UNGA में इमरान खान के नापाक बोल का भारत देगा जवाब, राइट टू रिप्लाई का करेगा इस्तेमाल

दुनिया
Updated Sep 27, 2019 | 22:38 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Imran khan speech in UNGA: संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा की बैठक में इमरान खान के भाषण में कुछ नया नहीं था। प्रोपगैंडा का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने निशाना साधा। लेकिन भारत ने जवाब देने का फैसला किया है।

imran khan in unga
यूएनजीए में इमरान खान के नापाक बोल 

मुख्य बातें

  • यूएनजीए में इमरान खान ने फिर अलापा कश्मीर राग
  • राइट टू रिप्लाई के तहत भारत देगा जवाब
  • यूएनजीए के मंच से पाकिस्तान ने अमेरिका को भी कोसा

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के पीएम इमरान खान( Imran Khan) ने कश्मीर पर वही पुराना राग अलापा। इसके साथ ही वो कट्टर और उदार इस्लाम के बीच फर्क समझाते रहे है। यूएनजीए में वो भारत पर दोषारोपण करते रहे कि किस तरह से कश्मीर में ज्यादती हो रही है। कुल मिलाजुलाकार वो प्रोपगैंडा राजनीति में शामिल हो गया। लेकिन अब भारत ने उसे मुंहतोड़ जवाब देने का फैसला किया है। राइट टू रिप्लाई के तहत भारत शनिवार सुबह पौने सात से 7 बजे के बीच जवाब देगा। 

इमरान खान ने एक बार फिर यूएन के सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाते हुए परमाणु युद्ध की धमकी दी। इमरान की जुबां पर कट्टर इस्लाम और उदार इस्लाम रहा। करीब 30 मिनट के भाषण में वो सिर्फ और सिर्फ कश्मीर का राग अलापते रहे। इमरान कहते रहे है कि आज की तारीख में वहां लोग कर्फ्यू के साए में जी रहे हैं। कश्मीर में मानवाधिकार का हनन किया जा रहा है। 

 

यूपीए-2 सरकार में गृहमंत्री रहे शख्स के नाम का जिक्र करते हुए इमरान खान ने कहा कि हिंदू आतंकवाद का जिक्र तो वहीं से आया था। और उस एजेंडे को मौजूदा सरकार नए कलेवर के साथ पेश कर रही है। यही नहीं देश और विश्व के मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि पाकिस्तान को तो खाम खा बदनाम किया गया है। कश्मीर के लोगों के साथ जो सलूक किया जा रहा है उससे निपटने के लिए दुनिया के मुस्लिम देशों को आगे आना चाहिए। 

इमरान खान ने कहा कि अफगानिस्तान में ाआज जो कुछ हो रहा है उसके लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया जाता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय समाज को पिछली सदी में 80 के दशक को याद रखने की जरूरत है जब सोवियत सेनाएं उस मुल्क में दाखिल हुईं। सोवियत सेनाओं से निपटने के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने लड़ाकों को जिहाद के नाम पर फंडिंग की और पाकिस्तान ने सहयोग किया। लेकिन यह अपने आप में विरोधाभास है कि पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए दोषी ठहरा दिया गया। 

 

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