Srilanka Presidential Election: गोटाबोया राजपक्षे के हाथ में श्रीलंका की कमान, जानें- भारत के लिए मायने

दुनिया
Updated Nov 18, 2019 | 13:51 IST

Srilanka Presidential Election 2019: श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए शनिवार को मतदान हुआ था। इस चुनाव पर श्रीलंका के साथ साथ भारत और चीन की नजरें टिकी हुई थीं। गोटाबोया राजपक्षे के हाथ में अब श्रीलंका है।

Sajith Premadasa Gotabaya Rajapaksa who will be next president of srilanka and meaning for india
श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे पर भारत की टिकी नजर 

मुख्य बातें

  • शनिवार को श्रीलंका में हुए थे राष्ट्रपति चुनाव, 1.6 करोड़ लोगों ने मतदान में लिया था हिस्सा
  • मुख्य मुकाबला साजिथ प्रेमदासा और गोटाबोया राजपक्षे के बीच में था
  • गोटाबोया राजपक्षे को आमतौर पर भारत विरोधी रुख के लिए जाना जाता है।

नई दिल्ली। श्रीलंका की कमान पीपीपी के गोटाबोया राजपक्षे के हाथ में है उन्होंने यूनाइटेड नेशनल पार्टी के उम्मीदवार साजिथ प्रेमदासा को हरा दिया। शनिवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए और श्रीलंका पोडुजना परमुना पार्टी के गोटाबोया राजपक्षे के बीच में था। श्रीलंका के करीब 1.6 करोड़ मतदाताओं ने इन उम्मीदवारों की किस्मत मतपेटिका में कैद की थी। आम तौर पर श्रीलंका का झुकाव भारत की तरफ रहा है। लेकिन महिंदा राजपक्षे जब सत्ता में आए तो श्रीलंका का झुकाव चीन की चरफ बढ़ा और इसका उदाहरण हम हंबनटोटा बंदरगाह के रूप में देख भी सकते हैं। अब जब श्रीलंका गोटाबोया राजपक्षे के हाथ में है तो भारत के लिए इसके मायने क्या हैं यह जानना दिलचस्प है। 

अगर साजिथ प्रेमदासा और गोटाबोया राजपक्षे की पृष्ठभूमि को देखें तो दोनों बड़े राजनीतिक परिवारों से आते हैं। प्रेमदासा, पूर्व राष्ट्रपति रनसिंघे प्रेमदासा( इनकी हत्या कर दी गई थी) के बेटे हैं। इसके साथ ही गोटाबोया राजपक्षे भी पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई हैं। गोटाबोया राजपक्षे के बारे में कहा जाता है कि तमिल विद्रोहियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करते हुए उन्होंने जाफना को एलटीटीई से आजाद कराया था। 

श्रीलंका में जब महिंदा राजपक्षे की सरकार के उस दौरान एलटीटीई के खिलाफ सघन अभियान चलाया गया था और उस अभियान की अगुवाई गोटाबोया राजपक्षे कर रहे थे। गोटाबोया के ऊपर मानवाधिकार उल्ंलघन के गंभीर आरोप लगे। लेकिन एलटीटीई के खिलाफ कार्रवाई में वो भारत सरकार को कम से कम नाराज करने में कामयाब रहे। ये बात अलग है कि भारत ने सीधे तौर पर तमिल विद्रोहियों के खिलाफ श्रीलंका सरकार की कार्रवाई का विरोध नहीं किया था। लेकिन भारत सरकार का स्पष्ट मत था कि मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। 

अब सवाल ये है कि अगर दोनों में से कोई एक शख्स श्रीलंका की कमान संभालता है तो उसका भारत पर किस तरह असर पड़ेगा। इस विषय पर जानकारों की राय जुदा है। कुछ लोगों का मानना है कि श्रीलंका की कमान साजिथ प्रेमदासा के हाथ में हो या गोटाबोया राजपक्षे के हाथ में भारत को परेशान होने की जरूरत नहीं है। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि अगर आप एलटीटीई के सफाए बात करें तो उसका सारा श्रेय महिंदा राजपक्षे के साथ साथ गोटाबोया राजपक्षे को भी जाता है।

राजपक्षे की सरकार कहीं न कहीं ये मान कर चलती थी कि श्रीलंका में तमिल विद्रोही उतने ताकतवर नहीं हुए होते अगर भारत की तरफ से परोक्ष या प्रत्यक्ष साथ नहीं मिला होता, हालांकि ये भी बात थी कि श्रीलंका सरकार की तरफ से इस तरह का औपचारिक बयान नहीं आता था। श्रीलंका में चुनाव प्रचार के दौरान गोटाबोया राजपक्षे ने राष्ट्रवाद को अपने चुनावी एजेंडे में शामिल किया। उन्होंने भारत के खिलाफ भाषण करने से बचते रहे। लेकिन भारत में मानना है कि जिस तरह से उनके भाई के शासन के दौरान श्रीलंका एक तरह से चीन की तरफ झुका वैसे में अगर गोटाबोया के हाथ में कमान आती है तो श्रीलंका एक बार फिर चीन के पाले में जा सकता है। 

अगली खबर
Srilanka Presidential Election: गोटाबोया राजपक्षे के हाथ में श्रीलंका की कमान, जानें- भारत के लिए मायने Description: Srilanka Presidential Election 2019: श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए शनिवार को मतदान हुआ था। इस चुनाव पर श्रीलंका के साथ साथ भारत और चीन की नजरें टिकी हुई थीं। गोटाबोया राजपक्षे के हाथ में अब श्रीलंका है।
loadingLoading...
loadingLoading...
loadingLoading...