछले दो दशकों में अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के प्रयास में 3 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है। डेलाराम और जरांज सलमा बांध के बीच 218 किलोमीटर की सड़क और अफगान संसद भवन, जिसका उद्घाटन 2015 में किया गया था, को अफगान लोगों के लिए भारत के बड़े योगदानों में गिना जाता है।

अफगानिस्‍तान में 10 हजार से अधिक पाकिस्‍तानी लड़ाके

खुफिया सूत्रों और अनुमानों के मुताबिक, अशरफ गनी के नेतृत्व वाली अफगानिस्तान सरकार के खिलाफ तालिबान के हमले का खुलकर समर्थन करने के लिए 10,000 से अधिक पाकिस्तानियों ने अफगानिस्तान में युद्ध क्षेत्र में प्रवेश किया है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, पाकिस्तानी और तालिबान लड़ाकों को भारत निर्मित संपत्तियों को निशाना बनाने तथा वहां भारतीय सद्भावना के किसी भी प्रतीक को नष्‍ट करने के निर्देश दिए गए हैं। भारत ने अफगानिस्तान में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया। उसने शिक्षकों, सहायक कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने में अहम भूमिका निभाई।

हक्कानी नेटवर्क सहित पाकिस्तान समर्थित इस्लामिक आतंकवादी समूह यहां विगत कई वर्षों से भारत के खिलाफ सक्रिय हैं। भारत की नजरें ​​काबुल हवाईअड्डे पर भी है, अब बहुत लंबे समय तक अमेरिकी सुरक्षा में नहीं रहने वाला है। बगराम हवाई अड्डे सहित अमेरिकी रक्षा बलों के अधीन आने वाले कई हवाई क्षेत्र तालिबान के साथ चल रहे सत्ता संघर्ष के कारण खाली हो गए हैं।

सिविल वर्क में लगे भारतीय कामगारों को भी बाहर जाने को कहा गया है। भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी WAPCOS में बांध परियोजनाओं के लिए कुछ अधिकारी थे। भारत ने हाल ही में काबुल शहर को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए शहतूत बांध सहित लगभग 350 मिलियन अमरीकी डालर के कार्यों की भी घोषणा की थी।

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