अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इराक में फंसे 25000 भारतीय, मोसुल का खौफ अब भी बरकरार

Indians in Iraq amid US Iran tension: अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव से इराक के विभिन्‍न इलाकों में रह रहे लगभग 25,000 भारतीय खौफजदा हैं, जो मोसुल की घटना से पहले से ही डरे हुए हैं।

Indians working in Iraq are scared amid tension between US and Iran
वर्ष 2014 में तनाव के बाद बड़ी संख्‍या में भारतीय कामगार इराक से लौटे थे (फाइल फोटो)  |  तस्वीर साभार: PTI

मुख्य बातें

  • अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से इराक में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों में चिंता है
  • इराक के विभिन्‍न शहरों में करीब 25,000 भारतीय रहते हैं, जो विभिन्‍न सेक्‍टर में कार्यरत हैं
  • इस खाड़ी देश में कार्यरत ज्‍यादातर भारतीय निर्माण कार्यों और तेल कंपिनयों के साथ जुड़े हैं

बगदाद : अमेरिका और ईरान में तनाव कम होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इस बीच इराक की राजधानी बगदाद स्थित 'ग्रीन जोन' में एक बार फिर 5 रॉकेट दागे गए हैं। हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन जिस तरह से आए दिन यहां आए दिन रॉकेट दागे जा रहे हैं और तनाव बढ़ता जा रहा है, उससे लोगों में खौफ बैठ गया है। इससे यहां भारतीय समुदाय के लोग भी डरे हुए हैं, जो यहां विभिन्‍न इलाकों में कार्यरत हैं।

इराक में 25,000 भारतीय फंसे
इराक के विभिन्‍न हिस्‍सों में अनुमानत: लगभग 25,000 भारतीय काम करते हैं, जो मुख्‍य रूप से बुनियादी संरचना और तेल से जुड़ी विभिन्‍न कंपनियों के साथ काम करते हैं। इराक के मोसुल में 2014 में करीब 40 भारतीयों के अचानक लापता हो जाने के बाद पहले से ही खौफजदा भारतीय समुदाय के लोगों में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव से और डर बैठ गया है। जानकारों का कहना है कि अगर यहां इसी तरह तनाव जारी रहा तो अमेरिका-ईरान के बीच सीधे युद्ध से भी इनकार नहीं किया जा सकता, जिसका असर यहां रह रहे आम लोगों के साथ-साथ भारतीय समुदाय के लोगों पर भी होगा।

भारत ने जारी की एडवाइजरी
भारत सरकार की ओर से इस संबंध में पहले ही एडवाइजरी जारी की गई है, जिसमें कहा गया है कि भारतीय नागरिक बहुत आवश्‍यक न होने पर इराक की यात्रा करने से बचें। इसमें इराक में रह रहे भारतीयों से सतर्क रहने और देश के दूसरे शहरों में अनावश्‍यक यात्रा से बचने और इस इस दौरान सतर्क रहने की सलाह भी दी गई। इस बीच इराक स्थित भारतीय दूतावास भी विशेष सतर्कता बरत रहा है और हालात पर करीब से नजर बनाए हुए है।

यह एडवाइजरी भारत सरकार की ओर से तभी जारी की गई थी, जब इसी महीने की शुरुआत में इराक में अमेरिका के ड्रोन हमले में ईरान के सैन्‍य जनरल कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी। ईरान ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वह इसका बदला जरूर लेगा। इसके बाद से ईरान समर्थित बलों द्वारा इराक में अमेरिकी सैनिकों को निशाने बनाते हुए कई रॉकेट दागे जाने की रिपोर्ट आई है, जिससे तनाव और बढ़ता जा रहा है।

क्‍या हुआ था मोसुल में?
यहां उल्‍लेखनीय है कि साल 2014 में इराक के मोसुल से करीब 40 भारतीय लापता हो गए थे, जिनके बारे में अरसे तक कोई सुराग नहीं मिला। लगभग चार साल बाद मार्च 2018 में इसका खुलासा हुआ कि इस्‍लामिक स्‍टेट के आतंकियों ने उन्‍हें अगवा कर उनकी नृशंस हत्‍या कर दी थी। उस घटना के बाद से हालांकि इराक में कहीं भी अब तक भारतीयों पर हमले नहीं हुए हैं, पर मौजूदा अमेरिका-ईरान तनाव से भारतीय समुदाय के लोगों में एक बार फिर डर बैठ गया है।

इरबिल में रहते हैं सबसे अधिक भारतीय
इराक में रह रहे भारतीय नागरिकों में से सबसे अधिक संख्‍या इरबिल में रहती है, जो उत्‍तरी स्‍वायत्त क्षेत्र कुर्दीस्‍तान की राजधानी है। इनमें से अधिकांश यहां आयात-निर्यात व्‍यापार कार्यों से जुड़े हैं। इनमें से कई प्रोफेशनल और कुशल कामगार हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति भी अच्‍छी है। यूं तो कुर्दीस्‍तान सुरक्षित क्षेत्र है, लेकिन इरबिल के पास अमेरिकीर सैन्‍य ठिकाने को ईरान द्वारा निशाना बनाया जा चुका है, जिससे भारतीय खौफजदा हैं, क्‍योंकि यहां तनाव बढ़ने पर जानमाल का बड़ा नुकसान हो सकता है, जिसका असर उनके रोजगार पर भी पड़ेगा।

इसके अतिरिक्‍त राजधानी बगदाद और दक्षिणी बंदरगाह शहर बसरा में भी अच्‍छी तादाद में भारतीय रहते हैं, जिनमें से अधिकांश अकुशल कामगार हैं और निर्माण कार्यों या तेल कंपनियों से जुड़े हैं।

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